कोयला घोटाला: पीएम के बचाव में यूपीए एकजुट

कोयला घोटाला: पीएम के बचाव में यूपीए एकजुट

By: | Updated: 22 Aug 2012 08:56 PM


नई
दिल्‍ली:
कोयला घोटाले पर
बीजेपी के दबाव के आगे सरकार
नहीं झुकेगी. बुधवार देर रात
तक चली यूपीए समन्वय समिति की
बैठक के बाद मनमोहन सरकार को
बड़ी ताकत मिली है. यूपीए के
सभी दलों ने एक सुर में
बीजेपी के हमलों का जवाब देने
की रणनीति बनाई है.

तृणमूल
कांग्रेस (टीएमसी) अध्‍यक्ष
और पश्चिम बंगाल की
मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी
भी खुलकर यूपीए सरकार के
समर्थन में उतर आई हैं.
हालांकि इसके बदले वो पश्चिम
बंगाल के विकास के लिए केंद्र
से कीमत वसूल सकती हैं.

कोयला
घोटाले पर घिरी सरकार को उसके
साथियों ने बड़ी ताकत दी है.
बुधवार रात हुई यूपीए समन्वय
समिति की बैठक के बाद यूपीए
के घटक दलों ने कहा कि
प्रधानमंत्री के इस्तीफे की
बात तो दूर बीजेपी चर्चा का
सामना तो करे.

पी चिदबंरम
के मुताबिक, 'यूपीए समन्वय
समिति की बैठक में ये आम राय
बनी कि सभी मुद्दों पर सदन
में चर्चा हो. बैठक में
प्रधानमंत्री ने कहा कि
कोयला खदान आवंटन पर सीएजी
रिपोर्ट समेत सभी मुद्दों पर
सदन में चर्चा होनी चाहिए.
लोकसभा में सदन के नेता सुशील
कुमार शिंदे यही बात रखेंगे.
यूपीए के सभी दल अपनी इसी राय
पर कायम हैं, लेकिन जिस तरह
बीजेपी चर्चा से बच रही है और
सदन नहीं चलने दे रही है, वो
ठीक नहीं है. इस मुद्दे पर
यूपीए में शामिल सभी दल एकमत
हैं.' 

सरकार और यूपीए के
घटक दलों को ममता बनर्जी से
सबसे बड़ी राहत मिली. ममता ने
इस बैठक के पहले तक सीएजी
रिपोर्ट पर रुख साफ नहीं किया
था, लेकिन बैठक के बाद
उन्होंने पत्रकारों से कहा
कि जाइए सभी लोग चैन की नींद
लीजिए.

उन्‍होंने कहा, 'ये
यूपीए की बैठक थी. इस पर बोलने
के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं.
आप लोग जाइए बहुत रात हो गई
है.'

कोयला घोटाले पर ममता
बनर्जी का साथ मिलना सरकार के
लिए कितना अहम है इसका अंदाजा
इसी से लगाया जा सकता है कि
यूपीए समन्वय समिति की बैठक
के बाद पीएम ने ममता से अकेले
में बात की.

यही नहीं आज
प्रधानमंत्री फिर ममता
बनर्जी से मिलने वाले है.
उनके साथ वित्त मंत्री पी
चिदंबरम भी रहेंगे. ममता ने
कोयला घोटाले पर सरकार का
समर्थन करने से पहले जमकर
दबाव बनाया था.

वो बीजेपी
नेताओं शाहनवाज और राजीव
प्रताप रूडी से भी मिलीं थीं.
यूपीए समन्वय समिति की बैठक
के बाद उन्होंने सरकार का साथ
देने का वादा तो किया, लेकिन
इशारों-इशारों में ये भी बता
दिया कि उन्हें भी सरकार से
क्या चाहिए.

ममता ने कहा,
मैंने कहा न राज्‍यों के
मुद्दों पर मुलाकात होनी है.
'देखिए, हमारे राज्‍य से
जुड़े कई मुद्दे हैं. नेशनल
हाईवे का मुद्दा है, असम से
जुड़ा मुद्दा है. इन सभी पर
बात होगी.'

ममता बनर्जी के
कामकाज की शैली को जानने वाले
भी कह रहे हैं कि
प्रधानमंत्री से मुलाकात
में पश्चिम बंगाल के लिए
आर्थिक पैकेज पर चर्चा हो
सकती है.

सरकार को अपनी
सबसे बड़ी सहयोगी ममता
बनर्जी को कोयला घोटाले पर
साथ लाने के लिए चाहे जो कीमत
चुकानी पड़े, लेकिन इतना साफ
है कि एक सुर में यूपीए के
हमले के बाद अब अकेली पड़
चुकी बीजेपी के हौसले पस्त
पड़ सकते हैं.




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