चुनाव प्रचार को गंदा कौन कर रहा है?

चुनाव प्रचार को गंदा कौन कर रहा है?

By: | Updated: 12 Apr 2014 12:38 PM
नई दिल्ली. लोकसभा के लिए हो रहा चुनाव प्रचार में अब व्यक्तिगत हमले शुरू हो गए हैं. विकास के मुद्दों को पीछे छोड़कर एक दूसरे के निजी जीवन पर उगुलियां उठनी शुरू गई हैं.

 

क्या ये चुनाव प्रचार का सही तरीका है? क्या ये हैं देश के अहम मुद्दे? क्या इन बयानों से होगा देश का विकास?

 

देश के राजनैतिक माहौल में बयानों की तल्खी हर ओर नजर आ रही है. 9 अप्रैल को बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने हलफनामा भरा और उसी के बाद से वह कांग्रेसी नेताओं को निशाने पर हैं. 11 अप्रैल को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी की वैवाहिक स्थिति पर हमला बोल दिया.

 

 

11 अप्रैल को ही बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने चेतावनी दी कि निजी जीवन पर हमले कांग्रेस को भारी पड़ सकते हैं और इस चेतावनी के 24 घंटे के अंदर ही बीजेपी नेताओं ने बयानों की तोप कांग्रेस की तरफ घुमा दी.

 

लोकतंत्र में यही माना जाता रहा है कि जब तक सार्वजनिक हित के लिए जरूरी ना हो निजी जीवन पर टिप्पणियों से परहेज किया जाना चाहिए. लेकिन मौजूदा चुनाव में मुद्दों से हटकर निजी जीवन पर हमले करने की होड़ लगी है. हालांकि इसमें कोई अपनी गलती नहीं मान रहा.

 

चुनाव प्रचार मुद्दों पर आधारित होना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा. सवाल ये है कि चुनाव प्रचार को गंदा कौन कर रहा है?

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