कर्नाटक में भाजपा के लिए गलफांस बने येदियुरप्पा

कर्नाटक में भाजपा के लिए गलफांस बने येदियुरप्पा

By: | Updated: 06 Oct 2012 09:10 AM


बंगलुरु:
दक्षिण भारत में व्यापक
जनाधार खड़ा करने की भारतीय
जनता पार्टी की कोशिश को जिस
कर्नाटक ने परवान चढ़ाया था,
वहां पार्टी की बेचैनी बढ़ती
जा रही है. राज्य विधानसभा का
चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा
रहा, येदियुरप्पा की भूमिका
को लेकर पार्टी में संशय
गहराता जा रहा है.
येदियुरप्पा पार्टी के लिए
गले की फांस बन गए हैं.

बगावती
तेवर के लिए कुख्यात
येदियुरप्पा से निपटने के
भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व के
तौर-तरीकों ने पार्टी संगठन
को निराश ही किया है.
येदियुरप्पा के मसले पर
पार्टी की कमजोरियां बार-बार
उजागर होती रही हैं. इससे
पार्टी के वोट बैंक एवं कैडर
में गलत संदेश गया है.




पार्टी जिस तरीके से इस सत्ता
संघर्ष से निपटने की कोशिश
करती रही है, उससे साबित होता
है कि उसे कर्नाटक के वोट
बैंक की अच्छी समझ नहीं है.
लोगों में यह संदेश गया है कि
राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई
पार्टी नेता नहीं है जो
येदियुरप्पा को नकेल दे सके
या उन पर प्रभाव जमा सके.

येदियुरप्पा
खुद को 'राजनीतिक साजिश का
शिकार' के तौर पर पेश करते रहे
हैं, पर राष्ट्रीय नेतृत्व
उनके इस तुरुप की कोई कारगर
काट नहीं निकाल पाया है. पहली
बार दक्षिण भारत में सत्ता
सुख प्राप्त करने वाली भाजपा
के हाथ से सरकार की बागडोर
छीनने का खतरा बढ़ता जा रहा
है.

भाजपा के नेता इस
बिंदु पर मंथन करने में
व्यस्त हैं कि अगर
येदियुरप्पा को पार्टी से
निकाला जाए तो कितनी सीटों का
नुकसान होगा या पार्टी में
उन्हें बनाए रखने से कितनी
सीटों का लाभ होगा. वैसे, उपरी
तौर पर पार्टी के नेता इससे
इनकार करते हैं कि उनका
चुनावी मंथन येदियुरप्पा
केंद्रित है.

येदियुरप्पा
को यह अच्छी तरह मालूम है कि
राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई भी
भाजपा नेता नहीं है जो उन पर
हावी होते हुए राज्य के आम
मतदाताओं को पार्टी के पक्ष
में गोलबंद कर सके.
येदियुरप्पा पार्टी नेतृत्व
की इसी कमजोरी का फायदा उठाते
रहे हैं.

येदियुरप्पा की
जिद पर जगदीश शेट्टार के
नेतृत्व में बनी सरकार के
मंत्री और समर्थक यह
प्रचारित करते फिर रहे हैं कि
येदियुरप्पा के बगैर राज्य
में पार्टी का कोई भविष्य
नहीं है. उनके मुताबिक अगर
येदियुरप्पा को निष्कासित
किया गया तो राज्य में पार्टी
का संपूर्ण पतन हो जाएगा.

उनका
दावा है कि पार्टी शीर्ष
नेतृत्व को येदियुरप्पा की
ताकत और राज्य की जमीनी
राजनीतिक स्थिति के बारे में
सही अंदाजा नहीं है. ऐसे में
येदियुरप्पा पार्टी के लिए
उम्मीद न बनकर, गलफांस बन गए
हैं.




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