एबीपी न्यूज के कार्यक्रम घोषणा पत्र में मधुसूदन मिस्त्री ने माना, कांग्रेस नहीं बन पाएगी सबसे बड़ी पार्टी

एबीपी न्यूज के कार्यक्रम घोषणा पत्र में मधुसूदन मिस्त्री ने माना, कांग्रेस नहीं बन पाएगी सबसे बड़ी पार्टी

By: | Updated: 11 Apr 2014 02:40 PM

नई दिल्ली. कांग्रेस नेता मुधसूदन मिस्त्री हमारे खास कार्यक्रम घोषणापत्र में तीखे सवालों के जवाब दिये. उन्होंने माना कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर नहीं उभरेगी.

 

सवाल . ये उठ रहा है कि क्या कांग्रेस मोदी से टक्कर लेने के लिए खुद सांप्रदायिकता का कार्ड खेल रही है. सवाल बीजेपी उठा रही है.

 

उत्तर. बड़ा अजीब लग रहा है मुझे. 2002 में गुजरात में बीजेपी की रोड शो निकाली थी. वीडियो में देखिए क्या क्या बोला गया था. शहजादा..सल्तनत शब्द प्रयोग होता है क्यों. बड़ा ही साफ है.

 

पश्चिम में हमारी स्थिति थोड़ी स्थित ठीक नहीं है. लेकिन पूर्वांचल में हमारी स्थिति अच्छी है. राजनीतिक कार्यकर्ता होने की वजह से बता रहा हूं कि यूपीए 3 बनेगी.

 

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अरविंद केजरीवाल कुछ नहीं रहेंगे. मीडिया में मैं नहीं आ रहा हूं इसका मतलब यह नहीं है कि मेरे पक्ष में माहौल नहीं है.

 

अमित शाह जब बीजेपी के प्रभारी बने तो चौथी नंबर की पार्टी नंबर वन बन गया और आप जब यूपी के प्रभारी तो नंबर वन कांग्रेस चौथे नंबर पर चली गई.

इस पर उन्होंने कहा कि क्या आप चाहते हैं कि मैं मुजफ्फरनगर कराऊं. दंगा कराओ और पावर में आओ. यह बीजेपी की रणनीति है.

 

सवाल. क्या कांग्रेस ने मोदी से हार मान ली है ? अब किसका दावा सबसे सटीक है ये तो 16 मई को ही पता चलेगा लेकिन तमाम सर्वे फिलहाल मोदी के पक्ष में ही हैं.

 

उत्तर. मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता. इसकी वजह है. माहौल खड़ा करना एक अलग विषय है. इलेक्शन के रिजल्ट और कैंडिडेट का चुना जाना केवल माहौल से नहीं होता. मुझे इस पार्टी ने सौभाग्य दिया था. 

 

सभी लोग केवल आडियोलॉजी की वजह से नहीं जुड़ते हैं. बडोदरा के पैनल में मेरा नाम नहीं था. मैं मोदी को खुली चैलेंज देता रहा. साबरकाठा में मोदी को आने के लिए मैं चुनौति देता रहा. वह नहीं आए तो मैंने खुद ही फैसला किया कि मैं आपको बड़ोदरा से लड़ूंगा. मोदी जी सलामत सीट ढूंढी.

 

2009 में भी बोले थे कि शून्य होगा. लेकिन 12 सीटें हमारी आईं. लोकसभा का चुनाव और विधानसभा चुनाव अलग होते हैं.

 

असेंबली का चुनाव अलग है. लोकसभा का अलग होता है. दोनों के बर्ताव में अंतर है. माहौल बनाने से वोट में तब्दिली नहीं होती है. इस बार भी राजनीतिक कार्यकर्ता की वजह से मैं बता दूं कि यूपीए 3 बनेगी. लेकिन उनसे पूछा गया कि क्या सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस होगी तो इस पर गोल गोल टाल गये. कांग्रेस नहीं बन पाएगी सबसे बड़ी पार्टी.

 

असेंबली चुनाव में आप सामने क्यों नहीं आए. इस पर उन्होंने कहा कि कोई यह पूछे कि आप एक्टिव पॉलिटिक्स में क्यों आए. मैं पहले आदिवासियों ..मजदूरों के लिए लड़ता रहा. ठीक इसी तरह अब मौका मिला.

 

इस बार भी मोदी ने अपने पत्नी की पैन कार्ड नंबर या जमीन जायदाद के बारे में नहीं बताया है. जब आपकी पत्नी औपचारिक रूप से अलग नहीं है.

 

मोदी के चुनाव की एफडेवीट रात दो बजे रखी गई. मेरे पास 2007 की भी एफडेवीट है. उन्होंने अपना वैवाहिक जीवन नहीं बताया था.  जब मैंने सवाल उठाया तो उन्होंने कहा कि उस वक्त मैंनडेटरी नहीं था. इस बार है. इसका मतलब है कि इस वहज से इस बार उन्होंने बताया. मुझे अपने बेटे, पत्नी और अपने जमीन जायदाद के बारे में बताना पड़ा है.

 

मैं बार बार कहना चाहता हूं कि मैं निजी जीवन के बारे में नहीं बात कर रहा हूं. लेकिन देश यह जानना चाहता है कि उनकी पत्नी के पास कितनी संपत्ति है. ये सारी जानकारी उनको देना चाहिए.

 

कौन हैं मधुसूदन मिस्त्री

कांग्रेस के रणनीतिकार, राहुल गांधी के करीबी, और मोदी के कट्टर विरोधी हैं.

 

उम्र 69 साल. अहमदाबाद के असारवा में जन्म. जियोग्राफी की पढ़ाई. कॉलेज लेक्चरर के तौर पर करियर की शुरुआत. शिक्षण का काम छोड़कर ट्रेड यूनियन से जुड़े.

 

सत्तर के दशक में स्कॉलरशिप पर ऑक्सफोर्ड पढ़ने गए. छह साल तक अंतर्राष्ट्रीय संस्था OXFAM से जुड़े रहे. भारत लौटने पर मधुसूदन मिस्त्री ने खुद का गैर सरकारी संगठन -  दिशा खोला.

 

दिशा के जरिए मिस्त्री महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के लिए काम कर रहे हैं.

 

शंकरसिंह बाघेला ने जब बीजेपी से अलग होकर पार्टी बनाई तो मधुसूदन मिस्त्री भी उसमें शामिल हुए. बाद में दोनों नेता कांग्रेस में आ गए.

 

मधुसूदन मिस्त्री ने पहली बार 2001 में साबरकांठा से  कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीता. 2004 के लोकसभा चुनाव में मिस्त्री फिर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे.

 

2011 से मधुसूदन मिस्त्री कांग्रेस के महासचिव हैं. केरल कर्नाटक, लक्षद्वीप में प्रभारी भी रहे. अभी य़ूपी में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी हैं मिस्त्री.

 

फिलहाल मधुसूदन मिस्त्री के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं. यूपी में कांग्रेस को विजय दिलाना और वडोदरा में नरेंद्र मोदी को मात देना.

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title:
Read all latest India News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story मुंबई: डॉक्टरों की निगरानी में हैं गोवा के सीएम पर्रिकर, हालत सामान्य