कमलनाथ व सिंधिया ने बचाई कांग्रेस की लाज

कमलनाथ व सिंधिया ने बचाई कांग्रेस की लाज

By: | Updated: 17 May 2014 06:16 AM

भोपालः लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में कांग्रेस को करारी हार झेलना पड़ी. पार्टी के दो ही दिग्गज कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसे हैं जो पार्टी की लाज बचाने में सफल रहे.

 

देश के अन्य हिस्सों की तरह मध्य प्रदेश में भी नरेंद्र मोदी और बीजेपी की लहर के आगे कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया है. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 12 संसदीय क्षेत्रों में जीत दर्ज की थी और पार्टी के तमाम बड़े नेता दिग्विजय सिंह से लेकर कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया यह भरोसा जताते रहे कि इस बार नतीजे और भी बेहतर रहेंगे, मगर ऐसा हुआ नहीं.

 

राज्य की 27 संसदीय क्षेत्र भाजपा के खाते में गए तो सिर्फ दो संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा व गुना कांग्रेस की झोली में गए. छिंदवाड़ा से कमलनाथ जीते. तो गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जीत दर्ज की. इस चुनाव में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, राहुल गांधी कैम्प की मीनाक्षी नटराजन जैसे दिग्गज भी अपनी सीट नहीं बचा पाए.

 

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा चुनाव की शुरुआत से ही कहते रहे हैं कि गुना और छिंदवाड़ा में ही भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला है, उनकी यह भविष्यवाणी न केवल सही निकली, बल्कि नतीजे आने के बाद वे कुछ कमी रह जाने की बात स्वीकार रहे हैं.

 

छिंदवाड़ा से कमलनाथ और गुना से सिंधिया ने एक-एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है. यह जीत कांग्रेस को काफी हद तक राहत देने वाली है, क्योंकि हर तरफ से आ रही हार की खबरों के बीच इन दो क्षेत्रों से जीत की खबर आई है.

 

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भाजपा केा मिली बड़ी जीत का जनता के विश्वास की जीत करार दिया और कहा कि अब राज्य के साथ पक्षपात नहीं होगा. कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार लगातार राज्य के साथ पक्षपात करती रही अब ऐसा नहीं होगा और राज्य तेजी से प्रगति करेगा.

 

वहीं कमलनाथ ने कांग्रेस की हार की अहम वजह जनहित में किए गए कार्य और योजनाओं को जनसामान्य तक न पहुंचाना बताया. उन्होंने कहा कि बीते 10 वर्षो में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने जनसामान्य का जीवन स्तर बदलने के लिए कई योजनाएं चलाईं मगर उनका प्रचार ठीक से नहीं हो सका.

 

पहले विधानसभा चुनाव में और अब लोकसभा चुनाव में मिली पराजय ने कांग्रेस के सामने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आने वाले समय में वह राज्य में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायतों के चुनाव में मुकाबला कर भी पाएगी या नहीं.

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