क्या सुब्रत राय अब गिरफ्तार होंगे ?

By: | Last Updated: Wednesday, 26 February 2014 1:25 PM
क्या सुब्रत राय अब गिरफ्तार होंगे ?

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रूख अपनाते हुए सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया. अब देखना ये है कि पुलिस सहारा श्री को गिरफ्तार करती है या नहीं. सूत्रों के मुताबिक सुब्रत को अब भी उम्मीद है कि वो इस मामले से साफ बच निकलने में सफल हो जायेंगे. मामले कि अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी. वहीँ कानून के जानकारों के मुताबिक इस बार होली सुब्रत के लिए काली होने वाली है.

 

बुधवार को सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट में पेश होना था, लेकिन वो नहीं आए, बल्कि उनके वकील जेठमलानी ने कोर्ट में एक प्रार्थनापत्र पेश किया जिसमें कहा गया था कि सुब्रत रॉय अपनी बीमार मां की देखभाल कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पेशी से छूट प्रदान की जाए. कोर्ट ने सुब्रत रॉय के पेश न हो सकने की जेठमलानी की ये दलील दरकिनार कर दी और गैर जमानती वारंट जारी कर दिया. इससे पहले मंगलवार को जस्टिस के. एस. राधाकृष्णन और जस्टिस जे. एस. खेहर ने कहा था, ‘इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ही नहीं, जजों और वकीलों की सत्यनिष्ठा भी जुड़ी हुई है. कहा जा रहा है कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हो रहा है. हम रिटायर हो जाएंगे, लेकिन हर हाल में ये सुनिश्चित करेंगे कि कोर्ट के आदेश का पालन हो. सुप्रीम कोर्ट ने सहारा से निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए मार्केट रेग्युलेटर सेबी के पास 25,000 करोड़ रुपए जमा कराने का आदेश दिया था.

 

सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के तहत सहारा को सेबी के जरिए ही निवेशकों को पैसा वापस करना है. इस व्यवस्था के तहत सहारा ने अबतक करीब 5,206 करोड़ रुपये ही सेबी के पास जमा कराए हैं. सहारा ने कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा है कि उसने निवेशकों को बाकी बकाया कैश में चुका दिया है. लेकिन सेबी ने कंपनी के इस दावे को खारिज कर दिया है. सेबी ने कोर्ट को बताया कि सहारा समूह ने इस रकम के बारे में अपनी फर्मों के बैंक स्टेटमेन्ट नहीं दिए हैं. इसपर सहारा ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि उसने निवेशकों को सारी रकम  कैश में चुकाई है इसलिए कहीं कोई बैंक स्टेटमेंट नहीं है.

 

 सहारा के जवाब से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया कि 20 हजार करोड रुपए से ज्यादा की इतनी बड़ी रकम वो कहां से लाए, इसके स्रोत का खुलासा करें. इस पर सहारा ने इस बड़ी रकम के स्रोत का खुलासा करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने इसपर सहारा को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, ‘ये मत सोचिए कि कोर्ट असहाय है. हम सीबीआई और कंपनियों के पंजीयक से आपके खिलाफ जांच करने के लिए कह सकते हैं. हम असहाय नहीं है. यदि आप नहीं बतायेंगे तो हम धन के स्रोत का पता लगाएंगे.’ 

 

आर्थिक जगत में रुपयों के जादूगर के तौर पर मशहूर सुब्रत रॉय सहारा 10 जून-1948 को अररिया जिले में पैदा हुए थे. यूपी सरकार के एक अदने से कर्मचारी के बेटे सुब्रत राय ने अपने दोस्तों के साथ 1978 में गोरखपुर में सहारा नाम की चिट-फंड फर्म बनाई और जल्दी ही अपने भाई जयब्रत राय समेत ज्यादातर रिश्तेदारों को खपाकर उसे कंपनी का रूप दे दिया. उस वक्त देश में मौजूद नान-बैंकिंग की एकलौती और निर्विवाद कम्पनी पियरलेस के तौर-तरीकों की नकल कर सहारा चिट-फंड कम्पनी ने जनता से पैसा उगाहना शुरू कर दिया. कंपनी ने निवेशकों से तीन साल में रकम दोगुनी करने का वायदा किया.

 

इस वायदे ने काम किया और देखते ही देखते पैसों का पहाड़ खड़ा होने लगा. पैसा आया तो सुब्रत रॉय ने इसे प्रचार में झोंक दिया. मुख्य शहरों में सहारा की विशाल इमारतें बनवाई गईं, क्रिकेट-फिल्म स्टार्स और राजनेताओं को रिझाने के लिए बड़े और भव्य आयोजन किए गए. इन सबके पीछे रणनीति ये थी कि सहारा की चर्चा जितनी ज्यादा होगी, कंपनी को निवेशकों से उतना ही ज्यादा पैसा मिलेगा.

 

सहारा इंडिया के सपनों को अचानक मानो पंख ही लग गये. जल्दी ही एयर-सहारा के नाम वाले हवाईजहाज आसमान में दिखने लगे लेकिन इसके जहाज जल्दी ही जमीन पर खड़े हो गये और यह एयर कम्पनी बिक गई. सहारा रियल एस्टेस से लेकर, मीडिया, वित्त, सूचना प्रौधोगिकी, निर्माण, ख़ुदरा व्यापार में मौजूद है.

 

भारतीय क्रिकेट टीम को प्रायोजित करने के साथ ही सहारा ने विजय माल्या वाली फार्मूला वन टीम पर 500 करोड़ रूपये मूल्य का 42-5  प्रतिशत हिस्सा खरीद लिया. सहारा आईपीएल में पुणे वारियर्स टीम की भी मालिक है. साथ ही सहारा भारतीय हॉकी टीम और महिला क्रिकेट टीम की प्रायोजक भी है. भरपूर प्रचार से खर्च बेहिसाब हो रहा था, जबकि उगाही की दर घटती जा रही थी.

 

ऐसे में सहारा की रियल इस्टेट से जुड़ी दो कम्पनियों सहारा कमॉडिटी सर्विसेज कार्पोरेशन लिमिटेड (एससीएससीएल, जिसका नाम पहले सहारा इंडिया रियल एस्टेट कार्पोरेशन लिमिटेड था) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (एसएचआइसीएल) से पूरी तरह परिवर्तनीय डिबेंचरों (ओएफसीडी) से हजारों हजार करोड़ रूपया उगाह लिया. सेबी का दावा है कि सहारा ने इसमें कुल 24,029 करोड़ रूपया उगाहा था. सेबी का कहना था कि यह गैरकानूनी उगाही है. नवंबर- 2010 को सेबी के फैसले के बाद सुब्रत राय ने बयान जारी कर दावा किया कि सहारा समूह के पास 30 जून-10 तक 1,09,224 करोड़ रूपये की संपत्तियां हैं.

 

सेबी के आदेश पर सहारा ने अखबारों-चैनलों में बेहिसाब विज्ञापन जारी करते हुए ऐलान किया कि वह वक्तशुदा समय से 6 महीना पहले ही सारे भुगतान कर देगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. और मामला सुप्रीम कोर्ट में आ गया. नवंबर, 2010 में सेबी ने एक अंतरिम आदेश में सहारा समूह की कंपनियों एससीएससीएल और एसएचआइसीएल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए और सुब्रत राय, वंदना भार्गव, रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी सरीखे प्रमोटरों को जनता से पैसा उगाहने से रोक दिया.

 

सुप्रीम कोर्ट ने सेबी से ये भी पूछा है कि सहारा अगर निवेशकों का पैसा वापस नहीं कर पा रहा है तो उसकी संपत्ति जब्त क्यों नहीं कर ली जाती? इस पर कार्रवाई करते हुए सेबी ने सहारा समूह की सहारा हाउसिंग इवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड के बैंक खातों पर रोक और उसकी संपत्ति की ज़ब्ती के हुक्म जारी कर दिए. सेबी ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रतो राय और तीन अन्य निदेशकों के बैंक खातों और संपत्ति के लिए भी इसी तरह के आदेश जारी किए हैं.

 

बेंच ने पिछली सुनवाई में कहा था, ‘आप पेमेंट नहीं कर रहे हैं और न ही सेबी को रिकवरी करने दे रहे हैं. अवमानना करने वालों को कोर्ट में बुलाया जाए. हम उनको बताएंगे कि उनको कहां होना चाहिए.’ कोर्ट ने सहारा को निवेशकों को मूल पर 15 प्रतिशत का ब्याज देने का भी आदेश दे रखा है. कुल निवेशकों की संख्या 2 करोड़ 20 लाख है. सुब्रत रॉय ने छोटे निवेशकों की जेब से पैसा निकालने के लिए फिल्म स्टार्स, क्रिकेट हस्तियों और बड़े नेताओं का जो इंद्रजाल रचा था, वो अब बिखर चुका है. सहारा की साख मुश्किल में है, कंपनी अब छोटे निवेशकों से पैसे की उगाही नहीं कर सकती और इसके कर्ताधर्ता सुब्रत रॉय सहारा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. 

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