कमजोर प्रधानमंत्री नहीं रहा, इतिहास मेरे प्रति ज्यादा उदार रहेगा : मनमोहन

By: | Last Updated: Friday, 3 January 2014 9:51 AM

नई दिल्ली: इन आलोचनाओं को सख्ती से खारिज करते हुए कि उनका नेतृत्व ‘कमजोर’ था, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि समकालीन मीडिया या संसद में विपक्ष की अपेक्षा इतिहास उनके प्रति ज्यादा उदार रहेगा . उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ किया है .

 

सिंह ने कहा, ‘‘मैं नहीं मानता कि मैं एक कमजोर प्रधानमंत्री रहा हूं .. मैं ईमानदारी से यह मानता हूं कि समकालीन मीडिया या उस मामले में संसद में विपक्ष की अपेक्षा इतिहास मेरे प्रति उदार रहेगा .. राजनीतिक बाध्यताओंे को देखते हुए मैंने बेहतरीन किया है जो मैं कर सकता था .’’ प्रधानमंत्री के रूप में अपने दो कार्यकाल में तीसरे संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘..मैंने किया है और साथ ही साथ परिस्थितियों के अनुसार मैं जो कर सकता था ..यह इतिहास तय करेगा कि मैंने क्या किया और मैंने क्या नहीं किया .’’ प्रधानमंत्री उन अवधारणाओं के बारे में ढेर सारे सवालों का जवाब दे रहे थे कि उनका नेतृत्व कमजोर था और कई मौकों पर वह निर्णायक नहीं रहे .

 

सिंह ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेद्र मोदी पर भी निशाना साधा और मोदी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान 2002 में हुए गुजरात दंगों का उल्लेख किया . उन्होंने कहा कि यदि आप अहमदाबाद की सड़कों पर निर्दोष नागरिकों के नरसंहार से प्रधानमंत्री की क्षमता को आंकते हैं तो ‘‘मैं इसे नहीं मानता … मैं नहीं समझता कि इस देश को कम से कम अपने प्रधानमंत्री में इस तरह की क्षमता की जरूरत है .

 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे पूरा भरोसा है कि अगला प्रधानमंत्री संप्रग से होगा … नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री होना देश के लिए ‘‘विनाशकारी’’ होगा ..मैं ईमानदारी से मानता हूं कि नरेन्द्र मोदी जो कह रहे हैं, वह होने वाला नहीं है .’’ उनसे सवाल किया गया था कि क्या वह मानते हैं कि भारी समर्थन की लहर के चलते मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे .

 

उन्होंने कहा कि संप्रग एक और संप्रग दो प्रधानमंत्री के रूप में उनके दो कार्यकाल ने गठबंधन सरकार चलाने की कांग्रेस की क्षमता को दिखाया है और इस धारणा को खारिज किया कि यह पार्टी गइबंधन सरकार नहीं चला सकती . सिंह ने कहा कि यद्यपि प्रक्रिया के दौरान कुछ समझौते किये गये, ये हलके फुलके मुद्दे थे और राष्ट्रीय समस्या से जुड़े नहीं थे .

 

उनके नेतृत्व को लेकर कांग्रेस के अंदर नकारात्मक धारणा के बारे में जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की किन्हीं कमियों के कारण किसी ने भी उनसे पद छोड़ने के लिए नहीं कहा .

 

उन्होंने कहा, ‘‘ये मैं था जिसने इस बात पर जोर दिया कि स्पेक्ट्रम आवंटन को पारदर्शी और न्यायोचित होना चाहिए . ये मैं था जिसने जोर देकर कहा कि कोयला ब्लाक आवंटन नीलामी के आधार पर होना चाहिए . इन तथ्यों को भुला दिया गया .’’

उनसे जब यह पूछा गया कि क्या वह यह मानते हैं कि वह कुछ फैसले अलग तरीके से कर सकते थे सिंह ने कहा, ‘‘इस अवधि का जब इतिहास लिखा जायेगा तो हम बेदाग निकलेंगे .’’ इस सवाल पर कि क्या कभी उन्हें ऐसा लगा कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें किसी भी समय ऐसा नहीं लगा और उन्होंने पूरी ईमानदारी से अपना काम करने का प्रयास किया .

 

प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अलग अलग व्यक्तियों के कारण कांग्रेस में सत्ता के दो केन्द्र होने के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ईमानदारी से यह मानते हैं कि एक ही व्यक्ति के पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री न होने की व्यवस्था ने अत्यंत ही अच्छे ढंग से काम किया है . मनमोहन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच बिना किसी टकराव के मैं दस वषो’ का कार्यकाल पूरा कर पाया . उन्होंने जटिल मुद्दों से निपटने में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मदद के लिए उनकी सराहना की .

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Web Title: कमजोर प्रधानमंत्री नहीं रहा, इतिहास मेरे प्रति ज्यादा उदार रहेगा : मनमोहन
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