क्या किसी को सिर्फ इस बात पर हत्या का गुनहगार बनाया जा सकता है कि पुलिस का स्निफर डॉग उस पर भौंक रहा था?

By: | Last Updated: Saturday, 1 February 2014 9:30 AM
क्या किसी को सिर्फ इस बात पर हत्या का गुनहगार बनाया जा सकता है कि पुलिस का स्निफर डॉग उस पर भौंक रहा था?

मुंबई: क्या किसी को सिर्फ इस बात पर हत्या का गुनहगार बनाया जा सकता है कि पुलिस का स्निफर डॉग उस पर भौंक रहा था? timesofindia.com में छपी खबर के मुताबिक मुंबई पुलिस के इस कारनामे की वजह से बाबर नाम के व्यक्ति, जिसपर की हत्या का आरोप था, को अपनी जिंदगी के दस साल जेल में बिताने पड़े. भले ही मुंबई हाई कोर्ट ने बाबर पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया हो, लेकिन ऐसा होने में उसके जीवन के दस साल निकल गए.

 

कोर्ट को इस नतीजे पर पहुंचने में दस साल लग गए कि आरोपी के खिलाफ कुत्ते के उसपर भूंकने के आलावा कोई और सबूत नहीं है जिससे साबित किया जा सके की हत्या बाबर ने की है.

 

जस्टिस पी वी हर दास और जस्टिस अजय गडकरी ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कुते के भौंकने के आलावा आरोपी के खिलाप कोई और सबूत नहीं है और बाबर के खिलाफ कोई और आरोप नहीं है तो उसे बाईज्जत बरी कर दिया जाए. बाबर को डबल मर्डर के आरोप में गिरफ्तार किया था. बाबर के खिलाफ मुंबई पुलिस ने जो सबसे प्रमुख सबूत दिया था वो ये था कि स्निफर डॉग बाबर को देखकर भौंकने लगा.

 

पुलिस का कहना है कि स्निफ डॉग को घटनास्थल पर खून के निशान वाले पत्थर सुंघाए गए थे. “कुत्ते का सूंघना पर्याप्त सबूत नहीं है और इस बात के सबूत नहीं होने कि क्या कुत्ता आरोपी को देखकर भौंक रहा था या नहीं, साथ कुत्ते को पत्थर का टुकड़ा सुंघने को दिया गया था या नहीं और ऐसे तमाम बातों के सबूत नहीं होने के आभाव में कुत्ते का कातिल को खोज निकालने को सबूत नहीं माना जा सकता. साथ ही आरोपी के खिलाफ हमें कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं जिससे कुत्ते के कातिल का पता लगाना साबित हो.” जजों ने कहा.

 

ये घटना सित्मबर 2004 की है जब सुंदरभाई और निवरुत्ती नाम के दो लोगों को उनके घर के बाहर मृत पाया गया था. पुलिस जांच में पता चला की बाबर का सुंदरभाई के साथ पाईप लगाने को लेकर झगड़ा था. पुलिस फिर कुतों को लेकर आई जो बाबर को देखकर भौंकने लगे तभी पुलिस ने बाबर को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. 2005 में ट्रॉयल कोर्ट ने एक और आरोपी को बरी करते हुए बाबर को उम्र कैद की सजा सुनाई जिसके बाद बाबर हाई कोर्ट पहुंचा.

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