उत्तर प्रदेश: करोड़पति उम्मीदवारों की संपत्ति में 200 गुना इजाफा

By: | Last Updated: Monday, 31 March 2014 4:59 AM

लखनऊ: लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में इस प्रदेश से जहां 28 करोड़पति सांसद चुने गए तो साल 2009 में हुए चुनाव में यह संख्या बढ़कर करीब दोगुनी यानी 52 तक पहुंच गई.

 

चुनाव मैदान में उतरने वाले इन करोड़पतियों की संख्या को देखते हुए इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजनीतिक दलों को ऐसे उम्मीदवारों से परहेज भी नहीं है. इन उम्मीदवारों से पार्टी को दोहरा लाभ है. एक ओर जहां चुनावी रण के खर्च में ये प्रत्याशी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, वहीं ऐसे भी उम्मीदवार हैं जिनका अपने क्षेत्र में रसूख है और इसके बल पर उन्होंने जीत हासिल कर पार्टी के सांसदों की संख्या भी बढ़ाई है. ऐसे में सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या और बढ़ेगी इससे इनकार नहीं किया जा सकता.

 

पिछले दो लोकसभा चुनाव में केवल करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि पहले से चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा चुके सांसदों की अनुमानित चल-अचल संपत्ति में भी करीब दो सौ फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2009 में हुए चुनाव में प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों के लिए जो उम्मीदवार उतारे गए, उनमें बीएसपी के 50, बीजेपी के 45, कांग्रेस के 44, एसपी के 42 उम्मीदवार करोड़पतियों की श्रेणी में थे.

 

राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) ने कुल सात सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे जिसमें से पांच करोड़पति थे. निर्दलीय या छोटे दलों से चुनाव मैदान में उतरने वाले बाकी करीब एक हजार उम्मीदवारों में से महज 55 ही करोड़पतियों में शुमार थे. साफ है कि सभी बड़े राजनीतिक दलों में आधे से अधिक टिकट करोड़पतियों के हाथ में ही थे.

 

महज इतना ही नहीं, जब राजनीतिक दलों के सभी उम्मीदवारों की औसत संपत्ति की गणना की गई तो यह आंकड़ा भी करोड़ों में पहुंच गया. बसपा के 80 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति पांच करोड़ से ज्यादा, एसपी के 75 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति करीब ढाई करोड़, बीजेपी के 71 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति ढाई करोड़ से ज्यादा व कांग्रेस के 69 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति करीब साढ़े चार करोड़ रुपये मिली.

 

निर्दलीय और अन्य राजनीतिक दलों से लड़ने वाले एक हजार से ज्यादा उम्मीदवारों की औसत संपत्ति पचास लाख के आसपास ही रही. इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी के छह, बीसपी के 12, कांग्रेस के 16, आरएलडी के चार और एसपी के 14 करोड़पति उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

 

लोकसभा चुनाव में उतरे उम्मीदवारों के लिए धन बल के साथ ही जनबल होना भी जरूरी है. केवल धन के बल पर चुनाव मैदान में उतने वालों के लिए यह समर जीतना आसान नहीं और यह दांव पार्टी पर भी भारी पड़ता है.

 

साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में यूपी से करोड़पति उम्मीदवारों में से जब टॉप-20 को चिह्न्ति किया गया है. परिणाम यह है कि इन 20 सबसे ज्यादा रईस उम्मीदवारों में से केवल पांच के हिस्से ही जीत आई. चिह्न्ति 15 को करारी हार का सामना करना पड़ा.

 

इन 20 उम्मीदवारों में कांग्रेस के वी.एम. सिंह, राजकुमारी रत्ना सिंह, अन्नू टंडन, प्रवीन सिंह ऐरन, सलीम इकबाल शेरवानी, बीसपी के मलूक नागर, डा. अखिलेश दास, सुरेंद्र सिंह नागर, गंगा चरण, कुंवर देवेंद्र सिंह यादव, डी.पी. यादव, विनय शंकर तिवारी, बीजेपी के जवाहर लाल जायसवाल और मेनका गांधी शामिल थे.

 

समाजवादी पार्टी (एसपी) का कोई भी उम्मीदवार इस फेहरिस्त में शामिल नहीं था. इनमें से सिर्फ राजकुमारी रत्ना सिंह, सुरेंद्र सिंह नागर, अन्नू टंडन, प्रवीन सिंह ऐरन और मेनका गांधी ही संसद पहुंच सके.

 

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश के पांच सांसद ऐसे भी रहे, जो करोड़पति होने के बावजूद पैन कार्ड नहीं रखते. इनमें से चार सांसद कांग्रेस के हैं. इनमें महराजगंज से चुने गए कांग्रेस के हर्षवर्धन, डुमरियागंज से जगदम्बिका पाल, प्रतापगढ़ से राजकुमारी रत्ना सिंह और श्रावस्ती से विनय कुमार उर्फ विन्नू के अलावा भदोही से चुने गए बीसपी के गोरखनाथ शामिल हैं.

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Web Title: उत्तर प्रदेश: करोड़पति उम्मीदवारों की संपत्ति में 200 गुना इजाफा
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