केजी बेसिन पर केंद्र की मंजूरी से रिलायंस को जबरदस्त मुनाफा: FIR

By: | Last Updated: Friday, 14 February 2014 2:25 PM
केजी बेसिन पर केंद्र की मंजूरी से रिलायंस को जबरदस्त मुनाफा: FIR

नई दिल्ली: कृष्णा गोदावरी बेसिन (केजी बेसिन) में गैस उत्पादन बढ़ाने के लिये 8.8 अरब डालर के खर्च को सरकारी मंजूरी मिलने से मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिये इस परियोजना से भविष्य में 1.2 लाख करोड़ रपये का अप्रत्याशित लाभ कमाने का मार्ग प्रशस्त हुआ. यह आरोप दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में लगाया गया है.

 

अपराधा शाखा ने पांच पन्नों की एफआईआर में आरोपों लगाने के साथ दस्तावेज भी नत्थी किये हैं. इसमें कहा गया है कि वर्ष 2006 में कई सांसदों के एतराज के बाद केन्द्र ने कंपनी की इस मांग को मानने से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में इसे नजरंदाज कर दिया गया.

 

एफआईआर के साथ कई दस्तावेज भी लगाये गये हैं. इसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भेजी गई शिकायत भी शामिल है जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. एफआईआर में पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली, रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी और अन्य को नामजद किया गया है.

 

एफआईआर के अनुसार वर्ष 2004 में रिलायंस ने केजी बेसिन क्षेत्र के विकास के लिये एकीकृत विकास योजना का खाका सौंपा था. इसमें कहा गया था कि 2.39 अरब डालर के निवेश से क्षेत्र में प्रतिदिन 4 करोड़ घनमीटर गैस का उत्पादन होगा. इसमें आगे कहा गया है कि दो साल के भीतर ही रिलायंस ने दूसरी कार्ययोजना सौंपी जिसमें कहा गया कि क्षेत्र में 8.8 अरब डालर के निवेश से दैनिक 8 करोड़ घनमीटर गैस का उत्पादन किया जायेगा.

 

एफआईआर कहती है ‘‘यह अपनेआप में बेतुका लगता है कि उत्पादन दुगुना करने के लिये निवेश चार गुना होना चाहिये. शुरआती बुनियादी ढांचा खड़ा कर दिये जाने के बाद अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुटाने के लिये ज्यादा खर्च की आवश्यकता नहीं होती.’’? तत्कालीन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रपी मणिशंकर अय्यर ने इसकी अनुमति नहीं दी तो उन्हें मंत्रालय से हटा दिया गया और मुरली देवड़ा को जनवरी 2006 में पेट्रोलियम मंत्री बना दिया गया.

 

शिकायत में कहा गया है ‘‘तपन सेन जैसे कई सांसदों द्वारा इसका कड़ा विरोध किये जाने के बावजूद सरकार ने क्षेत्र में 8.8 अरब डालर के खर्च को मंजूरी दे दी. इस खर्च की अनुमति देकर सरकार ने रिलायंस को भविष्य में 1.2 लाख करोड़ रपये का अप्रत्याशित लाभ कमाने का अवसर उपलब्ध करा दिया.’’

 

इस पूरे मामले में पेट्रोलियम मंत्री मोइली के अलावा पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा, रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी, पूर्व हाइड्रोकार्बन महानिदेशक वी.के. सिब्बल तथा कुछ अन्य अज्ञात लोगों को एफआईआर में दोषी बताया गया है.

 

एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 :धोखधड़ी:, 120 बी :आपराधिक साजिश: और भ्रष्टाचार निरोध कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज कराई गई है.

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Web Title: केजी बेसिन पर केंद्र की मंजूरी से रिलायंस को जबरदस्त मुनाफा: FIR
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