जानिए क्या हैं एफडीआई के फायदे और नुकसान

By: | Last Updated: Saturday, 15 September 2012 12:28 AM

नई
दिल्ली:
कल तक जिस सरकार की
कड़े फैसले नहीं लेने पर
आलोचना हो रही थी अब उसी
मनमोहन सिंह सरकार ने एक के
बाद के कई कड़े और बड़े फैसले
लिए हैं.

विदेशी किराना
को सरकार ने मंजूरी दे दी है.
सरकार ने किराना में इक्यावन
फीसदी विदेशी निवेश को
मंजूरी दी है.

हालांकि सरकार ने पहले भी
किराना में विदेशी निवेश को
मंजूरी दी थी लेकिन ममता
बनर्जी के विरोध में कदम पीछे
खींच लिए थे.

अब भारत में
नजर आएंगे वॉलमार्ट जैसे
विदेशी किराना स्टोर
क्योंकि विदेशी किराना को
सरकार ने मंजूरी दे दी है.
केंद्र सरकार की बैठक में
किराना में 51 फीसदी विदेश
निवेश को मंजूरी दी गई.

क्या
होगा फैसले के बाद

  • इस फैसले के बाद विदेशी
    कंपनियां किराना स्टोर खोल
    सकेंगी.
  • भारतीय कंपनियों से
    साझेदारी में कारोबार
    करेंगी विदेशी कंपनियां.
  • विदेशी कंपनियां अधिकतम 51
    फीसदी हिस्सेदारी रख सकती
    हैं.
  • किसानों और उत्पादकों से
    सामान खरीदेंगी विदेशी
    कंपनियां.
  • सीधे ग्राहकों को सामान
    बेचेंगी विदेशी कंपनियां.


जिस बैठक में सरकार ने
विदेशी किराना को मंजूरी दी
उस बैठक में ममता बनर्जी की
पार्टी का कोई सदस्य शामिल
नहीं हुआ था. इसकी वजह ये है कि
ममता बनर्जी शुरू से ही
विदेशी किराना का विरोध कर
रही हैं. ममता का विरोध ही था
कि सरकार किराना में विदेश
निवेश नहीं ला पा रही थी.

ममता
के अलावा बीजेपी और लेफ्ट
पार्टियां भी विदेशी किराना
का विरोध कर रही हैं. लेकिन
तमाम विरोधों के बावजूद
विदेश किराना को सरकार ने हरी
झंडी दे ही दी.

विदेशी
किराना के पक्ष में सरकार के
तर्क

  • इससे करीब एक करोड़ लोगों को
    नौकरियां मिलेंगी
  • बाजार से बिचौलिए कम होंगे
  • बिचौलिए कम होने से महंगाई
    घटेगी
  • खुदरा कारोबार के लिए
    ढ़ांचा बनेगा
  • सामान की बर्बादी कम होगी


विदेशी किराना का विरोध
करने वालों के तर्क

  • बड़े पैमाने पर लोग
    बेरोजगार होंगे
  • छोटे दुकानदारों का रोजगार
    चौपट हो जाएगा
  • कंपनियां मनचाहे दामों पर
    सामान बेचेंगी
  • इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्चा
    जनता से वसूलेंगी
  • कंपनियां व्यापार पर कब्जा
    कर लेंगी
  • कंपनियां किसानों को सही
    दाम नहीं देंगी


अब सवाल उठता है कि किराना
में विदेशी निवेश से भारत की
किन कंपनियों को फायदा होगा.
आपको बता दें अभी भारत में
बिग बाजार, रिलायंस, मोर और
स्पेंसर जैसी कंपनियां
किराना स्टोर का कारोबार कर
रही हैं. जाहिर है किराना में
विदेशी निवेश का रास्ता
खुलने से इन कंपनियों को
फायदा होगा.

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Web Title: जानिए क्या हैं एफडीआई के फायदे और नुकसान
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