छठे चरण में 117 सीटों पर चुनाव आज, कितनी अहम है ये वोटिंग?

छठे चरण में 117 सीटों पर चुनाव आज, कितनी अहम है ये वोटिंग?

By: | Updated: 24 Apr 2014 12:58 AM
नई दिल्ली: 24 अप्रैल को देश में छठे दौर में 117 सीटों पर चुनाव हो रहा है. ये सीटें कुल 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैली हैं. देश के करीब साढ़े सोलह करोड़ मतदाता 2077 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.

 

क्यों अहम है आज की वोटिंग, आइए देखते हैं.

 

कांग्रेस का सबसे ज्यादा दांव पर

 

इन सीटों पर सबसे ज्यादा दांव पर लगा हुआ है कांग्रेस का. 117 में से आधे से ज्यादा यानी 61 सीटों पर यूपीए ने जीत हासिल की थी और यूपीए -2 की सरकार बनाने में इन 117 सीटों का अहम योगदान था एनडीए एक तिहाई सीट भी जीत नहीं पाई थी सिर्फ 32 सीटें मिली थीं अन्य के खाते में 24 सीटें आई थीं.

 

तमिलनाडु में सभी 39 सीटों पर वोटिंग

 

2009 में तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन था और दोनों ने मिलकर 39 में से 27 सीटें जीती थीं जबकि एनडीए को एक भी सीट नहीं मिली थी. एआईएडीएमके गठबंधन के खाते में 12 सीट आई थीं. मौजूदा चुनाव में कांग्रेस से तमिलनाडु के किसी छोटे से दल का भी गठबंधन नहीं है. डीएमके और एआईएडीएमके को बीजेपी 6 दलों का गठबंधऩ बनाकर चुनौती दे रही है. जिसमें अभिनेता से नेता बना विजयकांत की डीएमडीके और वनियार समुदाय की पीएमके भी शामिल है. इस बार बीजेपी को तमिलनाडु में खाता खुलने की उम्मीद है.

 

महाराष्ट्र में 19 सीटों पर मुकाबला



महाराष्ट्र में ये आखिरी दौर का मतदान है. मुंबई की सभी 6 सीटों पर जनता अपना फैसला सुनाएगी. महाराष्ट्र की जिन 19 सीटों पर मुकाबला हो रहा है उसमें से 2009 में 10 पर यूपीए ने जीत हासिल की थीं जबकि 8 पर एनडीए ने बाजी मारी थी. मुंबई की सभी 6 सीटों पर यूपीए ने जीत हासिल की थी. मुंबई में राजनैतिक हालात तो नहीं बदले हैं लेकिन एनडीए को इस बार मोदी की लहर से उम्मीद है जबकि कांग्रेस के साथ महाराष्ट्र में साख बचाने की चुनौती है.

 

मुलायम सिंह की साख दांव पर

 

उत्तर प्रदेश की 12 सीटों पर वोट डाले जाने हैं. इन 12 सीटों में से सबसे ज्यादा दांव पर लगा है मुलायम सिंह यादव का. इनमें से मुलायम के गढ़ मैनपुरी, इटावा और कन्नौज सीट पर भी वोटिंग होनी है. कन्नौज से डिंपल यादव उम्मीदवार हैं जबकि मैनपुरी से खुद मुलायम खड़े हुए हैँ. वहीं बीजेपी ने यूपी से काफी उम्मीदें लगाई हुई हैं हालांकि 2009 में बीजेपी अपने बूते सिर्फ एक सीट जीत पाई थी तब एनडीए का हिस्सा रही आरएलडी ने दो सीटें जीती थीं. इस बार आरएलडी कांग्रेसे के साथ है. केंद्रीय मंत्री कांग्रेस के सलमान खुर्शीद की किस्मत का फैसला इसी दौर में होना है.

 

एमपी में 10 सीटें दांव पर

 

मध्य प्रदेश में भी आखिरी दौर का चुनाव है और 10 सीटों का फैसला होगा दिलचस्प ये है कि बीजेपी के इस गढ़ में कांग्रेस ने साल 2009 में 10 में से 6 सीटें जीती थीं अब कांग्रेस को एमपी से उम्मीद होगी वहीं बीजेपी ने इन सीटों पर झंडा फहराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. इसी दौर में सुषमा स्वराज की किस्मत का फैसला होना है जो विदिशा से लड़ रही हैं.

 

कांग्रेस के राह आसान नहीं

 

इसके अलावा राजस्थान की पांच सीटों का फैसला होना है जिसमें से चार पिछली बार कांग्रेस ने जीती थीं पश्चिम बंगाल की 6 सीटें दांव पर हैं जिनमें से यूपीए ने पिछली बार 5 जीती थीं. लेकिन इस बार बीजेपी को मोदी की लहर के अलावा पश्चिम बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस के गठबंधन के टूटने से भी उम्मीद है.

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