ई-कचरे का डंपिंग क्षेत्र बन रहे एनसीआर : एसोचैम सर्वे

By: | Last Updated: Friday, 30 August 2013 10:27 AM
ई-कचरे का डंपिंग क्षेत्र बन रहे एनसीआर : एसोचैम सर्वे

नई दिल्ली: एक
अनुमान के मुताबिक
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
(एनसीआर) प्रतिवर्ष 50,000 टन
ई-कचरे को उत्पन्न करता है,
जिसके चलते वर्ष 2015 तक
राजधानी का बाहरी इलाका इस
ई-कचरे का डंपिंग क्षेत्र बन
जाएगा.

उद्योग जगत द्वारा कराए गए
सर्वेक्षण के गुरुवार को
सार्वजनिक होने के साथ ही इस
बात का खुलासा हुआ. एसोचैम
द्वारा किए गए एक अध्ययन
‘ई-वेस्ट इन इंडिया बाई 2015’ के
अनुसार, वर्तमान समय में
दिल्ली प्रतिवर्ष करीब 30,000 टन
ई-कचरा उत्पन्न करती है.

शहर में 1.5 लाख से अधिक श्रमिक
विभिन्न संगठित और असंगठित
पुनर्चक्रण ईकाइयों में
कार्यरत हैं. एसोचैम के
महासचिव डी. एस. रावत ने कहा,
“शहर में प्रतिदिन 8,500 मोबाइल
हैंडसेट, 5,500 टीवी सेट और 3,000
निजी कंप्यूटरों को उनके
विभिन्न उपकरणों का दोबारा
इस्तेमाल करने के लिए नष्ट
किया जा रहा है.”

अध्ययन में कहा गया कि एनसीआर
क्षेत्र में बिना सुरक्षा
उपायों के किए जा रहे इस
पुनर्चक्रण कार्य के
अंतर्गत इन इलेक्ट्रॉनिक
उपकरणों से निकलने वाले
ई-कचरे को खुले में जलाया जा
रहा है, जिससे सीसा एवं
पारायुक्त विषैली गैसें एवं
अन्य तत्व वायु में घुलकर
पर्यावरण को भारी नुकसान
पहुंचा रही हैं.

अध्ययन में कहा गया, “देश में
मुंबई और चेन्नई अनुपयोगी
कंप्यूटरों व इलेक्ट्रॉनिक
कचरे के सबसे बड़े आयातक हैं,
लेकिन दिल्ली ई-कचरे की
रीसाइक्लिंग के मुख्य
केंद्र के रूप में उभरी है.”

एसोचैम स्वास्थ्य समिति के
अध्यक्ष बी. के. राव ने कहा कि
घरेलू ई-कचरे जैसे
कंप्यूटरों, मोबाइलों और
फ्रीजों में 1,000 से अधिक
विषाक्त सामग्री होती है,
जिसके कारण रीसाइक्लिंग में
लगे मजदूर संभवतया जिगर,
गुर्दे तथा मस्तिष्क संबंधी
बीमारियों से ग्रस्त हो सकते
हैं.

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Web Title: ई-कचरे का डंपिंग क्षेत्र बन रहे एनसीआर : एसोचैम सर्वे
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