एसआईटी ने दी नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट

एसआईटी ने दी नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट

By: | Updated: 10 Apr 2012 04:06 AM


अहमदाबाद:
साल 2002 के गुजरात दंगों पर
एसआईटी की रिपोर्ट को
अहमदाबाद की मेट्रोपोलिटन
कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट
बताया है. इस रिपोर्ट में कहा
गया है कि दंगों मामले में
गुजरात के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी समेत 62
आरोपियों के खिलाफ सबूत नहीं
पाए गए हैं.





ये रिपोर्ट अहमदाबाद की
कोर्ट में पेश कर दी गई है और
कोर्ट ने भी कहा है कि ये
क्लोजर रिपोर्ट है. कोर्ट ने
एसआईटी को आदेश दिया है कि वो
तीस दिन के भीतर याचिकाकर्चा
जकिया जाफरी को ये रिपोर्ट
मुहैया कराए.




अंतिम
फैसले से पहले कोर्ट जकिया
जाफरी का पक्ष सुनेगा. अब इस
मामले की अगली सुनवाई 10 मई को
होगी.






साल 2002 में गुजरात में दंगे
भड़के थे. याचिकाकर्ता जकिया
जाफरी के पति और पूर्व सांसद
अहसान जाफरी की हत्या भी
दंगों के दौरान हुई थी. जकिया
ने मोदी समेत 62 लोगों के खिलाफ
दंगों के आरोप लगाए थे.
एसआईटी की रिपोर्ट के बाद
अहसान जाफरी के बेटे तनवीर ने
कहा है कि अभी कोर्ट का फैसला
आना बाकी है.




हालांकि अभी सिर्फ एसआईटी ने
ही क्लोजर रिपोर्ट में मोदी
समेत 62 लोगों को क्लीन चिट दी
है. लेकिन ये रिपोर्ट मंजूर
की जाए या नहीं इसका फैसला
अहमदाबाद की कोर्ट को करना
है.




बीजेपी खुश




एसआईटी
के जरिए मोदी को क्लीन चिट
मिलने के बाद बीजेपी के
नेताओं ने अपनी खुशी का
इज़हार किया है. लोकसभा में
विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज,
बीजेपी के महासचिव रवि शंकर
प्रसाद और प्रवक्ता तरूण
विजय ने अपनी-अपनी
प्रतिक्रियाएं दीं.




सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया,
"सुप्रीम कोर्ट के द्वारा
गठित एसआईटी ने मोदी के खिलाफ
सबूत नहीं पाया है. हम लोगों
के लिए बहुत बड़ी राहत है. 10
सालों से जारी दुष्प्रचार को
अब बंद होना चाहिए."




वहीं तरूण
विजय ने इस सच की जीत करार
दिया
. रवि शंकर ने भी कहा कि
मोदी के खिलाफ जारी
दुष्प्रचार खत्म होना चाहिए.




दूसरी ओर कांग्रेस
ने कहा कि मोदी के बारे में
अटल बिहारी वाजपेयी ने क्या
कहा था कि वह किसी से ठका-छिपा
हुआ नहीं है
.




गुजरात दंगों में मारे गए
लोगों की लड़ाई लड़ रही
तीस्ता सितलवाड़ ने कहा कि यह
उनके लिए बड़ा झटका है, लेकिन
इंसाफ की लड़ाई जारी रहेगी.




मोदी पर आरोप 





एसआईटी की इस क्लोज़र
रिपोर्ट से नरेंद्र मोदी को
बड़ी राहत मिली है, मोदी पर
आरोप लगते रहे हैं कि 27 फरवरी
को साबरमती ट्रेन में हुई
आगज़नी के बाद उन्होंने
दंगाइयों को खुली छूट दे दी
थी.




साबरमती ट्रेन में 59
कारसवकों को जिंदा जला दिया
गया था, जिसके बाद गुजरात में
भड़के दंगों में एक हज़ार से
अधिक लोग मारे गए थे जिनमें
अधिकतर मुसलमान थे.




दूसरी ओर अदालत ने इस मामले
में जकिया जाफरी को 30 दिनों के
भीतर एसआईटी रिपोर्ट की कॉपी
देने का आदेश दिया है. अदालत
के आदेश के बाद साफ हो गया है
कि 10 मई से पहले-पहले जाकिया
को एसआईटी रिपोर्ट की कॉपी
मिल जाएगी.




जकिया जाफरी और सामाजिक
कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड
ने एसआईटी की जांच पर सवाल
उठाए हैं और इसलिए जांच
रिपोर्ट की कॉपी मांगी थी.




सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर
एसआईटी ने गुजरात दंगों के नौ
मामलों की जांच की थी, जिनमें
गुलबर्ग सोसयटी केस अहम है.




जकिया जाफरी कांग्रेस के
पूर्व सांसद एहसान जाफरी की
विधवा हैं, जिनकी दंगाइयों ने
28 फरवरी 2002 को गुलबर्ग सोसइटी
में हत्या कर दी थी. गुलबर्ग
सोसयटी में हुए दंगों में 69
लोग मारे गए थे.




क्‍या है एहसान जाफरी मामला




जकिया
जाफरी ने नरेंद्र मोदी के
खिलाफ मोर्चा खोला था. उनके
पति कांग्रेस के पूर्व सांसद
एहसान जाफरी थे. 2002 के दंगों के
दौरान गुलबर्ग सोसाइटी में
उनकी हत्या कर दी गई थी. तब से
लेकर आज तक उनकी विधवा मोदी
के खिलाफ हर मोर्चे पर आवाज
बुलंद कर रही हैं.

अहमदाबाद
की गुलबर्ग सोसाइटी में
जाकिया जाफरी का भरा पूरा
आशियाना था. लेकिन 28 फरवरी 2002
की मनहूस दोपहरी में सब लुट
गया. कुछ दंगाइयों ने सब कुछ
आग के हवाले कर दिया.




गुजरात दंगे में एहसान जाफरी
के साथ-साथ कुल 69 लोग मारे गए
थे. मोदी पर आरोप लगे कि
उन्होंने एहसान जाफरी की मदद
की गुहार ठुकरा दी थी.

तब
से लेकर आज तक एहसान जाफरी की
विधवा जाकिया जाफरी मोदी के
खिलाफ लड़ाई लड़ रही है. इस
लड़ाई में कई मानवाधिकार
संगठनों ने उनका साथ दिया.

जाकिया
को 24 अप्रैल 2009 को सबसे
महत्वपूर्ण कामयाबी मिली थी.
इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने
उनकी याचिका पर सुनवाई करते
हुए एसआईटी को पूरे मामले की
जांच के आदेश दिए थे.

गुलबर्ग
सोसाइटी के दंगे को लेकर तमाम
तरह के सियासी
आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहे
हैं, लेकिन जाकिया जाफरी को
अब तक इंसाफ नहीं मिला है.
उनके पति के कातिल आज तक
कानून के शिकंजे में नहीं आए
हैं. हालांकि उन्‍हें भरोसा
है कि एक न एक दिन उन्‍हें
इंसाफ जरूर मिलेगा.



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