कर्ज में डूबी किंगफिशर को एसबीआई देगी कर्ज़!

कर्ज में डूबी किंगफिशर को एसबीआई देगी कर्ज़!

By: | Updated: 22 Feb 2012 11:11 AM


मुंबई/नई दिल्ली: कर्ज
में डूबी किंगफिशर को राहत
मिलने जा रही है. हिंदुस्तान
टाइम्स की खबर है कि देश का
सबसे बड़ा सरकारी बैंक
एसबीआई 1650 करोड़ रुपए की मदद
किंगफिशर को दे सकता है.




हालांकि स्टार न्यूज ने
एसबीआई से इस बारे में पूछा
तो कोई जवाब नहीं आया. लेकिन
सवाल ये है कि क्या आपके पैसे
से बचेगा किंगफिशर? किंग ऑफ
गुड टाइम्स विजय माल्या इन
दिनों बिलकुल मुस्कुरा नहीं
रहे हैं.




हो सकता है कि आपने जो अपनी
गाढ़ी कमाई बैंकों में जमा की
हुई है वो किंग ऑफ गुड टाइम्स
की पुरानी मुस्कान वापस ला
सके.
पिछले एक साल में ही 1027
करोड़ का घाटा बढ़ा और 890
करोड़ तेल कंपनियों का बकाया
है.




बिना पैसे लिए तेल कंपनियां
किंगफिशर को तेल देने के लिए
तैयार नहीं हैं. किंगफिशर के
बैंक खाते इनकम टैक्स विभाग
ने सीज किए हुए हैं और जिन
बैंकों ने किंगफिशर को कर्ज
दे रखा है उनको मालूम नहीं कि
पैसा डूबेगा या मुनाफे के साथ
वापस मिलेगा.




ऐसे समय में देश का सबसे बड़ा
सरकारी बैंक एसबीआई
किंगफिशर का सहारा बनने को
तैयार है. हिंदुस्तान टाइम्स
की खबर है कि एसबीआई 1650 करोड़
रुपए किंगफिशर को देने को
तैयार है. इसके बावजूद कि
किंगफिशर ने पुराना 7 हजार 57
करोड़ का कर्ज लौटाया नहीं
है.




एसबीआई क्या सोचकर एक कंगाल,
बदहाल, तंगहाल कंपनी को बचाने
के लिए और 1650 करोड़ का जुआ
लगाने जा रहा है, ये बताने के
लिए एसबीआई अभी तक सामने नहीं
आया है.




सवाल





स्टार न्यूज ने भी एसबीआई
के बड़े अधिकारियों से
संपर्क किया लेकिन कोई जवाब
देने के लिए तैयार नहीं है.
हालांकि सरकार और आरबीआई को
इसमें कोई दिक्कत नहीं है.




सब पल्ला झाड़ रहे हैं लेकिन
कोई ये नहीं सोच रहा है कि
एसबीआई अपनी जेब का पैसा
किंगफिशर को नहीं दे रही है.
वो दे रही है आपका और हमारा
पैसा जो एसबीआई में सेविंग
अकाउंट, एफडी एकाउंट या किसी
और तरीके से जमा हुआ है. अगर
पैसा डूबा तो जिम्मेदार कौन
होगा? एसबीआई देश का बड़ा
बैंक है लेकिन खुद खस्ताहाल
है. आज सब शेयर बाजार में
किंगफिशर को एसबीआई की मदद की
खबर आई तो सनसनी मच गई. एसबीआई
का शेयर 8 फीसदी तक टूटा.




बाजार में हड़कंप इसलिए मचा
क्योंकि एसबीआई की माली हालत
खुद खराब है. अक्टूबर 2011 में
दुनिया की बड़ी रेटिंग
एजेंसी मूडीज ने एसबीआई की
रेटिंग सी माइनस से डी प्लस
कर दी थी.
 
डी रेटिंग का
मतलब ये होता है कि कंपनी
साधारण आर्थिक स्थिति में है
औऱ उसे बाहरी मदद की जरूरत
पड़ सकती है. सी रेटिंग का
मतलब होता है कि पर्याप्त
आर्थिक स्थिति में है.




बात साफ है कि एसबीआई खुद
आर्थिक मदद की मोहताज है. ऐसे
में बदहाल किंगफिशर पर पैसे
लगाकर कहीं एसबीआई आपके औऱ
हमारे पैसे के साथ जुआ तो
नहीं खेल रही हैं?




एसबीआई उस किंगफिशर कंपनी पर
पैसे लगा रही है जिस पर 7 हजार
करोड़ का कर्ज है. इसमें
एसबीआई के 1600 करोड़, बैंक ऑफ
इंडिया के 575 करोड़, आईडीबीआई
के 727 करोड़, पीएनबी के 700 करोड़,
आईसीआईसीआई के 450 करोड़,
एक्सिस बैंक के 50 शामिल हैं.




सवाल ये है ऐसी हालत में देश
के सबसे बड़े बैंक का
किंगफिशर की मदद के लिए आगे
आना सरकार का कोई एतराज न हो,
क्या इसके पीछे कोई राज है?
क्यों नहीं ये माना जाए कि
सरकार खुद को मदद नहीं कर रही
है लेकिन बैंक डोर से
किंगफिशर को मदद पहुंचवा रही
है.




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