घोषणापत्र: अजय राय ने कहा- ना चायवाला, ना पानवाला, यहां चलेगा बनारस वाला

By: | Last Updated: Thursday, 24 April 2014 3:32 PM
घोषणापत्र: अजय राय ने कहा- ना चायवाला, ना पानवाला, यहां चलेगा बनारस वाला

नई दिल्ली. एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम घोषणापत्र में तीखे सवालों के जवाब दिये हैं कांग्रेस के वाराणसी से उम्मीदवार अजय राय.

 

आपको वोट क्यों दें?

बनारस के लोगों को जरूरत है कोई दिल्ली बनारस का जाए. यहां बार बार बाहरी लोग थोप दिये जाते हैं. यहां अबकी बार कोई ना चाय वाला ना पान वाला चलेगा इस बार केवल बनारस वाला.

 

सवाल. वाराणसी के चुनाव में स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा भी छाया हुआ है लेकिन सच ये भी है कि स्थानीय नेताओं ने भी शहर का भला नहीं किया है. शहर की सड़कों की हालत खस्ता है…ट्रैफिक का बुरा हाल है. सवाल ये है कि वाराणसी को किसने बर्बाद किया ?

 

उत्तर. बनारस को बर्बाद बीजेपी के लोगों ने किया है. मैंने पिंडरा के अंदर साबित किया है. वही वाराणसी में करूंगा. काम करने वाला ब्यक्ति होना चाहिए. यदि जनता मौका दे देगी तो हम दिखा देंगे कि काम कैसे होता है. यहां के सांसद की जिम्मेदारी बनती थी कि वाराणसी के नाम पर योजनाएं बनाएं और काम कराते.

 

बनारस की जनता से मैं सीधे सीधे कहना चाहता हूं कि आप इनके झांसे में ना आइएगा. आप सोच समझकर निर्णय लें. जुटाई गई भीड़ से नामांकन नहीं होता है. जो वाराणसी का होगा वही काम करेगा.

 

सवाल. अजय राय को मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने उतार दिया है कि तब बीजेपी एके 47 के बहाने अजय राय और कांग्रेस पर निशाना लगा रही है. AK-47 का सच क्या है ?

 

उत्तर. यह बिहार सरकार का मामला था. रिपोर्ट कहा भेजना है. उस वक्त बिहार के डीजीपी कहां थे. अगर कार्रवाई उस वक्त क्यों नहीं हुई. जब मैं इनकी सरकार में मंत्री था तो ये क्यों नहीं कार्रवाई किये. ये सरासर मनगढंत आरोप है.

 

अमित शाह अपने उपर झांके. जो आदमी गुजरात से तड़ीपार हैं वह बोल रहे हैं. जब मैं बीजेपी छोड़ा और निर्दलीय जीता तो फिर लगातार मुझ पर मुकदमे दर्ज किये गये.

 

सवाल. बड़े नेताओं ने आपको फंसा दिया ?

 

उत्तर. नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है. हमारे नेताओं की इच्छा पहले से ही थी. पार्टी की इच्छा थी कि बनारस वाला ही लड़ेगा. ऐसा पहले ही मुझे संकेत पार्टी ने दे दिया था. मैं यहां हर गलियों से वाकिफ हूं.

 

बीजेपी के लोग कभी अपने लोगों से सगे नहीं हुए. बनारस के लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं काम करने वाला इंसान हूं.

 

काशी के लोगों का साथ रहेगा तो चुनाव जीत जाउंगा. मेरे नेताओं ने मुझे इसलिए चुना क्योंकि मैं बनारसे के कण कण से बाकिफ हूं. जो भी ब्यक्ति बाहर का होगा वह वाराणसी का काम नहीं कर पाएगा. मुरली मनोहर जोशी से वाफिफ है जनता.

 

बीजेपी के नेता जनता का विश्वास नहीं जीते हैं. हर बार अपना क्षेत्र छोड़ देते हैं. बीजेपी वाले केवल दुष्प्रचार करने में माहिर हैं.

 

केजरीवाल और मोदी का एजेंडा कभी वाराणसी नहीं रहा है. केजरीवाल कहते हैं कि वह मोदी के खिलाफ लड़ेंगे तो मोदी इसलिए लड़ रहे हैं कि बिहार और पूर्वांचल के सीटों पर असर पड़ेगा.

 

मेरा जन्म वाराणसी में हुआ है. मैं वाराणसी के लिए लिए काम किया हूं और आगे भी करुंगा.

 

जो लोग स्थानीय रहे वह जनता के साथ खड़ा रहे. वाराणसी के बाहरी आए और जीते फिर चले गये.

 

केजरीवाल गंगा नहाते हैं. फोटो छपती है. दर्शन करते हैं फोटो छपती है.

 

मुरली मनोहर जोशी टिहरी डैम के चेयरमैन थे. डैम बनने के बाद गंगा मैली हो गई. गंगा के मैली होने के सबसे बड़े जिम्मेदार जोशी हैं.

 

काशी की धरती पर जितने भी आंदोलन हुए हैं. अजय राय ने हमेशा बढ़चढ़कर हिस्सा लिया है. यदि जनता ने भरोसा किया तो मैं गंगा मैया के लिए जितना हो सकता है काम करूंगा.

 

वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट से विधायक अजय राय आज सुर्खियों में हैं. क्योंकि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने उन्हें बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारा है..केजरीवाल भी वाराणसी से ही मैदान में हैं.

 

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में अजय राय को बीजेपी से टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन बीजेपी ने मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी से उतारा. नाराज होकर अजय राय समाजावादी पार्टी के टिकट पर वाराणसी के अखाड़े में उतर गए . करीब 18 फीसदी वोट मिले और तीसरे नंबर पर रहे . 

 

1996 में अजय राय का नाम पहली बार सुर्खियों में तब आया जब उन्होंने सीपीएम के नौ बार के विधायक रहे रुदल को चार सौ वोटों से हराकर जीत हासिल की .

 

45 साल के अजय राय साल 2002 में बीजेपी-बीएसपी की सरकार में मंत्री भी रहे. 2002 और 2007 में भी उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए वो चुने गए. 2009 में अजय राय लोकसभा चुनाव हारे जिसके बाद उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दिया. 2012 में कांग्रेस के टिकट पर पिंडरा से चुनाव लड़ा और लगातार पांचवीं बार विधायक बने.

 

अजय राय को वाराणसी में बाहुबली नेता कहा जाता है. अपने इलाके में अजय राय की छवि भी रॉबिन हुड वाली है . चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक अजय राय पर नौ मामले चल रहे हैं जिसमें हत्या की कोशिश से जुड़ा भी एक केस है. हाल ही में बीजेपी महासचिव अमित शाह ने अजय राय पर एके 47 राइफल के काराबोर का आरोप लगाया था.

 

बताया जा रहा है कि अजय राय का नाम तय होने में प्रियंका गांधी की अहम भूमिका रही है.

 

कभी बीजेपी का बाहुबली नेता रहे अजय राय आज बीजेपी के सबसे बड़े नेता को चुनौती दे रहे हैं. अजय राय पांच बार विधायक रह चुके हैं ऐसे में कोई भी उन्हें हल्के में लेने की सोच भी नहीं सकता . खुद मोदी भी नहीं.