ऐसे की ओपीनियन पोल की सैंपलिंग, और इस तरह से किया गया सर्वे

By: | Last Updated: Wednesday, 20 November 2013 8:35 AM
ऐसे की ओपीनियन पोल की सैंपलिंग, और इस तरह से किया गया सर्वे

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<b><b></b>नई दिल्ली: </b> आइए हम
बताते हैं कि ABP NEWS और नील्सन
कंपनी ने मध्य प्रदेश
विधानसभा चुनाव-2013 में
मतदाताओँ का रुझान जानने के
लिए सर्वे की सैंपलिंग कैसे
की और क्या तरीका अपनाया.
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इस सर्वे में हमने 18 साल और
उम्र में इससे बड़े उन सभी
वोटर्स का रुझान जानने की
कोशिश की है, जिनके नाम मध्य
प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन
क्षेत्रों की वोटर लिस्ट में
दर्ज हैं.
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 मध्य प्रदेश देश के प्रमुख
राज्यों में शामिल है. संसद
में इस राज्य की भागीदारी 40
सीटों की है. लोकसभा में 29
सदस्य और राज्यसभा में 11
सदस्य इस राज्य के लोगों का
प्रतिनिधित्व करते हैं.
स्थानीय विधानसभा की बात
करें तो विधानसभा में 230 सीटें
है. ABP NEWS और नील्सन ने 2013 के
विधानसभा चुनावों में
मतदाताओं का रुख जानने के लिए
230 विधानसभा सीटों में से आधी
यानि 115 महत्वपूर्ण सीटों पर
मतदाताओं के बीच जाकर उनकी
राय जानी.
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इस चुनाव पूर्व सर्वे में
हमारे सामने मध्यप्रदेश के
20700 मतदाताओं से बातकर उनकी
राय जानने का लक्ष्य था,
लेकिन 28 अक्टूबर 2013 से 14 नवंबर
2013 के बीच हुए इस सर्वे के
दौरान हमने लक्ष्य से ज्यादा
यानि 21352 मतदाताओं से बातकर
प्रदेश के मतदाताओं का रूख
समझने और चुनाव के बाद बनने
वाली बड़ी तस्वीर को आपके
सामने लाने की कोशिश की है.<br />
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<b>कैसे किया सर्वे</b><br />
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सबसे पहले हमने मध्य प्रदेश
के प्रत्येक संसदीय चुनाव
क्षेत्र में से 4-5 विधानसभा
निर्वाचन क्षेत्रों का
सैंपलिंग के लिए चयन किया. इस
चयन के दौरान हमने मध्य
प्रदेश के भौगोलिक विस्तार
को भी ध्यान में रखा. हरेक
निर्वाचन क्षेत्र में योग्य
मतदाताओं से बात करने के लिए
हमने रैंडम सैंपलिंग विधि
अपनाई.<br />
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सर्वे के दौरान हमने
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
की प्रकति का ध्यान कुछ इस
तरह से रखा -<br />
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<b>शहरी विधानसभा निर्वाचन
क्षेत्र<br /></b>
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– विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
के किसी कस्बे का हिस्सा होने
या खुद कोई कस्बा होने की
सूरत में हमने उसे शहरी
क्षेत्र के अंतरगत लिया और उस
निर्वाचन क्षेत्र के किसी
गांव को हमने शामिल नहीं किया<br />
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– ऐसे विधानसभा निर्वाचन
क्षेत्रों में जहां दो या दो
से ज्यादा कस्बे थे, ऐसे में
शहरी क्षेत्र के तहत हरेक
विधआनसभा निर्वाचन क्षेत्र
के लिए हमने सर्वे को एक बड़े
और एक छोटे कस्बे तक सीमित
रखा<br />
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– ग्रामीण क्षेत्रों में
कवरेज के लिए सर्वे में हमने
प्रत्येक विधानसभा निर्वाचन
क्षेत्र में चार ग्रामीण
इलाकों को शामिल किया. इनमें
भी हमने एक ग्रामीण इलाका ऐसा
शामिल किया जहां सड़क नहीं
है.<br />
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<b>अर्ध ग्रामीण विधानसभा
क्षेत्र</b><br />
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– ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में
जिनके आसपास केवल एक कस्बा
है, सर्वे में उस कस्बे को
शहरी विधानसभा निर्वाचन
क्षेत्र के तहत लिया गया.<br />
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– ग्रामीण सीटों की कवरेज के
लिए सर्वे में हमने हरेक
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
में 6 ग्रामीण इलाकों को
शामिल किया. इसमें भी दो
ग्रामीण इलाके ऐसे रखे गए
जिनकी जनसंख्या 2000 से कम थी<br />
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<b>ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र</b>
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– ऐसे विधानसभा निर्वाचन
क्षेत्रों में जिनके आस-पास
कोई कस्बा नहीं था, वहां केवल
ग्रामीण इलाकों को ही शामिल
किया गया. हरेक विधानसभा
निर्वाचन क्षेत्र के 8 से 10
ग्रामीण इलाकों में सर्वे
किया गया. इसमें भी दो
ग्रामीण इलाके ऐसे रखे गए
जिनकी जनसंख्या 2000 से कम थी<br />
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<b>सर्वे में बातचीत का तरीका</b><br />
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<p style=”text-align: justify;”>
– सर्वे के तहत हमने हरेक
मतदाता से घर-घर जाकर मतदाता
से आमने-सामने बैठकर बात की.<br />
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– मतदाताओं से बातचीत हमने
पहले से तैयार प्रश्नावली पर
ही आधारित रखी<br />
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<b>टारगेट ग्रुप</b><br />
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– सर्वे में हमने ऐसे पुरुष और
महिला मतदाताओं को टारगेट
किया जो उस निर्वाचन क्षेत्र
की मतदाता सूची में बतौर
मतदाता रजिस्टर्ड थे<br />
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<b>फील्ड वर्क</b><br />
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– सर्वे के लिए फील्ड में
भेजने से पहले हरेक टीम को
सैंपलिंग योजना, बातचीत के
लिए मतदाताओं के चयन, पूछे
जाने वाले सवालों, स्थानीय
मुद्दों, आदि के बारे में
अच्छे से ब्रीफ किया गया<br />
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– मौके पर सर्वे की गुणवत्ता
जांचने और ये सुनिश्चित करने
के लिए कि सर्वे का काम ठीक
तरह से हो फील्ड मैनेजर्स और
एक्जीक्यूटिव्स ने सर्वे
वाले इलाकों का खुद दौरा
किया. स्टेटस की जानकारी देने
के लिए सुपरवाइजर्स लगातार
फील्ड मैनेजर्स के संपर्क
में थे, जाकि जरूरत पड़ने पर
स्पष्टीकरण लिया जा सके<br />
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<b>रिपोर्टिंग में इस्तेमाल
रेटिंग स्केल्स</b><br />
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परफॉरमेंस की रेटिंग 5
प्वाइंट्स वाले स्केल पर की
गई, जहां 1 का अर्थ बहु्त खराब
और 5 का अर्थ बहुत अच्छा था.<br />
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हमने अपनी रिपोर्ट में इन
रोटिंग्स के लिए मध्य स्कोर
रखे थे. 2-3 के स्कोर का अर्थ औसत
से नीचे और 3 का अर्थ औसत
रेटिंग था. 4 के स्कोर को अच्छा
समझा गया और 4.5 से ऊपर वाले
स्कोर को बहुत अच्छा माना
गया.<br />
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<b>गलती की गुंजाइश</b><br />
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वास्तविक मतदान के लिए द
कांफिडेंस इंटरवल (गलती की
गुंजाइश) महज प्लस-माइनस 5
प्रतिशत तक है.<br />
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