छत्तीसगढ़: मुफ्त में डाट्स, फिर भी बाजार में बिक रही दवा

छत्तीसगढ़: मुफ्त में डाट्स, फिर भी बाजार में बिक रही दवा

By: | Updated: 25 Mar 2014 05:12 AM

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में जानलेवा टीबी की बीमारी के उपचार, जांच, दवा आदि की सुविधा मुफ्त में उपलब्ध है. इसके बाद भी बगैर पर्ची के मेडिकल स्टोर में दवाएं धड़ल्ले से बेची जा रही हैं. इसे ध्यान में रखते हुए सिम्स के चेस्ट एवं टीबी रोग विशेषज्ञ ने शासन को बाजार में बगैर पर्ची के बिक रही दवाओं पर बैन लगाने की मांग की है.

 

सिम्स में चेस्ट और टीबी रोग विभाग के एचओडी डॉ. पुनीत भारद्वाज साफ कहते हैं कि सिम्स समेत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डाट्स की दवाएं मुफ्त में मिल रही हैं. बाजार में बगैर पर्ची की टीबी की दवाएं मिलने की जानकारी मिली है. इसे ध्यान में रखते हुए बाजार की दवा पर बैन लगाने का आग्रह किया गया है.

 

केंद्र शासन द्वारा क्षय रोग (टीबी) नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके लिए हर साल प्रदेश को करोड़ों रुपये का बजट प्रदान किया जाता है. इस बजट का उपयोग जागरूकता कार्यक्रम, दवा, उपकरण खरीदी, जांच आदि में किया जाना है. इस कार्यक्रम के तहत सिम्स में डाट्स केंद्र स्थापित किया गया है. जहां पर बलगम जांच की सुविधा के साथ मरीजों को छह माह तक मुफ्त में दवा उपलब्ध कराई जाती है.

 

इसके अलावा जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी टीबी की दवा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती है. इसके बाद भी सिम्स में केवल सालभर में इलाज के लिए 245 मरीज उपचार के लिए पहुंचे. इसमें 107 मरीजों का मेडिकल कॉलेज में ही उपचार किया जा रहा है. वहीं 138 मरीजों को अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रिफर कर दिया जा रहा है.

 

वहीं बाजार में टीबी की दवाएं धड़ल्ले से बिक रही हैं. बगैर पर्ची के भी दवाएं मिलने की शिकायत है. इसे ध्यान में रखते हुए शासन को पत्र लिखकर बाजार में बिक रही टीबी की दवा पर बैन लगाने का आग्रह किया गया है.

 

टीबी के रोगियों को 6 माह तक डाट्स की दवा दी जाती है. जिसका नियमित सेवन करने से बीमारी से छुटकारा मिल जाता है. सिम्स समेत सरकारी अस्पतालों में अक्सर सरकारी डाट्स की दवा कम पड़ जाती है. इसके लेकर अस्पताल प्रबंधन को बार-बार शासन को पत्र लिखना पड़ता है, तब जाकर दवाएं उपलब्ध कराई जाती है.

 

टीबी के रोगियों का पता कर उन्हें घर में भी दवाएं देने की व्यवस्था की गई है. इसके लिए आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य कार्यकतार्ओं आदि को डाट्स प्रोवाइडर बनाया गया है, लेकिन टीबी की बीमारी से ग्रस्त लोगों को इस सुविधा का लाभ कम ही मिल पा रहा है. इसकी सिम्स में रिपोर्टिग तक नहीं हुई है.

 

बहरहाल, आज विश्व क्षय दिवस के मौके पर प्रशासन इन कमियों को दुरुस्त करने का प्रयास करेगा इसकी उम्मीद की ही जा सकती है.

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