कांग्रेस को कम न आंका जाए, 2014 में यूपीए-3 की ही बनेगी सरकार: राहुल

By: | Last Updated: Sunday, 16 March 2014 10:56 AM
कांग्रेस को कम न आंका जाए, 2014 में यूपीए-3 की ही बनेगी सरकार: राहुल

नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष और पार्टी की ओर से अघोषित पीएम पद के उम्मीदवार राहुल गांधी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि कांग्रेस को कम करके नहीं आंका जाए.

 

उन्होंने कहा है कि कांग्रेस 2014 के लोकसभा चुनाव में साल 2009 के लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा सीटें हासिल करेगी.

 

राहुल ने साफ किया कि इस बार भी कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए-3 की सरकार बनने जा रही है.

 

कांग्रेस के काडरों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन पर कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट है और समान विचार वाले दलों के साथ कांग्रेस आगे काम करेगी.

 

खुद को पार्टी सुप्रीम की छवि से निकलने की कोशिश में कहा कि कई बार पार्टी उनके फैसलों को दरकिनार कर देती है. जब उनसे मिसाल पूछा गया तो उनका कहना था कि वे चाहते थे कि लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाया जाए, लेकिन सरकार ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया.

 

राहुल ने माना कि 10 साल के शासनकाल के बाद ‘कुछ हद तक हमारे के लिए सत्ता विरोधी लहर है.’ लेकिन कांग्रेस की प्रचार अभियान के प्रमुख ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम के उस विचार से असहमति जताई कि पार्टी को कमतर आंका जा रहा है और उसके सामने बहुत मुश्किल लक्ष्य है.

 

उन्होंने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘कांग्रेस चुनौतीपूर्ण चुनाव लड़ रही है और हम इस चुनाव जीतेंगे.’’

राहुल ने आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिलने वाली सीटों को लेकर अनुमान से इंकार करते हुए कहा, ‘‘मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं, लेकिन हम अच्छा करेंगे.’’

 

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को सिरे से खारिज करते हुए राहुल ने कहा कि कांग्रेस इस चुनाव में 2009 के चुनाव के मुकाबले बेहतर करेगी. 2009 में पार्टी ने 206 सीटें जीती थीं.

 

उन्होंने याद दिलाया कि 2004 और 2009 के चुनावों में भी कांग्रेस की हार या बुरी तरह पराजय का अनुमान लगाया गया था.

 

लोगों के साथ संवाद में सरकार और पार्टी की नाकामी के बारे में राहुल ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम अपनी उपलब्धियों को लोगों तक अधिक आक्रामक ढंग से पहुंचा सकते थे. जैसे कि मैंने कहा कि हमने परिवर्तनकारी कार्य किया है. हम संवाद में हमेशा बेहतर हो सकते हैं.’’

 

कांग्रेस के सहयोगी दलों का साथ छूटने संबंधी धारणा को खारिज करते हुए राहुल ने कहा कि उनकी पार्टी का राकांपा, राजद, झामुमो, रालोद और नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन है, हालांकि द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस अलग हो गए.

यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस तृणमूल और द्रमुक के साथ फिर से काम कर सकती है तो राहुल ने कहा, ‘‘हम उन लोगों के साथ हमेशा से काम करने की इच्छा रखते हैं जिनकी विचारधारा और राजनीतिक दर्शन समान है और जो सांप्रदायिकता और उन सांप्रदायिक दलों के खिलाफ लड़ने को प्रतिबद्ध हैं जो अपने तुच्छ राजनीतिक फायदों के लिए भारत को विभाजित करना चाहते हैं.’’

 

उनकी शक्तियों को बहुत अधिक आंके जाने की बात कहते हुए राहुल ने कहा कि कई मामलों में मेरे सरकार से मतभेद रहे हैं लेकिन ‘मेरी बात खारिज कर दी गयी.’

 

जब उनसे उसका उदाहरण देने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि ‘‘एक बहुत बड़े सार्वजनिक विषय पर जिस पर मेरी बात खारिज कर दी गयी’’ वह थी लोकपाल को संवैधानिक निकाय बनाने का सवाल. उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी में वरिष्ठ नेताओं से मेरी राय भिन्न थी लेकिन मेरी बात खारिज कर दी गयी.’’

 

राहुल ने एक अन्य उदाहरण दोषी ठहराए गए सांसदों को अयोग्य ठहराने के शीर्ष अदालत के फैसले पर जारी अध्यादेश वाले मामले का दिया. इस मामले में उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भिन्न रूख अपनाया था और शुरू में उन्हें खारिज कर दिया गया था.

 

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘‘तब मैंने अपनी राय सार्वजनिक करने का कदम उठाया.’’ उनका इशारा उस संवाददाता सम्मेलन की ओर था जहां उन्होंने कहा था कि इस अध्यादेश को फाड़कर फेंक देना चाहिए. वह वहां जनता की राय व्यक्त कर रहे थे और पार्टी ने उनकी बात सुनी.

 

इस मुद्दे पर उनके सार्वजनिक रूप से बयान देने पर विवाद पैदा हो गया था क्योंकि उन्होंने ऐसे समय यह बयान दिया था जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विदेश में थे.

 

इस विवाद पर राहुल गांधी ने कहा, ‘‘बाद में यह समझ में आया कि इस विषय को बेहतर ढंग से निबटाया जा सकता था.’’

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Web Title: कांग्रेस को कम न आंका जाए, 2014 में यूपीए-3 की ही बनेगी सरकार: राहुल
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