एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम घोषणापत्र में बोले कपिल सिब्बल, 'हमारा मुकाबला सिर्फ बीजेपी से है'

By: | Last Updated: Thursday, 20 February 2014 2:40 PM

नई दिल्ली. कांग्रेस के बड़े रणनीतिकार कपिल सिब्बल आज एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम घोषणा पत्र में सभी तीखे सवालों के जवाब दिये. घोषणा पत्र में सिब्बल ने कहा कि हमारी लड़ाई सिर्फ बीजेपी से है.

 

सवाल. क्या मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस ने केजरीवाल को खड़ा किया. क्या केजरीवाल कांग्रेस की बी टीम है. क्या चुनाव बाद केजरीवाल का समर्थन लेगी . कांग्रेस और उससे भी बड़ा सवाल ये कि कांग्रेस के केजरीवाल क्या लगते हैं?

 

जवाब. हमारा सुषमा जी से क्या संबंध हैं. हम सभी मिलते हैं. यदि हम आप को समर्थन नहीं देते तो केजरीवाल कैसे एक्सपोज होते. पानी का बिल महंगा हुआ. कहां गई नौकरी पक्का करने का वादा. हमने इसी लिए समर्थन दिया ताकि यह जनता के सामने एक्पोज हो सकें.

मोदी को जब कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई है तो फिर बवाल क्यों.

अभी मोदी निर्दोष कहां हैं. मोदी अभी ट्रायल कोर्ट में हैं. इसके बाद हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट.

 

मोदी पर निशाना साधते हुए सिब्बल ने कहा कि जिस प्रदेश का होम मिनिस्टर फेक इनकाउंटर में शामिल हो. जिस पर सुप्रीम कोर्ट का बयान हो कि गुजरात जल रहा है.

 

विधानसभा चुनाव में हार की क्या खास वजह रही. इस पर सिब्बल ने कहा कि हमने सपने नहीं बेचे.

राहुल गांधी के वंशवाद पर सिब्बल ने कहा क्या अकाली दल में बादल के सिवाय कोई नाम है. महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार के अलावे कोई है. तमिलानाडू में करूणानिधि और जयललिता के सिवाय कौन है.

 

करप्शन की वजह से चुनाव हारने पर सिब्बल ने कहा कि करप्शन केवल सरकार की बात नहीं है. लोग कहते हैं कि मेरे बच्चे का एडमिशन करा दो. भैया जब नंबर नहीं है तो कैसे एडमिशन होगा. तो ऐसे भ्रष्टाचार कानून से केवल खत्म नहीं होगी. जब डिमांग अधिक होगी सप्लाई कम तो भ्रष्टाचार कैसे कम होगा. ऐसे में भ्रष्टाचार बढेगा ही.

 

चुनावी फंड को आरटीआई के अंदर कांग्रेस क्यों नहीं लाती. यह बात सही है कि भ्रष्टाचार पॉलिटिकल पार्टियों में है. लेकिन इससे अफरातफरी मच जाएगी. राजनीतिक दल पब्लिक अथारिटी नहीं होते हैं.

 

राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई पर सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मैं खिलाफ हूं. हम काम करते हैं. हम ढिढोरा नहीं पीटते है.

 

यूपीए के सहयोगी एक-एक कर निकल गए हैं, नए साथी जुड़ नहीं रहे हैं और जो हैं वो कांग्रेस को आंखें दिखा रहे हैं या मोदी से मिल रहे हैं.  ओपिनियन पोल भी यही इशारा कर रहा है.  2004  में गठबंधन की सरकार बनाने के लिए यूपीए के नेतृत्व में इकट्ठा हुए सहयोगी दल डूबते जहाज की तरह यूपीए से छलांग मारने लगे. यूपीए से पहले तृणमूल कांग्रेस अलग हुई, उसके बाद डीएमके और फिर झारखंड विकास मोर्चा. चुनाव नजदीक आते-आते कांग्रेस के दो सहयोगी दल नेशनल कांफ्रेंस और एनसीपी भी अलग सुर में बोलने लगे. दोनों ही दलों ने बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को लेकर अपना रुख नरम कर लिया है.


यूपीए की वापसी की कोई उम्मीद बची है?

जवाब. थोड़ा सब्र करें. 2004 में भी ऐसे ही टीवी चैनल के लोग तमाम आंकड़े देते थे. लेकिन हुआ कुछ और. अभी आपका आंकड़ा कुछ दिखाया जा रहा है. कुछ दिनों के बाद आंकड़े आप कुछ औऱ दिखाएंगे. आम जनता सब देख रही है. हमारी सरकार वापस आएगी.

 

देखिए चुनाव के नतीजे कोई नहीं जानता. जनता का रूख कोई नहीं जानता. कभी भी बदल सकता है. हमारी चुनौती बीजेपी के साथ ही है. हमारा मुकाबला बीजेपी से है. हां, दिल्ली में आम आदमी की पहुंच है बस.

 

कौन हैं कपिल सिब्बल,11 मई 1993

 

देश के इतिहास में पहली बार संसद में किसी पर मुकदमा चला था. भारत के संविधान में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और न्यायमूर्तियों पर लोकसभा में ही महाभियोग का मुकदमा चल सकता है. चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वी रामास्वामी की यात्राओं, टेलिफोन बिलों और दूसरे खर्चों को लेकर मुकदमा चला था और न्यायमूर्ति के वकील थे कपिल सिब्बल. उस समय 46 साल के कपिल सिब्बल ने पांच घंटे एक के बाद एक तर्क रखते हुए पूरी संसद को खामोश कर दिया था. रामास्वामी महाभियोग से मुक्त हो गए थे. कपिल सिब्बल की गिनती देश के बड़े वकीलों में की जाती है.

 

राजनेता और पेशे से वकील कपिल सिब्‍बल इस समय केंद्र सरकार में कानून और न्‍याय मंत्री तथा संचार एवं आईटी मंत्री हैं. कपिल सिब्‍बल का जन्‍म 9 अगस्‍त 1948 को पंजाब के जालंधर में हुआ था. चंडीगढ़ से शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद कपिल सिब्बल दिल्ली चले आए जहां सेंट स्‍टीफन कॉलेज से पढ़ाई की और फिर अमेरिका के हावर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली. यूनिवर्सिटी ने उनकी सिफारिश अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में वकालत के लिए की थी मगर वो भारत लौट आए और काफी बड़े वकील के रूप में नाम कमाया.

 

1989 में कपिल सिब्‍बल भारत के एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल नियुक्‍त हुए.कपिल सिब्बल तीन बार सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्‍यक्ष भी रह चुके हैं. राजनीति में कपिल सिब्बल पहली बार 1998 में राज्यसभा के जरिए लाए गए थे.

 

2004 के आम चुनाव में कपिल सिब्‍बल दिल्‍ली के चांदनी चौक से बीजेपी की स्मृति ईरानी को हरा कर पहली बार लोकसभा में चुनकर आए. सिब्बल मनमोहन सिंह सरकार में विज्ञान, तकनीकी और विज्ञान मंत्री बने.

 

2009 में वे एक बार फिर चांदनी चौक से चुनाव जीतकर मानव संसाधन विकास मंत्री बने. इसी दौरान उन्‍होंने सभी प्राथमिक स्‍कूलों के सभी विद्यार्थियों को 2300 और 2900 रुपए में टेबलेट देने की घोषणा की.

 

कांग्रेस के ताकतवर नेता के रूप में गिनती किये जाने वाले कपिल सिब्‍बल 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले, वोडाफोन टैक्‍स स्‍कैंडल, इंटरनेट सेंसरशिप तथा स्‍वामी अग्निवेश के ऊपर बयान को लेकर हमेशा ही विवादों में रहे और बाद में अन्‍ना हजारे तथा बाबा रामदेव के आंदोलन के समय भी काफी चर्चा में रहे.

 

कपिल सिब्बल को कविता लिखने का बेहद शौक है. उनकी कविताओं का संग्रह भी बाजार में आ चुका है. दुनिया के शायद ये अकेले कवि हैं जो अपनी कविताएं ब्लैकबेरी पर लिखते हैं. उनकी एक कविता की लाइन है- मुझे प्रेम का एसएमएस मत भेजना, क्योंकि मैं जल्दी मिटना नहीं चाहता, तुम तो मुझे इरेज कर दोगे.

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