कद बढ़ने के बाद नरेंद्र मोदी मनमानी पर उतारू?

By: | Last Updated: Monday, 1 April 2013 9:16 PM

अहमदाबाद:
गुजरात की नरेंद्र मोदी
सरकार ने राज्य विधानसभा में
एक ऐसा विधेयक पेश कर दिया है,
जिसके तहत लोकायुक्त की
नियुक्ति में राज्यपाल की
कोई भूमिका नहीं रह जाएगी.

गुजरात
सरकार लोकायुक्त आयोग
विधेयक 2013 को आज सदन में पास
कराने की कोशिश करेगी. गुजरात
विधानसभा के बजट सत्र का आज
आखिरी दिन है. विपक्ष ने कहा
है कि वो किसी भी हालत में इस
विधेयक को पास नहीं होने
देंगे.

क्या तीसरी बार
गुजरात की गद्दी संभालने और
बीजेपी में ताकत बढने के बाद
नरेंद्र मोदी अपनी बादशाहत
में आड़े आ रहे सभी कांटे दूर
करने की तैयारी में जुट गए
हैं? क्या लोकायुक्त की
नियुक्त पर सुप्रीम कोर्ट से
पटखनी खा चुके मोदी अब
राज्यपाल से हिसाब बराबर
करना चाहते हैं?

गुजरात
की नरेंद्र मोदी सरकार
गुजरात विधानसभा से ऐसा
विधेयक पास कराने की कोशिश
में हैं, जो अगर पास हो गया तो
लोकायुक्त की नियुक्ति में
राज्यपाल की भूमिका खत्म हो
जाएगी. लेकिन कांग्रेस और
गुजरात परिवर्तन पार्टी ने
साफ कह दिया है कि वो मोदी की
मनमानी नहीं चलने देंगे.

लोकायुक्त
पर मोदी सरकार के नए विधेयक
के बारे में कहा जा रहा है कि
इसके पास होने पर लोकायुक्त
की नियुक्ति प्रक्रिया में
आमूलचूल बदलाव हो जाएगा.

नए
विधेयक में राज्यपाल की
विवेकाधीन शक्तियों को खत्म
कर दिया गया है. नए विधेयक के
मुताबिक लोकायुक्त की
नियुक्ति एक खास चयन समिति की
सिफारिशों के आधार पर होगी.
इस समिति में राज्य के
मुख्यमंत्री  अध्यक्ष की
भूमिका में होंगे. वहीं
विधानसभा अध्यक्ष, विपक्ष के
नेता या फिर अध्यक्ष की ओर से
नामित कोई विपक्षी विधायक, एक
हाईकोर्ट जज और विजिलेंस
कमिश्नर सदस्य होंगे.

अगर
ये बिल पास हो गया तो लोकपाल
की नियुक्ति में राज्यपाल की
भूमिका नहीं रह जाएगी. अब तक
लोकायुक्त के चयन में
राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नेता
विपक्ष और हाईकोर्ट के मुख्य
न्यायधीश की भूमिका होती थी.

नए
विधेयक को लेकर मोदी सरकार पर
सवाल उठ रहे हैं. गुजरात में 2003
से लेकर 2011 तक लोकायुक्त का पद
खाली रहा. आठ साल बाद
राज्यपाल कमला बेनीवाल ने
रिटायर्ड जस्टिस आर ए मेहता
को गुजरात का लोकायुक्त
बनाया था.

मोदी इस पर
राज्यपाल के खिलाफ जमकर
गुस्सा दिखाते रहे. हाईकोर्ट
से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक
राज्यपाल के फैसले को चुनौती
दी. हर जगह कहा कि लोकायुक्त
की नियुक्ति में उनकी राय
नहीं ली गई.

जनवरी 2013 में
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आर ए
मेहता की नियुक्ति और
राज्यपाल के फैसले को सही
ठहराया था. हालांकि सियासी
विवाद के चलते जस्टिस मेहता
ने अभी तक गुजरात के
लोकायुक्त का कामकाज नहीं
संभाला है.

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