कानपुर: प्रदूषण में कमी, पर विषाक्त है बरकरार

कानपुर: प्रदूषण में कमी, पर विषाक्त है बरकरार

By: | Updated: 05 Jun 2012 06:20 AM


कानपुर/नई दिल्ली: कानपुर
में गंगा नदी में लगातार
फैलते प्रदूषण को लेकर हर कोई
चिंता में है. कानपुर की गंगा
को साफ रखने के लिए कई ठोस कदम
उठाए गए हैं लेकिन ये कोशिशें
गंगा को साफ रख पाने में
नाकाफी साबित हो रही हैं.




कानपुर में गंगा के प्रदूषित
होने की सबसे बड़ी वजह है शहर
का औद्योगिक कचरा . 800 से भी
ज्यादा चमड़े की
फैक्ट्रियों से निकलने वाला
कचरा गंगा को दूषित कर रहा है.
कानपुर के सीसामऊ नाला से हर
रोज करीब 30 मिलियन लीटर गंदा
पानी और कचरा सीधे गंगा नदी 
में गिरता है.




नाले से गिरते कचरे को लेकर
शिकायतें हो चुकी है लेकिन
इसको रोकने के लिए कोई ठोस
कदम प्रशासन की तरफ से अब तक
नहीं उठाया गया है.




गंगा आंदोलन से जुड़े लोगों
को कहना है कि फैक्ट्रियों से
ज्यादा ये नाले गंगा को
प्रदूषित कर रहे हैं.




कानपुर शहर में सीवर के पानी
को साफ़ करने के लिए ट्रीटमेंट
प्लांट भी लगा है. गंगा एक्शन
प्लान के तहत ये 1998 में बना. इस
प्लांट की क्षमता एक सौ तीस
मिलियन लीटर पानी साफ करने की
है. लेकिन बिजली की कमी की वजह
से प्लांट घंटों बंद रहता है.
शहर का एक तिहाई कचरा इस नाले
से गंगा में पहुंच रहा है.




लेकिन ताजा रिपोर्ट के
नतीजों के मुताबिक कानपुर
में गंगा के प्रदूषण में भारी
गिरावट आई है.




हालांकि इसके बाद भी कानपुर
का पानी अब भी विषैला है.
कानपुर का पानी पीने लायक
इसलिए नहीं है क्योंकि इसमें
पिछले दो सालों की तरह अब भी ई
कोलाई पॉजीटिव मिला है.




अच्छी खबर ये है कि कानपुर
में गंगा का प्रदूषण कम हो
रहा है. जरूरत है कोशिशें तेज
करने की. कुछ और ठोस कदम उठाने
की ताकि गंगा पूरी तरफ साफ हो
सके.




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