गॉर्ड पार्टिकल की खोज में भारतीय का भी योगदान

गॉर्ड पार्टिकल की खोज में भारतीय का भी योगदान

By: | Updated: 04 Jul 2012 05:31 AM


नई दिल्ली: स्विट्ज़रलैंड
में मौजूद दुनिया की सबसे
बड़ी प्रयोगशाला सर्न में
पिछले 10 साल से गॉड पार्टिकिल
की खोज चल रही थी.




गॉड पार्टिकिल की इस खोज में
भारतीय मूल की महिला
वैज्ञानिक डॉक्टर मीनाक्षी
नारायण का अहम योगदान है.




डॉक्टर मीनाक्षी नारायण
अमेरिका की ब्राउन
यूनिवर्सिटी में एसोसिएट
प्रोफेसर हैं. वो गोरखपुर की
रहने वाली हैं.




डॉ. मीनाक्षी नारायण ने फर्मी
लैब में 1995 में परमाणु के
नाभिक में मौजूद प्रोटॉन के
भीतर सिंगल टॉप क्वार्क की
खोज की थी.




डॉक्टर मीनाक्षी नारायण ने
ये साबित किया है कि परमाणु
में वजन डालने का काम गॉड
पार्टिकिल ही करता है.




गॉड पार्टिकिल को वैज्ञानिक
भाषा में हिग्स-बोसान कहते
हैं.




गॉड पार्टिकल को हिग्स बोसान
नाम इसलिए दिया गया क्योंकि
पहली बार 1964 में पीटर हिग्स
नाम के वैज्ञाविक ने ऐसे किसी
कण की मौजूदगी की संभावना
जाहिर की थी.




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