कुटकी की नई किस्म दूर करेगी शरीर में आयरन की कमी

By: | Last Updated: Monday, 16 June 2014 11:02 AM
कुटकी की नई किस्म दूर करेगी शरीर में आयरन की कमी

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने कुटकी का एक ऐसा नया किस्म विकसित किया है, जिसमें आयरन की मात्रा तीन गुना अधिक है. बीएल-4 नामक कुटकी की इस किस्म के 100 ग्राम अनाज में 28.3 मिलीग्राम आयरन होता है. यह देश में होने वाली अन्य फसलों में मौजूद आयरन की मात्रा से अधिक है. इस फसल के माध्यम से हर वर्ग के लोगों को सुनिश्चित मात्रा में आयरन मिल सकेगा, जिससे कम दर पर शरीर में होने वाली आयरन की कमी को दूर किया जा सकेगा.

 

विश्वविद्यालय के कुलपति एस. के. पाटिल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2011-12 में इंदिरा रागी-1 किस्म विकसित किया, जिसका औसत उत्पादन 25-27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. इसी प्रकार इंदिरा कोदो-1 किस्म विकसित की गई, जिसका औसत उत्पादन 25-26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.

 

उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त इस परियोजना के अंतर्गत कई फसलों की नवीन किस्मों का विकास अंतिम चरण में है. शीघ्र ही उन्हें नवीन किस्मों के रूप में राज्य एवं देश के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.

 

उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के अधीन बस्तर के जगदलपुर में स्थित शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में संचालित अखिल भारतीय लघु धान्य सुधार परियोजना द्वारा सीओ-2 और टीएनएयू-97 के संकरण से उत्पन्न बीएल-4 कुटकी में आयरन की अत्यधिक मात्रा पाई गई, जो कि अन्य राष्ट्रीय स्तर पर चयनित किस्मों की तुलना में ज्यादा है. साथ ही तीन वर्षो की औसत उत्पादकता 12.74 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. वर्षा आधारित कृषि में यह आसानी से 85-90 दिनों में पककर तैयार हो जाती है.

 

इस नए किस्म के पौधे की औसत ऊंचाई 109.2 सेंटीमीटर तथा उत्पादक कंसों की संख्या चार तक है. दाने का रंग गहरा सुनहरा तथा चावल का रंग सफेद है. संधि व पर्व संधियों पर कोई धब्बा या रंग न होकर हरे रंग लिए हुए हैं, बालियां झुकी व सधी हुई होने के कारण बीएल-4 उच्च उत्पादकता वाली श्रेणी के अंतर्गत आती है.

 

कृषि वैज्ञानिक एन. एस. तोमर, अभिनव साव एवं आदिकांत प्रधान ने बताया कि अखिल भारतीय समन्वित लघु धान्य फसल अनुसंधान परियोजना की वार्षिक कार्यशाला तीन से छह अप्रैल के बीच उत्तराखंड के अल्मोड़ा में आयोजित की गई, जिसमें अनुंसधान समीक्षा समिति ने कृषि विवि रायपुर द्वारा विकसित कुटकी की बीएल-4 किस्म को नई किस्म के रूप में चिन्हित कर लिया गया है.

 

कृषि वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि वर्ष 2014-15 में ‘सेन्ट्रल वेराइटी रिलीज कमेटी’ द्वारा इस किस्म को अधिसूचित कर दिया जाएगा. कुटकी एक कम अवधि वाली ज्वार के नस्ल की फसल है, जो कि छत्तीसगढ़ एवं देश के अन्य असिंचित ऊंचे खेतों के लिए उपयुक्त है.

 

कुटकी की इस किस्म का विकास वैज्ञानिक एन. एस. तोमर, अभिनव साव एवं आदिकांत प्रधान ने मिलकर किया है. इस उपलब्धि के लिए संबंधित वैज्ञानिकों को कुलपति ने बधाई दी है.

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Web Title: कुटकी की नई किस्म दूर करेगी शरीर में आयरन की कमी
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