कैश सब्सिडी का फैसला टल सकता था: चुनाव आयोग

कैश सब्सिडी का फैसला टल सकता था: चुनाव आयोग

By: | Updated: 03 Dec 2012 09:32 PM


नई
दिल्‍ली:
कैश सब्सिडी स्कीम
के एलान को लेकर चुनाव आयोग
ने अपनी नाराज़गी जाहिर करते
हुए कहा कि सरकार चुनाव तक इस
फैसले को टाल सकती थी.




कैश सब्सिडी स्कीम के मुद्दे
पर सोमवार को तीनों चुनाव
आयोग की बैठक के बाद चुनाव
आयोग ने सरकार को चेतावनी
देते हुए गुजरात के चार जिलों
और हिमाल प्रदेश के दो जिलों
में इस योजना के अमल पर रोक
लगा दी.




सरकार के जवाब पर विचार करने
के बाद चुनाव आयोग ने माना है
कि अच्छा होता अगर सरकार अभी
कैश सब्सिडी योजना को लागू
करने से बचती.




ग़ौरतलब है कि गुजरात चुनाव
की तीरीखों के एलान के बाद
केंद्र की सत्ताधारी
कांग्रेस सरकार ने कैश
सब्सिडी योजना का एलान किया
था जिसके खिलाफ बीजेपी ने
चुनाव आयोग से शिकायत की थी. 




बीजेपी ने चुनाव आयोग के
सामने अपनी शिकायत में तर्क
दिया था कि सरकार के इस फैसले
से चुनाव आचार संहिता का
उल्लंघन हुआ है.




इस मुद्दे पर सरकार ने चुनाव
आयोग के सामने अपना तर्क रखा,
लेकिन आयोग सरकार के जवाब से
संतुष्ट नहीं हुआ.




सरकार ने सोमवार को चुनाव
आयोग के सामने अपना पक्ष रखते
हुए कहा था कि कैश सब्सिडी
स्कीम से आचार संहिता का कोई
उल्लंघन नहीं हुआ.




सरकार का तर्क था कि स्‍कीम
का ऐलान बजट में ही हो गया था.
इससे पहले बीजेपी ने चुनाव
आयोग से शिकायत करते हुए दावा
किया था कि गुजरात चुनाव में
फायदा लेने की नीयत से सरकार
ने इस स्कीम को अभी लागू किया
है.




कैश सब्सिडी स्कीम में
गुजरात के चार जिलों मेहसाणा,
भावनगर, वलसाड और आणंद को
शामिल किया था, जबकि हिमाल
प्रदेश के दो जिलों के नाम थे.




कैश सब्सिडी यूं तो अगले साल
एक जनवरी से शुरू होनी है,
लेकिन फिलहाल ये योजना
गुजरात के लिए चुनावी मुद्दा
बन चुका है और अब केंद्र
सरकार को इस पर शर्मिंदगी
उठानी पड़ रही है.




http://www.youtube.com/watch?v=SCuRGMO7lb0




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