चुनाव बहिष्कार के ऐलान के तहत किया गया सीआरपीएफ जवानों पर हमला

By: | Last Updated: Tuesday, 11 March 2014 4:01 PM

नयी दिल्ली. छत्तीसगढ में आज नक्सलियों द्वारा 15 सुरक्षा जवानों सहित 16 लोगों की हत्या संभवत: भाकपा-माओवादी की सुनियोजित योजना के तहत की गयी है . भाकपा-माओवादी ने आगामी लोकसभा चुनावों के बहिष्कार और कांग्रेस एवं भाजपा के नेताओं को निशाना बनाने का ऐलान किया है .

 

नक्सलियों की इस घातक योजना के बारे में केन्द्र सरकार ने माओवादी हिंसा प्रभावित नौ राज्यों को सूचना दे दी थी . ये सूचना पिछले दो महीने के दौरान इन राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को दो अलग अलग पत्रों के जरिए दी गयी .

 

खुफिया खबरों के हवाले से गृह मंत्रालय ने कहा था कि एक छापे के दौरान सुरक्षाबलों ने माओवादियों के ठिकाने से एक दस्तावेज बरामद किया है, जिस पर ‘चुनाव बहिष्कार’ लिखा था और इसमें आगामी संसदीय चुनावों को बाधित करने की दोस्तरीय रणनीति का ब्यौरा था .

 

भाकपा-माओवादी ने चुनाव बहिष्कार को अमली जामा पहनाने के लिए बैठकें, रैलियां, मशाल जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम करने का फैसला किया है ताकि चुनाव बहिष्कार का संदेश पहुंचाया जा सके . साथ ही इसने अपने ही उन कैडरांे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला किया है जो चुनाव प्रक्रिया में शामिल होंगे .

 

सैन्य मोर्चे पर माओवादियों ने सुरक्षाबलों और राजनीतिकों को निशाना बनाने की साजिश रची है . भाकपा-माओवादी ने अपने कैडरों को निर्देश दिया है कि वे सभी ‘लाजिस्टिक’ इंतजाम करें . इनमें हिंसा फैलाने के उद्देश्य से विस्फोटक एकत्र करना शामिल है .

 

ऐसे ही एक पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस, भाजपा और झारखंड विकास मोर्चा के नेताओं की पहचान माओवादियों ने की है, जिन्हें निशाना बनाया जाएगा . योजना में चुनाव प्रक्रिया में शामिल वाहन, राजनीतिकों का चुनिन्दा आधार पर सफाया और अपहरण, पुलिस बलों और सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला करना शामिल है . इसके अलावा आत्मसमर्पण किये एक माओवादी नेता ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि संगठन ने लोकसभा चुनावों के दौरान सुरक्षाबलों की अपेक्षाकृत कम और व्यापक फैलाव वाली तैनाती का फायदा उठाने की योजना बनायी है .

 

खुफिया जानकारी से पता चलता है कि भाकपा-माओवादी ने चुनावी प्रक्रिया बाधित करने की खतरनाक साजिश रची है . पूर्व के अनुभवों से पता चलता है कि चुनावों के समय वे दोस्तरीय रणनीति अपनाते हैं . पहले तो वे भय का माहौल पैदा करते हैं और दूसरे लगातार चुनाव बहिष्कार अभियान चलाते हैं .

 

दोनों ही पत्रों में गृह मंत्रालय ने कहा था कि भाकपा-माओवादी छत्तीसगढ विधानसभा के लिए 2013 में हुए चुनावों में अपनी विफलता को बडा झटका मानता है और उसकी योजना लोकसभा चुनावों को निशाना बनाने की है .

 

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान माओवादी हिंसा की 109 वारदात हुइ’ जिनमें 9 लोग मारे गये . 2009 के लोकसभा चुनाव में वारदात की संख्या बढकर 125 हो गयी और 24 लोगों की जान गयी . दोनों ही चुनावों में नक्सल हिंसा से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य छत्तीसगढ, झारखंड और बिहार रहे .

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Web Title: चुनाव बहिष्कार के ऐलान के तहत किया गया सीआरपीएफ जवानों पर हमला
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