चुनावी बिसात पर कांग्रेस ने खेला 'वन रैंक-वन पेंशन' का ट्रंप कार्ड

By: | Last Updated: Monday, 17 February 2014 1:08 PM

1997 में कर्नल पद से रिटायर हुए प्रेमशंकर जोशी को हर महीने 25,050 रुपये की पेंशन मिलती है. जबकि 1 जनवरी, 2006 के बाद इसी पद से रिटायर होने वाले किसी भी कर्नल के बैंक खाते में हर महीने पेंशन के करीब 35,841 रुपये आते हैं. ये कोई एक मामला नहीं है. एक रैंक और एकसमान सेवा अवधि के बावजूद रिटायर फौजियों की पेंशन ऐसी विसंगतियों से भरी पड़ी है.

 

भावनात्मक रूप से ये काफी तकलीफदेह है. लंबे वक्त से केंद्र सरकार को ये बात समझ ही नहीं आ रही थी कि 2006 से पहले मेजर जनरल पद से रिटायर हुए फौजी को 26,700 रुपये की पेंशन मिलती है. जबकि 2006 के बाद रिटायर उससे जूनियर रैंक के अधिकारी की पेंशन 9000 रुपये ज्यादा है. ‘एक रैंक लेकिन असमान पेंशन’ का ये मामला केवल फौजी अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सिपाही, नायक और हवलदार रैंक के फौजी भी इसके शिकार रहे हैं.

 

देश में हर साल करीब 65,000 फौजी रिटायर होते हैं और एक अनुमान के मुताबिक अभी देश में 25 लाख एक्स सर्विसमेन हैं. रिटायर होने वाला हर फौजी ‘एक रैंक लेकिन असमान पेंशन’ की नाइंसाफी झेलने को मजबूर है. 30 साल पहले रिटायर्ड फौजियों ने एक्स सर्विसमेन एसोसिएशन बना कर सरकार से ‘वन रैंक-वन पेंशन’ की मांग की थी.

 

सरकार के लगातार टालू रवैये से तंग आकर 2008 में इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट (आइएसएम) नामक संगठन बनाकर रिटायर्ड फौजियों ने संघर्ष तेज कर दिया. 2009 में फौजियों ने क्रमिक भूख हड़ताल करते हुए राष्ट्रपति को हजारों मैडल वापस किए थे. इतना ही नहीं, डेढ़ लाख पूर्व फौजियों ने अपने खून से दस्तखत वाला ज्ञापन तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को सौंपा था. पंजाब और हिमाचल की सरकारें प्रस्ताव पारित कर ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग का समर्थन कर चुकी हैं. लेकिन अब तक ‘वन रैंक-वन पेंशन’ की जायज मांग पर रिटायर्ड फौजियों को सरकार से आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला था. लेकिन चुनावी बयार और मोदी के बढ़ते असर के बीच कांग्रेस ने लाखों वोट एकमुश्त झटक लेने के अचूक फार्मूले के तहत फौजियों की ये पुरानी मांग मान ली.

 

सरकार ने अंतरिम बजट में ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना को लागू करने का ऐलान करते हुए रक्षा आवंटन में 10 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव कर दिया है। लोकसभा में अंतरिम बजट पेश करने के दौरान वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने ऐलान किया कि उन्होंने सशस्त्र सेनाओं के लिए ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना लागू करने के लिए चालू वित्तवर्ष में रक्षा पेंशन खाते के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन कर दिया है.

 

देश के लाखों रिटायर फौजियों के लिए अब तक की ये बेहतरीन खुशखबरी है. कल तक ‘वन रैंक-वन पेंशन’ की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन और रेल रोको-सड़क रोको आंदोलन की बात करने वाले रिटायर्ड फौजी अब गर्व से सीना तानकर मुस्कराते हुए कांग्रेस को वोट देंगे. जाहिर सी बात है बीजेपी के लिए ये खबर एक बड़ा झटका है. फिलहाल रिटायर्ड फौजियों के लाखों वोट थोक में झटककर कांग्रेस ने बीजेपी को मात दे दी है. बीजेपी की सरकार बनने पर इसे पूरा करने का वादा कर चुके मोदी फिलहाल इस मुदंदे पर हाथ मलते रह गए हैं.

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Web Title: चुनावी बिसात पर कांग्रेस ने खेला ‘वन रैंक-वन पेंशन’ का ट्रंप कार्ड
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