कोयला अवांटन पर बहस से विपक्ष डर रहा है: श्रीप्रकाश

कोयला अवांटन पर बहस से विपक्ष डर रहा है: श्रीप्रकाश

By: | Updated: 22 Aug 2012 06:22 AM


नई दिल्ली: केंद्रीय
कोयला मंत्री श्रीप्रकाश
जायसवाल का कहना है कि है कि
बीजेपी इसलिए चर्चा नहीं
चाहती क्योंकि बीजेपी शासित
राज्यों के मुख्यमंत्रियों
ने कोयला खदानों के आवंटन का
विरोध किया था और उनकी हकीकत
सामने आ जाएगी.




श्रीप्रकाश जायसवाल ने
बुधवार को कहा कि बहस में
बीजेपी टिक नहीं सकती है,
इसलिए वह चर्चा से भाग रही है.




ग़ौरतलब है कि कोयला खदान
आवंटन मामले में बीजेपी
प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े
की ज़िद पर अड़ी हुई है तो
कांग्रेस इसपर चर्चा के लिए
तैयार है.




दूसरी ओर एबीपी न्यूज़ के पास
वो चिट्ठियां मौजूद हैं जो
कोयला आवंटन की नीति को लेकर
राज्य सरकारों नें केंद्र
सरकार को लिखी थीं, इनमें
बीजेपी शासित राज्यों के
मुख्यमंत्रियों की
चिट्ठियाँ भी शामिल हैं.




चिट्ठी में बीजेपी की
सरकारों ने लिखा है कि केंद्र
सरकार नीलामी के पक्ष में थी.
केंद्र सरकार का कहना था कि
आवेदकों की संख्या काफी
ज्यादा है इसलिए नीलामी
जरूरी है और इससे से
पारदर्शिता आएगी.




लेकिन राज्य सरकारों ने
नीलामी का विरोध किया.
छत्तीसगढ़ सरकार ने नीलामी
का विरोध करते हुए लिखा,
प्रस्तावित नीति में बदलाव
से स्टील की नई इकाइयां गरीब
राज्यों से तटीय अमीर
राज्यों के पास जा सकती हैं.
इसलिए ये प्रस्ताव लौह
इस्पात उद्योग के विकास के
लिए छत्तीसगढ़ समेत झारखंड
और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों
के लिए नुकसानदायक होगा.




अब आपको राजस्थान सरकार की
चिट्ठी के बारे में बताते
हैं, यहां ये साफ करना जरूरी
है कि जिस वक्त ये चिट्ठी
लिखी गई थी उस वक्त वहां
बीजेपी की सरकार थी. तब की
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
सिंधिया ने नीलामी का विरोध
करते हुए लिखा था, प्रस्तावित
नीति में बदलाव सरकारिया
आयोग की सिफ़ारिशों के खिलाफ
है.




सरकारिया आयोग ने केंद्र और
राज्यों के बीच के रिश्तों को
परिभाषित किया था, आयोग की
रिपोर्ट में प्राकृतिक
संसाधनों में केंद्र और
राज्य की हिस्सेदारी का भी
जिक्र था. सिर्फ बीजेपी शासित
राज्यों के मुख्यमंत्रियों
ने ही नहीं पश्चिम बंगाल की
लेफ्ट सरकार ने भी कोयला खदान
के आवंटन की नीलामी का विरोध
किया था.




उस समय पश्चिम बंगाल के
मुख्यमंत्री बुद्धदेब
भट्टाचार्य हुआ करते थे,
राज्य सरकार की चिट्ठी में
लिखा था कि पश्चिम बंगाल की
सरकार नीलामी के जरिए कोयला
खदानों के आवंटन के
प्रस्तावित नीति के पक्ष में
नहीं है.




जैसे ही कोयला खदान आवंटन के
नीलामी के विरोध में राज्य
सरकारों की चिट्ठी का जिक्र
हुआ हर तरफ से सफाई आने लगी.
नीलामी का विरोध करने वाले
सफाई दे रहे हैं लेकिन सरकार
इसी विरोध को अपने बचाव का
हथियार बना रही है.




अब सवाल ये है कि कहीं नीलामी
का विरोध करने वाली बीजेपी
शासित राज्यों के
मुख्यमंत्रियों की चिट्ठी
सामने आने की वजह से ही तो
बीजेपी संसद में चर्चा नहीं
चाहती.




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