कौन हैं सुब्रत राय सहारा? सहारा ने कैसे देखते ही देखते कैसे खड़ा कर लिया पैसों का पहाड़

By: | Last Updated: Friday, 28 February 2014 6:01 AM

नई दिल्ली: आर्थिक जगत में रुपयों के जादूगर के तौर पर मशहूर सुब्रत रॉय सहारा 10 जून-1948 को अररिया जिले में पैदा हुए थे. यूपी सरकार के एक अदने से कर्मचारी के बेटे सुब्रत राय ने अपने दोस्तों के साथ 1978 में गोरखपुर में सहारा नाम की चिट-फंड फर्म बनाई और जल्दी ही अपने भाई जयब्रत राय समेत ज्यादातर रिश्तेदारों को खपाकर उसे कंपनी का रूप दे दिया. उस वक्त देश में मौजूद नान-बैंकिंग की एकलौती और निर्विवाद कम्पनी पियरलेस के तौर-तरीकों की नकल कर सहारा चिट-फंड कम्पनी ने जनता से पैसा उगाहना शुरू कर दिया. कंपनी ने निवेशकों से तीन साल में रकम दोगुनी करने का वायदा किया.

 

इस वायदे ने काम किया और देखते ही देखते पैसों का पहाड़ खड़ा होने लगा. पैसा आया तो सुब्रत रॉय ने इसे प्रचार में झोंक दिया. मुख्य शहरों में सहारा की विशाल इमारतें बनवाई गईं, क्रिकेट-फिल्म स्टार्स और राजनेताओं को रिझाने के लिए बड़े और भव्य आयोजन किए गए. इन सबके पीछे रणनीति ये थी कि सहारा की चर्चा जितनी ज्यादा होगी, कंपनी को निवेशकों से उतना ही ज्यादा पैसा मिलेगा.

 

सहारा इंडिया के सपनों को अचानक मानो पंख ही लग गये. जल्दी ही एयर-सहारा के नाम वाले हवाईजहाज आसमान में दिखने लगे लेकिन इसके जहाज जल्दी ही जमीन पर खड़े हो गये और यह एयर कम्पनी बिक गई. सहारा रियल एस्टेस से लेकर, मीडिया, वित्त, सूचना प्रौधोगिकी, निर्माण, ख़ुदरा व्यापार में मौजूद है.

 

भारतीय क्रिकेट टीम को प्रायोजित करने के साथ ही सहारा ने विजय माल्या वाली फार्मूला वन टीम पर 500 करोड़ रूपये मूल्य का 42-5  प्रतिशत हिस्सा खरीद लिया. सहारा आईपीएल में पुणे वारियर्स टीम की भी मालिक है. साथ ही सहारा भारतीय हॉकी टीम और महिला क्रिकेट टीम की प्रायोजक भी है. भरपूर प्रचार से खर्च बेहिसाब हो रहा था, जबकि उगाही की दर घटती जा रही थी.

 

ऐसे में सहारा की रियल इस्टेट से जुड़ी दो कम्पनियों सहारा कमॉडिटी सर्विसेज कार्पोरेशन लिमिटेड (एससीएससीएल, जिसका नाम पहले सहारा इंडिया रियल एस्टेट कार्पोरेशन लिमिटेड था) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (एसएचआइसीएल) से पूरी तरह परिवर्तनीय डिबेंचरों (ओएफसीडी) से हजारों हजार करोड़ रूपया उगाह लिया. सेबी का दावा है कि सहारा ने इसमें कुल 24,029 करोड़ रूपया उगाहा था. सेबी का कहना था कि यह गैरकानूनी उगाही है. नवंबर- 2010 को सेबी के फैसले के बाद सुब्रत राय ने बयान जारी कर दावा किया कि सहारा समूह के पास 30 जून-10 तक 1,09,224 करोड़ रूपये की संपत्तियां हैं.