एक अस्पताल जहां हुआ 10 हजार चूहों का सफाया

एक अस्पताल जहां हुआ 10 हजार चूहों का सफाया

By: | Updated: 17 May 2014 03:32 AM

रायपुरः छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा खैराती अस्पताल अब चूहा मुक्त हो गया है, ऐसा कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी, लेकिन चूहा मारने वाली कंपनी ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें अस्पताल को लगभग चूहा मुक्त बताया गया है. दावा किया गया है कि 10 हजार चूहे मारे जा चुके हैं. अब रखरखाव का काम जारी है. अस्पताल प्रबंधन भी कह रहा है कि चूहे दिखाई नहीं दे रहे हैं, वैसे चूहों की उछलकदमी बंद होने की बात मरीज भी सही मानते हैं. डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के सहायक अधीक्षक विनीत गोयल ने बताया कि कंपनी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, और हम कंपनी के काम से संतुष्ट हैं. मैं लगातार वार्ड और विभागों के संपर्क में हूं. स्टॉफ का कहना है कि चूहे दिखाई नहीं दे रहे.

 

गौरतलब है कि कुछ समय पहले तक सूबे का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल चूहों के आतंक से भयभीत था. क्योंकि चूहे हर साल लाखों का नुकसान कर रहे थे, दवाइयां, मशीनों, स्टेशनरी और कपड़ों को काट रहे थे. इस नुकसान से बचने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने चूहा मारने/पकड़ने संबंधी विज्ञापन जारी किया.

 

यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला और अनोखा विज्ञापन था. इसके बाद इंदौर की कंपनी लक्ष्मी फ्यूमिगेशन एंड पेस्ट कंट्रोल लिमिटेड को 13 लाख 95 हजार रुपये में वर्कआर्डर जारी किया गया. एक साल के इस अनुबंध के तहत अस्पताल को चूहा मुक्त करना था.

 

कंपनी ने दो अप्रैल से चूहामार अभियान शुरू किया. अब तक करीब 45 दिनों में 10 हजार चूहों को मारने की बात कही जा रही है, जिसमें छह हजार चूहों की गिनती भी की जा चुकी है. जबकि चार हजार चूहे बोरो फ्यूमिकेशन में मारे गए हैं. बिल ढूंढ़कर उन्हें बंद करने की प्रक्रिया को बोरो फ्यूमिगेशन कहा जाता है. अस्पताल के अंदर और बाहर पांच हजार बिल बंद किए गए.

 

लक्ष्मी फ्यूमिगेशन एंड पेस्ट कंट्रोल लिमिटेड के सुपरवाइजर योगेंद्र कुमार बताते हैं कि एक्टिव फेज पूरा हो चुका है. अब रखरखाव का काम चल रहा है. अब तक छह हजार मरे चूहों की गणना की गई है और करीब चार हजार चूहे बोरो फ्यूमिगेशन में मारे गए होंगे. अभी भी अस्पताल के हर कोने पर नजर रखी जा रही है.

 

वर्तमान में अस्पताल के हर कोने में रोडा बाक्स (एक बंद डिब्बा) रखा गया है, जिसमें चूहों के लिए रोजाना बदल-बदल कर भोजन रखा जाता है और हर दो दिन में इन बाक्स की तलाशी ली जाती है. कंपनी का कहना है कि कम ही डिब्बों में चूहे मिले हैं, यानी अब चूहे खत्म हो रहे हैं. लेकिन अभी भी माना जा रहा है कि हजार चूहे और होंगे.

 

चूहा मारने वाली संस्था ने एक्टिव फेज के खत्म होने के बाद हर वार्ड, हर विभाग में जाकर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया. प्रत्येक वार्ड में कर्मचारियों से पूछा गया कि चूहे दिखाई दे रहे हैं या नहीं, उनसे प्रतिक्रिया फॉर्म भी भराया गया. इसके साथ ही कंपनी ने अस्पताल प्रबंधन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. अब अस्पताल प्रबंधन मिलने वाली प्रतिक्रियाओं की पुष्टि कर रहा है, हालांकि अस्पताल प्रबंधन रिपोर्ट से संतुष्ट है.

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