कीट-पतंगों से प्यार करने वाली देश की पहली महिला

By: | Last Updated: Thursday, 12 September 2013 10:51 AM
कीट-पतंगों से प्यार करने वाली देश की पहली महिला

मुंबई:
अधिकांश महिलाओं को जहां
कीट-पतंगों के बारे में सोचकर
भी झुरझुरी हो जाती होगी,
वहीं मुंबई की वी. शुभलक्ष्मी
को न सिर्फ कीट-पतंगों से
बेहद लगाव है, बल्कि वह
कीट-पतंगों पर अध्ययन करने
वाली देश की पहली महिला भी
हैं.

पेशे से लेपिडॉप्टरिस्ट
शुभलक्ष्मी तितलियों व कीट
पतंगों को इकट्ठा कर उनका
अध्ययन करती हैं. उन्हें अपने
काम से जुनून की हद तक लगाव है
और वह इसके लिए तितलियों और
कीट-पतंगों के पीछे खतरनाक
इलाकों तक में रातों में भी
जाने से भी नहीं हिचकतीं.

42 वर्षीय वी. शुभलक्ष्मी
लेपिडॉप्टेरामें डॉक्टरेट
हैं. अपने प्रिय रंगीन,
शर्मिले कीट-पतंगों के पीछे
पीछे शुभलक्ष्मी पहली बार
अपने थोड़े से उपकरणों के साथ
महाराष्ट्र या अरुणाचल
प्रदेश के घने जंगलों में
बहुत भीतर तक चलती चली गईं.

इस दौरान उनके साथ साम्रगी के
तौर पर तितली पकड़ने वाली
हल्की जाली, एक सफेद चादर और 165
वॉट का जनरेटर लगा लैम्प ही
था. जंगल के भीतर उन्होंने
पेड़ों के बीच चादर बिछा दी
और उसके ऊपर लैंप जलाकर लटका
दिया, जिसके कारण अत्यधिक
संख्या में कीट पतंगे उसकी
तरफ आकर्षित हो गए. इससे
शुभलक्ष्मी को कीटों के
फोटोग्राफ लेने और उनसे
संबंधित जानकारी इकट्ठी
करने में बहुत आसानी हुई.

इस क्षेत्र में महिलाओं की
संख्या बेहद कम है, उनमें भी
शुभलक्ष्मी देश में इस
अध्ययन की नींव रखने वाली
महिला मानी जाती हैं.
शुभालक्ष्मी के इस जुनून के
कारण ही पिछले 10 वर्षो में
महाराष्ट्र में 419 व अरुणाचल
प्रदेश में 500 कीड़ों की
प्रजाति की तलाश हो पाई.

वर्ष 2005 में उन्होंने संजय
गांधी राष्ट्रीय उद्यान में
मधुमक्खियों की एक विशेष
प्रजाति ‘कारपेंटर बी हॉकमॉथ’
की तलाश की जो अब तक सिर्फ
म्यांमार में ही पाई जाती थी.
इसके अलावा शुभलक्ष्मी ने
इसी उद्यान से दुनिया के सबसे
बड़े पतंगे ‘एटलस मॉथ’ की भी
तलाश की. इस पतंगे के पंख 12 इंच
तक के आकार के होते हैं.

देश की पहली कीट विशेषज्ञ के
रूप में जानी जाने वाली
शुभलक्ष्मी के बारे में यह
कल्पना भी नहीं की जा सकती कि
वह बचपन में कीड़ों से काफी
डरती थीं.

शुभलक्ष्मी ने बताया, “मेरी
मां भी कीड़ों से काफी डरती
थीं. हालांकि, प्रकृति के
प्रति मेरा प्रेम बेहद बढ़ता
चला गया और मैं अपने नाम से
पहले डॉक्टर लिखने की तमन्ना
रखती थी. इसीलिए मैंने इस
क्षेत्र का चुनाव किया.

उन्होंने बताया कि ‘बांबे
नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी’
में कीट पतंगों के संपर्क में
आने के बाद उनका कीट पतंगों
से डर जाता रहा और वह उन्हें
उनसे लगाव हो गया.

जब उन्होंने यह राह चुनी तो
उन्हें यह जानकर काफी
आश्चर्य हुआ कि ब्रिटिश शासन
के बाद किसी ने भी तितली व
कीड़ों पर अध्ययन करने या
उनसे संबंधित जानकारी
जुटाने की कोशिश नहीं की, और
यहां तक कि देश में इस
क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ
तक नहीं हैं.

2004 में इस विषय पर अपनी
डॉक्टरेट की डिग्री पूरी
करने के बाद उन्होंने
महाराष्ट्र में कीड़ों से
जुड़ी जानकारी इकट्ठी करनी
शुरू की. 2011 में शुभलक्ष्मी
अरुणाचल प्रदेश के एक स्कूल
अध्यापक द्वारा भेजे गए कीट
के एक फोटोग्राफ को देखकर
अत्यंत रोमांचित हो उठीं.

शुभलक्ष्मी ने आईएएनएस को
दिए साक्षात्कार में बताया,
“मैं उसकी पहचान तक नहीं कर
सकी और अंग्रेज कीट
विशेषज्ञों द्वारा बनाए गए
रिकॉर्ड में भी उस कीट के
संबंध में कोई जानकारी नहीं
मिली. उस कीट से जुड़ी
जानकारी इकट्ठा करने के लिए
मैंने अरुणाचल प्रदेश के
जंगलों में 10 दिन व रात
गुजारे. वहां रहते हुए मैंने
अरुणाचल के जंगलों में पाए
जाने वाले करीब 500 कीटों के
बारे में जानकारी इकट्ठी की,
लेकिन उस कीट के बारे में मैं
फिर भी नहीं जान सकी.

उन्होंने बताया कि बीहड़ और
खतरनाक जंगलों में कीट
पतंगों की तलाश करने की यहीं
से शुरुआत हुई. वर्तमान समय
में पूरे विश्व में 1 लाख 27
हजार कीड़ों की प्रजातियां
पाई जाती हैं. इनमें से 12 हजार
प्रजातियां भारत में पाई
जाती हैं. शुभलक्ष्मी ने
मुंबई के बोरीवली स्थित संजय
गांधी राष्ट्रीय उद्यान में
1993 में काम करना शुरू किया.

शुभलक्ष्मी ने बताया, “वन
विभाग के कर्मचारी भी मुझे
छिपकलियों, सांपों एवं अन्य
खतरनाक कीटों से भरे जंगल में
काम करता देख आश्चर्य में थे.
उस समय मैं करीब 21 वर्ष की थी.”

शुभलक्ष्मी अभी भी समय-समय पर
बेहद शांतचित्त और
धैर्यपूर्वक घने जंगलों में
घंटों कीट-पतंगों को निहारती
और उनका अध्ययन करती रहती
हैं.

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Web Title: कीट-पतंगों से प्यार करने वाली देश की पहली महिला
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