क्या मोदी इन चुनौतियों को पार कर पाएंगे?

क्या मोदी इन चुनौतियों को पार कर पाएंगे?

By: | Updated: 22 May 2014 12:13 PM

आम जनता ने 30 साल बाद किसी एक पार्टी को स्पष्ट जनादेश देकर ये साफ कर दिया है कि उन्हें मजबूर नहीं मजबूत सरकार चाहिए. भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और उसे अपने बलबूते 282 सीटें मिली हैं, जो मोदी के प्रति देश के व्यापक जनसमूह के समर्थन को दर्शाता है.

 

नरेंद्र मोदी ने ये चमत्कार कैसे किया, किसके सहयोग से किया. इसपर बातें होती रहेंगी, लेकिन इस वक़्त सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर मोदी के समाने चुनौतियां क्या हैं.

 

चुनावी मुहिम के दौरान मोदी ने 450 से ज्यादा रैलियां कीं. जनता से जुड़ने के लिए 3डी रैलियों का भी सहारा लिया.

 

मोदी अपनी रैलियों में कहते रहे... 300 कमल दीजिए ताकि आपकी हर समस्या को दूर कर सकूं ...जनता ने मोदी पर भरोसा जताया और उनके गठबंधन को 300 से भी ज्यादा सीटें दीं. अब मोदी के हाथों में देश की कमान है, लेकिन चुनौतियां भी हैं.

 

मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि लगातार बढ़ती महंगाई को काबू में लाए जिससे देश की जनता सबसे ज्यादा परेशान और हताश है.. देश की अर्थव्यवस्था जो बिल्कुल जर्जर हालत में है उसे पटरी पर लाए ताकि आम जनता को थोड़ी राहत महसूस हो.

 

 

मोदी देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को कैसे सुधारेंगे इसकी योजना उन्हें बनानी पड़ेगी ताकि फिर से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके और विदेशी निवेशकों का हमारे अर्थव्यवस्था पर विश्वास बढ़े और वो देश में निवेश करने के लिए उत्साहित हो. उसके बाद जो दूसरी सबसे बड़ी समस्या है वो है बढ़ती जनसंख्या और घटता रोजगार.

 

हमारा देश विश्व में सबसे युवा देश है मतलब हमारे देश की अधिकतर जनता नौजवान है लेकिन अच्छी शिक्षा के बाद भी उसके पास रोजगार नहीं है. मोदी ने अपने भाषणों में युवाओं को नौकरी देने का वादा भी किया है... अब समय आ गया है कि वो देश में अधिक से अधिक रोजगार सृजन पर ध्यान दें. इसके लिए सबसे पहले उन्हें भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाने पडेंगे. इसके साथ ही नरेंद्र मोदी के लिए ये भी चुनौती है कि वो कैसे देश के संघीय ढांचे को मजबूत करेंगे और देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकारों से समन्वय बनाकर जनकल्याण के लिए बनाई गई परियोजनाओं को वहां लागू करवाएंगे क्योंकि हमने देखा है कि केंद्र सरकार के कई योजनाओं और कानून को अलग-अलग पार्टियों की राज्य सरकारें अपने प्रदेश में लागू नहीं करती जिसका नुकसान सिर्फ और सिर्फ प्रदेश की जनता को होता है. मोदी को बिहार, यूपी, ओडिशा जैसे राज्यों पर विशेष ध्यान देना होगा जो आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े हुए है. हर राज्य में विकास का एक ही मॉडल लागू नहीं हो सकता उन्हें इस बात का ध्यान रखना पडेगा, क्योंकि अलग अलग राज्यों की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां अलग- अलग होती है.

 

मोदी के लिए चुनौती यहीं खत्म नहीं होती मोदी को देश में बढ़ रहे नक्सलवाद को भी काबू में लाना होगा जो धीरे-धीर देश के हर राज्य में अपनी जड़े जमा रहा है. देश के आतंरिक सुरक्षा के लिए ये सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. इसके अलावा मोदी को अपनी नीतियों और कार्यक्रमों से देश के अल्पसंख्यक समुदायों और मुस्लिमों को यह विश्वास दिलाना होगा कि उनके शासनकाल में भी वो सुरक्षित हैं और उनके विकास पर भी उतना ही ध्यान दिया जाएगा जितना की अन्य लोगों पर और गुजरात में हुए दंगे जैसा दंगा देश के किसी कोने में नहीं दोहराया जाएगा.

 

ये तो मोदी के लिए आंतरिक चुनौतियां है..अब बात करते है देश की बाह्य चुनौतियां की... देश की बदकिस्मती है कि हमारे दो पड़ोसी पाकिस्तान और चीन शायद ये नहीं चाहते कि हमारा देश सुख और समृद्धि से विकास के पथ पर आगे बढ़े. पाकिस्तान लगातार जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और आतंकवादियों को देश में अशांति और अस्थिरता फैलाने के लिए प्रोत्साहन दे रहा है और उनका पोषण कर रहा है. नरेंद्र मोदी के लिए यह जरूरी है कि वो विदेश नीति में नीतिगत बदलाव लाकर कड़े शब्दों में यह संदेश दें कि अब यह किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मोदी को पड़ोसी देश बंगलादेश से लगातार आ रहे शरणार्थियों के मामले को भी सुलझाना होगा जो देश के सीमावर्ती राज्यों में गैर कानूनी रूप से आकर रह रहे है और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं. यह समस्या असम में अपने चरम पर पहुंच चुका है. मोदी इसको जितनी जल्दी सुलझा लेंगे देश और असम के आवाम के लिए उतना ही अच्छा होगा.

 

हमारा पड़ोसी देश चीन लगातार हमारे साथ सीमा विवाद में उलझा रहता है. चीन लगातार अरूणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर कब्जा करके उस पर अपना दावा पेश करता है. मोदी के लिए ये भी एक चुनौती है कि राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से वो इस मामले को सुलझायें और हमारे दोनों पड़ोसी देश से दोस्ताना संबंध भी बनाए.

नरेंद्र मोदी से इस देश के आम लोगों और खासकर युवाओं को बहुत उम्मीद है कि वो उनके लिए कुछ अच्छा जरूर करेंगे और ये कुछ दिनों में हमें भी पता चल ही जाएगा. मोदी अगर अगले पांच साल में इन सभी चुनौतियों पर खरे उतरते है तो निश्चित रूप से देश में अच्छे दिन आ जाएंगे.

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