छत्तीसगढ़: कांग्रेस-भाजपा को सता रहा अंतर्कलह का खतरा

छत्तीसगढ़: कांग्रेस-भाजपा को सता रहा अंतर्कलह का खतरा

By: | Updated: 25 Mar 2014 08:17 AM

रायपुर: छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव टिकटों का बंटवारा होते ही दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भितरघात व अंतर्कलह की चिंता सताने लगी है. भाजपा में टिकट के दावेदार रहे हारे हुए मंत्रियों-विधायकों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है. वहीं कांग्रेस में एकता दिखाने की पुरजोर कोशिशों के बावजूद गुटीय संघर्ष जारी है. दोनों पार्टियों में अंतर्कलह का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ रहा है. अब जबकि लगभग सभी लोकसभा क्षेत्रों में तस्वीर साफ हो गई है. अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों का विरोध पार्टी के अंदर ही होने लगा है.

 

रायपुर से भाजपा ने छह बार के सांसद रमेश बैस को फिर से उम्मीदवार बनाया है. उनके विरोधी उन पर निष्क्रियता और परिवारवाद के आरोप लगाते रहे हैं. वहीं कांग्रेस अभी तक प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है. कांग्रेस में टिकट को लेकर ही खींचतान जारी है. फिलहाल कांग्रेस ने घोषणा के बाद भी छाया वर्मा का टिकट रोक रखा है.

 

बिलासपुर में कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी व भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष करुणा शुक्ला को टिकट दिया तो नाराजगी खुलकर सामने आ गई. कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अरुण तिवारी इस्तीफा दे चुके हैं. भाजपा में नए चेहरे लखन साहू के सामने भी कम दिक्कतें नहीं हैं. यहां भाजपा से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सवन्नी भी दावेदार थे. ऐसे में उनके सामने मुसीबत कम नहीं है.

 

राजनांदगांव से रमन सिंह के बेटे अभिषेक को टिकट दिया गया है. टिकट से वंचित वर्तमान सांसद मधुसूदन यादव पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में खड़े होने की बात कह रहे हैं, लेकिन समर्थक नाराजगी जता चुके हैं. कांग्रेस ने देवव्रत सिंह की दावेदारी को दरकिनार कर लोधी समाज के कमलेश्वर वर्मा को उम्मीदवार बनाया है.

 

रायगढ़ में कांग्रेस से राजपरिवार से जुड़ी डॉ. मेनका सिंह को पहले उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन बाद में उनका टिकट काटकर पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह की बेटी आरती सिंह को प्रत्याशी घोषित किया गया है. इससे राजपरिवार नाराज हो गया है, जिसका असर देखने को मिल सकता है. भाजपा से प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय फिर से उम्मीदवार बनाए गए हैं.

 

कांकेर में भारतीय जनता पार्टी ने वर्तमान सांसद सोहन पोटाई का टिकट काटकर पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक विक्रम उसेंडी पर भरोसा जताया है. इससे असंतोष का खतरा बढ़ गया है. वहीं कांग्रेस ने 2009 का लोकसभा चुनाव हार चुकी फूलोदेवी नेताम को दोबारा मैदान में उतारा है. उन्हें कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.

 

दुर्ग में भी कांग्रेस-भाजपा में गुटीय संघर्ष साफ नजर आ रहा है. भाजपा से महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व वर्तमान सांसद सरोज पांडेय मैदान में है. राज्य सरकार में मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय का गुट उनका विरोधी रहा है. कांग्रेस उम्मीदवार ताम्रध्वज साहू को भी अंतर्कलह से जूझना पड़ रहा है. कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा का अलग खेमा है. इसी तरह पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे व उनके भाई प्रदीप चौबे व चंद्राकर गुट भी है. चौबे यहां से प्रमुख दावेदार भी थे.

 

महासमुंद में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. झीरम घाटी में नक्सली हमले में दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की पुत्री प्रतिभा पांडेय की दावेदारी पार्टी ने दरकिनार की जिससे शुक्ल खेमे में नाराजगी है. भाजपा से सांसद चंदूलाल साहू मैदान में है. भाजपा से पूर्व मंत्री चंद्रशेखर साहू भी टिकट के दावेदार थे.

 

सरगुजा में भाजपा ने पूर्व विधायक कमलभान सिंह पर दांव खेला है, लेकिन उन्हें भी पार्टी के अंतर्कलह से जूझना पड़ सकता है. 2013 का विधानसभा चुनाव हार चुके पूर्व मंत्री रामविचार नेताम और रेणुका सिंह भी टिकट के दावेदार थे. ऐसी स्थिति में दोनों नेताओं के समर्थकों द्वारा कमल भान का सहयोग करने से कन्नी काटने की आशंका है. कांग्रेस ने पूर्व विधायक रामदेव राम को टिकट दिया है. उन्हें नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव का काफी करीबी माना जाता है.

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