जानिए आखिर कैसे पकड़ा गया यासीन भटकल

By: | Last Updated: Thursday, 29 August 2013 7:58 AM

फसीह महमूद यासीन भटकल के साथ
भटकल में पढ़ा है और पुणे बम
धमाकों के बाद जो दरभंगा का
मॉड्यूल बना था उसका वो अहम
सदस्य था. फसीह ने ही सबसे
पहले यासीन की लोकेशन के बारे
में एनआईए को बताया कि वो
बिहार नेपाल बॉर्डर से काम
करता है.

बिहार से पकड़ा गया एक मौलाना
ताकिर उर्फ ताहिर ने भी इस
बात की पुष्टि की. जिसे बाद
में एनआईए ने छोड़ दिया था.

पिछले
दो महीनों से सेंट्रल एजेंसी
की टीम बॉर्डर पर थी लेकिन ये
ट्रेस नहीं हो रहा था क्योंकि
वो मोबाइल फोन का इस्तेमाल
नहीं कर रहा था, पीसीओ से फोन
करता था. जब यासीन पकड़ा गया
तब वो मुंबई और दिल्ली में
लोगों की भर्ती और विस्फोटक
जमा कर रहा था.

http://www.youtube.com/watch?v=0p9FXae-5JQ

यासीन भटकल नेपाल बॉर्डर से
गिरफ्तार

  
इंडियन
मुजाहिदीन के कुख्यात
आतंकवादी यासीन भटकल को
नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार
किया गया है. यासीन भटकल को कल
देर रात गोरखपुर से सौ
किलोमीटर दूर सोनौली बॉर्डर
से आईबी और एनआईए के ज्वाइंट
ऑपरेशन में पकड़ा गया है.

भटकल
पर देश में दो दर्जन से
ज्यादा बम धमाकों में शामिल
होने का आरोप है. दिल्ली,
मुंबई, पुणे, हैदराबाद,
बैंगलोर, सूरत, अहमदाबाद,
जयपुर धमाकों में जांच
एजेंसियों को भटकल की तलाश
थी.

यासीन भटकल पर मुंबई
पुलिस ने 10 लाख का इनाम घोषित
कर रखा था. राष्ट्रीय सुरक्षा
सलाहकार ने भटकल की
गिरफ्तारी की खबर पीएम को दी
है. भटकल को फिलहाल बिहार
पुलिस के हवाले किया गया है.

http://www.youtube.com/watch?v=0mYz_VJKz0o

भटकल पर आरोपों की फेहरिस्त

यासीन
भटकल पर देश में 50 से ज्यादा
बम धमाकों में शामिल होने का
आरोप है. जिन धमाकों में भटकल
का हाथ माना जाता है उनमें 2008
में अहमदाबाद और सूरत में हुआ
बम ब्लास्ट शामिल है.

2008
में ही जयपुर और नई दिल्ली
में हुए बम ब्लास्ट में भी
उसका हाथ माना जाता है. 2010 में
बनारस के दशाश्वमेध घाट और
बेंगलुरु के चिन्नास्वामी
स्टेडियम बम ब्लास्ट में भी
उसका हाथ माना जाता है.

2011
में पुणे के जर्मन बेकरी बम
ब्लास्ट और मुंबई बम ब्लास्ट
में भी उसका हाथ माना जाता है.
2013 में हैदराबाद और बैंगलुरू
में हुए बम धमाकों में भी
उसका हाथ था. ज्यादातर बम
धमाकों में अमोनियम
नाइट्रेट को मुहैया कराने का
काम यासीन भटकल ने ही किया था.

आरोप
है कि यासीन भटकल नेपाल के
रास्ते नकली नोटों का
कारोबार भी चलाने लगा था.

http://www.youtube.com/watch?v=5jYOMbCknfE

कौन है भटकल

यासीन भटकल
का असली नाम मोहम्मद अहमद
सीदीबप्पा है, लेकिन कर्नाटक
के भटकल कस्बे का रहने के
कारण इसे यासीन भटकल के तौर
पर ही जाना जाता है. 1973 में
जन्मा यासीन मूल रूप से
कर्नाटक के एक तटीय गांव भटकल
का रहने वाला है.

उसकी
शुरुआती शिक्षा अंजुमन हमी ए
मुसलीमीन नाम के मदरसे में
हुई थी. 1980 के दशक की शुरुआत
में वह पुणे आ गया था. भटकल
कस्बे से ही ताल्लुक रखने
वाला यासीन, इंडियन
मुजाहिदीन के संस्थापक
सदस्यों में से एक था.

यासीन
भटकल ने ही आईएम के दरभंगा
मॉड्यूल को तैयार किया था और
इस सिलसिले में काफी वक्त तक
वो दरभंगा सहित बिहार के कई
हिस्सों में रहा. यासीन भटकल
कुछ दिनों तक बिहार के दरभंगा
में हकीम बनकर छिपा रहा.

दरभंगा
में ही उसने शादी भी की. यहीं
से वो नेपाल के रास्ते नकली
नोटों का कारोबार भी चलाने
लगा था.

http://www.youtube.com/watch?v=z0QtA23-xiA

पहले निकल गया था हाथ से

यासीन
भटकल चार साल पहले कोलकाता
पुलिस के हत्थे चढ़ा था लेकिन
वो पुलिस को चकमा देकर भाग
निकला था. दिसंबर 2009 में एक
महिला की शिकायत पर नकली
नोटों के कारोबार के एक मामले
में पुलिस ने इसे गिरफ्तार
किया.

उस वक्त यासीन ने
अपना नाम कार्तिक मलिक बताया
और अपने को कोलकाता का ही
निवासी बताया था, और इसी आधार
पर चकमा देकर वो भाग निकला था.
यासीन भटकल अपने नाम बदलता
रहा है.

जनवरी 2010 में जब
उसने रांची से अपना पासपोर्ट
निकलवाने के लिए आवेदन किया
था, तो उसमें उसने अपना नाम
अंजार हुसैन लिखा था. आवेदन
पत्र में लगे यासीन के
फोटोग्राफ के आधार पर ही बाद
में कोलकाता पुलिस को अहसास
हुआ कि कितना बड़ा शिकार उनके
हाथ में आकर भी निकल गया था.

कोलकाता
पुलिस की गिरफ्त से छूटने
केबाद यासीन भटकल काफी समय तक
दरभंगा में रहा था. इस दौरान
नेपाल भी उसका आना-जाना रहा.

http://www.youtube.com/watch?v=YVBpwoRcHb0

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