क्या मोदी की चमक फीकी पड़ रही हैं?

By: | Last Updated: Wednesday, 1 January 2014 2:20 PM

नई दिल्ली: दिल्ली की जनता के दिल में अपनी जगह बना कर दिल्ली की सत्ता तक पहुंच कर केजरीवाल ने विपक्षी पार्टियों की परेशानी बड़ा दी हैं. विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही 48 घंटों में बिजली और पानी पर दो बड़े फैसले ले कर अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी खेमें में खलबली मचा दी है . विपक्षी पार्टियां खास कर बीजेपी के खेमे में ज्यादा ही हलचल है .

 

इन फैसलों पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग पर इस परेशानी का ज़िक्र किया हैं. बीजेपी के अंदर इस समय कांग्रेस से ज्यादा परेशानी आम आदमी पार्टी को लेकर हैं. बीजेपी को डर है कि कहीं लोकसभा चुनाव में केजरीवाल उनकी राह का रोड़ा ना बन जाएं . डर होना लाजिमी भी है . केजरीवाल ने भी कहा कि वो तो आए ही हैं बीजेपी और कांग्रेस को राजनीति सिखाने.,

 

बीजेपी को डर है कि जिस तरह से केजरीवाल ने दिल्ली में उनका खेल खराब किया है उसी तरह लोकसभा चुनाव में भी कर सकते हैं . लोकसभा की ऐसी कुल 131 सीटें हैं जहां केजरीवाल कांग्रेस विरोधी वोटों का बंटवारा कर सकते हैं .

 

लोकसभा की कुल 543 सीटों में से 200 ऐसी सीटें हैं जहां शहरी या अर्धशहरी वोटरों का प्रभाव है और इन इलाकों में केजरीवाल लोकप्रिय माने जाते हैं .

 

नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने चुनाव प्रचार प्रमुख की जिम्मेदारी जून में दी और सितंबर में उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया. मोदी ने अपनी रणनीति में सोशल मीडिया को शामिल किया. जहां पर मोदी की युवाओं पर अच्छी पकड़ मानी जाती रही हैं. लेकिन केजरीवाल यहां भी मोदी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. सोशल मीडिया में आम आदमी पार्ट को युवाओं का अच्छा समर्थन मिल रहा हैं.

 

दिल्ली के नतीजे आने से पहले टीवी और अखबार में मोदी और उनके भाषणों को खूब जगह मिलती थी. लेकिन दिल्ली में सत्ता का ताज पहनने के बाद केजरीवाल अब टीवी और अखबार की सुर्खियां बनने में भी मोदी से पीछे नहीं हैं.

 

सड़क पर अगर बीजेपी के कार्यकर्ता उतरते हैं तो केजरीवाल सड़क के सिकंदर माने जाते हैं. केजरीवाल जैसे चंदा मांगते हैं उसकी देखादेखी बीजेपी ने वन वोट वन नोट का नारा दिया है.

 

जहां तक नरेंद्र मोदी के प्रचार का तरीका है तो वो जून से लेकर अब तक एक जैसा ही है यानी कि कांग्रेस के खिलाफ आग उगलना. लेकिन केजरीवाल भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ आग उगलने का साथ जनता के ज़ख्मों पर मरहम भी लगाते हैं.

 

अब ऐसे में सवा सौ सीटों पर बीजेपी बनाम कांग्रेस की सीधी लड़ाई को केजरीवाल त्रिकोणीय लड़ाई में बदल सकते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मोदी को किसी नए आइडिया के साथ आना पड़ेगा?

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