एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम में आजम खान ने कहा - न मेरा है न तेरा है ये हिन्दोस्तान सबका है, नहीं समझी गई ये बात तो नुकसान सबका है

By: | Last Updated: Saturday, 19 April 2014 10:38 AM

नई दिल्ली. एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम घोषणापत्र में आज सपा के आजम खान तीखे सवालों के जवाब दिये. मोहम्मद आजम खान समाजवादी पार्टी का मुस्लिम चेहरा और उत्तर प्रदेश की सरकार में नंबर दो की हैसियत.

 

हम सभी लोग एक मजहबी मुल्क में रहते हैं. जो लोग अपने मजहब के अलावे दूसरे लोगों के इबादतगाह को तोड़ रहे हैं. उनसे हमारी लड़ाई है. हिन्दुस्तान का सच छुपाने वाले देश का इतिहास छुपाते हैं. हमारा दामन एकदम साफ है. दुनिया के किसी भी मुल्क में लखनऊ बैंक के अलावे मेरा कहीं भी पैसा नहीं हैं. मैंने क्या बुरा कह दिया. करगिल में शहीद लोगों के बारे में बता दिया. मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं. हमारी कुर्बानियों को तसलीम किया जाए. हम देश के लिए लहू देना चाहते हैं.

 

देखें वीडियो:  घोषणापत्र में सपा नेता आज़म खान

 

सवाल . अखिलेश सरकार में अडंगा क्यों लगाते हैं आजम खान?

उत्तर.  नेताजी ने हम मुसलामानों और गरीबों का बहुत ख्याल रखा है. हमारे रिश्ते बेहद मजबूत हैं.

 

एबीपी न्यूज के घोषणापत्र में अखिलेश ने कहा था कि हम साढे पांच मुख्यमंत्री की सरकार चला रहे हैं इस पर आजम खान ने मीडिया को जिम्मेदार ठहराते हुए गोल गोल जवाब दे गये.

 

जहां तक कुत्ते के बच्चों का सवाल है तो क्या हम कुत्ते के बच्चे हैं. जब टोपी पर हाथ मारा. मोदी जी को एहसास हो गया कि फासीज्म का कार्ड नहीं चलेगा. भारतीय जनता पार्टी ने भाई भाई को बांटने का कार्ड खेला था.

 

वो इतने बड़े गुनाह के बावजूद आजाद कर दिये गये. मैं पूरे जीवन में कभी गुनाह नहीं किया है. शिक्षा के क्षेत्र में भी काम कर रहा हूं. इसके बावजूद आप देख रहे हैं.

 

न मेरा है न तेरा है ये हिन्दोस्तान सबका है

नहीं समझी गई ये बात तो नुकसान सबका है.

 

सवाल. दंगे खत्म हुए तो राहत शिविरों के हाल पर समाजवादी सरकार की किरकिरी हुई. और तब से शुरू हुई राजनीति ने यूपी में चुनाव को हिंदू-मुस्लिम बना दिया है.

 

उत्तर. मेरे कहने का मतलब है कि मजहब के नाम पर इंतकाम मैंने बैलेट से देने को कहा है. मैंने कहा था कि चुनाव में साइकिल का बटन दबाएं.

 

दंगों पर आजम खान ने कहा कि मुसलमान भरोसा करेंगे या नहीं यह चुनाव परिणाम बताएगा. यही हमारी बेगुनाही का सबूत है कि जब हमारी हुकूमत चलती है. तब फासीवादी ताकतें दंगा करते हैं. क्योंकि उनको पता है कि मजदूर, किसान और नौजवानों को उन पर भरोसा है.

 

मुजफ्फरगर में हमने बचाया है. हमने इस गलती को माना है. नेताजी ने भरी सभा में माना है कि अफसरों की गलती से सब हुआ है. मुसलमान जानते हैं कि मुजफ्फरनगर के पांच गांवों की सजा यदि नेताजी को मिली तो पूरा समाज फासीवादी ताकतों के चंगुल में होगा. यह मुसलमान जानते हैं.

 

अखिलेश यादव और नरेंद्र मोदी में दंगों को लेकर अंतर पर आजम खान ने कहा है कि अखिलेश स्टेट स्पॉन्सर दंगों के आरोपी नहीं हैं.

 

सिर्फ मेरे यह कहने पर कि मैं कितना बेगुनाह हूं. वो कितने गुनहगार हैं ये तो सभी जानते हैं. जब इनसे पूछा गया कि आप कश्मीर पर क्या रूख रखते हैं. इस पर आजम ने कहा कि हमारा अपमान है यह सवाल. देश का हर मुसलमान कहता है कि कश्मीर हमारा है. यह सवाल सिर्फ हमसे ही क्यों पूछा जाता है.

 

सवाल. कहते हैं दिल्ली की कुर्सी पर कब्जा करना है तो यूपी का रण जीतना होगा. लेकिन ऐसे हालात में सवाल उठ रहे हैं कि मुलायम सिंह दिल्ली की कुर्सी तक कैसे पहुंच पाएंगे?

 

उत्तर. नेताजी की हैसियत देश ने नहीं पहचानी तो देश का दुर्भाग्य है. यूपी में रोजगार देने वालों में नेताजी का हाथ है.

 

नेताजी को पहचानने में जितनी देर हो रही है. इससे देश का नुकसान हो रहा है.

 

आजम खान ने अपने विवादित बयान पर कहा कि अगर मैं गलत होऊं तो मेरी सजा सही हो सकती है. यह कर्नल ने बताया है. मैंने सीडी दिखाया है. हमारा शिकवा सिर्फ इतना है कि हमारा लहू वतन के लिए बहा है तो इसकी चर्चा की जाए. इसकी इज्जत हो. आखिर मुस्लिम लब्ज से एतराज क्यों है.

 

मैं कोई अपराधी नहीं हूं. करगिल बयान पर माफी नहीं मांगूंगा.

 

क्या आजादी के बाद बापू ने वादा नहीं किया था कि एक ही आसमान के नीचे सभी एक होंगे. हिन्दू मुसलमान और जाति धर्म के नाम पर अंतर नहीं होगा.

 

बड़ी आसानी से हमें आएसआई एजेंट कहा जाता है. हमारी नस्लें हमसे पूछ रही हैं कि क्या हम गद्दार हैं. आज उन नौजवानों को समझाना है कि हम गद्दार नहीं हैं. हमारे पहले राजनैतिक गुरू चौधरी चरण सिंह थे उसके बाद मुलायम सिंह है. हमारे सियासी रहनुमा ने हमें निकाल भी दिया था उसके बाद भी हम किसी और के दरवाजे पर नहीं गये.

 

66 साल के आजम खान सातवीं बार रामपुर से विधायक चुने गए हैं. और फिलहाल यूपी सरकार में शहरी विकास, अल्पसंख्यक कल्याण और संसदयी कार्य मंत्री के ओहदे पर हैं. यूपी में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बाद अकेले नरेंद्र मोदी से लोहा लेते दिखते हैं आजम खान.

 

पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त कल्याण सिंह, अमर सिंह और जयाप्रदा को लेकर आजम खान ने मुलायम सिंह के खिलाफ बगावत कर दी थी. जया प्रदा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया लेकिन रामपुर से जयाप्रदा को जीतने से रोक नहीं पाए.

 

चुनाव खत्म हुआ और मुलायम जरूरत के लिहाज से आजम को वापस ले आए. मायावती के राज में विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके आजम खान 1985 में मुलायम के संपर्क में आए और जब 1992 में समाजवादी पार्टी बनी तो संस्थापक सदस्यों में से एक थे आजम खान. आठ बार विधायक रहे आजम. 1989,1993 और 2003 की मुलायम सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे.

 

मुस्लिम सियासत में आजम खान की पैठ की शुरुआत 1980 में हुई जब मुरादाबाद में दंगे हुए थे. विपक्ष के विधायक रहते हुए आजम दंगा पीड़ितों को राहत का सामान पहुंचाने मुरादाबाद रवाना हुए तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद आजम पहली बार सुर्खियों में आए.

 

1985 के शाहबानो प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करने के लिए भी आजम सामने आए. बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के गठन के फैसले में भी आजम शामिल थे.

 

आजम ने ही कल्याण को समाजवादी पार्टी में शामिल करने का सबसे ज्यादा विरोध किया था और वो सफल भी हुए थे. भले ही यूपीए को मुलायम का समर्थन हासिल रहा हो लेकिन आजम गांधी परिवार के खिलाफ हमेशा बरसते रहे हैं.

 

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