जानिए चिदंबरम के बजट में आपको क्‍या मिला?

By: | Last Updated: Thursday, 28 February 2013 9:17 PM
जानिए चिदंबरम के बजट में आपको क्‍या मिला?

नई
दिल्‍ली:
वित्त मंत्री पी
चिदंबरम ने गुरुवार को संसद
में 2013-14 का जो आम बजट पेश किया
है उसमें खास बात ये है कि बजट
में मिडिल क्लास को कोई खास
राहत नहीं मिली है. इनकम
टैक्स स्लैब में कोई बदलाव
नहीं किया गया है. हालांकि
पांच लाख सालाना आमदनी और
पहला घर खरीदने वालों को भी
राहत मिली है.

जनता को
उम्‍मीद थी कि यूपीए-2 के
आखिरी बजट में चुनाव की
सुगबुगाहट के बीच चिदंबरम
उन्हें कुछ देकर जाएंगे
लेकिन मायूसी ही हाथ लगी.
चिदंबरम ने अमीरों से लिया,
गरीबों को दिया और मिडिल
क्लास को सूखा छोड़ दिया.

अब
समझिए इस कभी खुशी, कभी गम का
चक्कर क्या है? देश में टैक्स
देने वाले 3 करोड़ 50 लाख हैं,
लेकिन चिदंबरमजी ने क्या
किया पांच लाख से कम सालाना
आय वाले 1 करोड़ 80 लाख लोगों को
टैक्स में थोड़ी छूट दे दी.

चिदंबरम
ने अमीरों से टैक्‍स लिया. वो
अमीर जो एक करोड़ से ज्यादा
कमाते हैं. उनकी संख्या देश
में है 42 हजार 800 है. लेकिन बीच
की जो तादाद है यानी 1 करोड़ 28
लाख लोगों को सरकार ने बस
झुनझुना थमा दिया. यानी टैक्स
में कोई राहत नहीं. कुछ
खुशियां और ढेर सारे गम दे गए
चिदंबरम जी.

पहले ये जान
लीजिए कि देश के 1 करोड़ 80 लाख
लोगों को क्या मिला जिनकी
सैलरी पांच लाख रुपये सालाना
से कम है.

टैक्स में 167
रुपये ही बचे 

महंगाई से
परेशान इस वर्ग को इनकम टैक्स
में साल भर में सिर्फ  2000
रुपये की राहत मिली है.

इसके
अलावा जो लोग इनकम टैक्स के
स्लैब में बदलाव की उम्मीद
लगाए बैठे थे उनकी ओर चिदंबरम
ने ध्यान भी नहीं दिया.

मौजूदा
10 , 20 और 30 फीसदी का स्लैब
बरकरार रहेगा. इसके अलावा
जिनकी सालाना आय तीन से पांच
लाख रुपये तक है उनको 2,000 की
टैक्स छूट मिलेगी. यानी महीने
में करीब 167 रुपये की बचत. 

ये
समझ लीजिए कि 167 रुपये हर
महीने कैसे बचेंगे. 2000 रुपये
की छूट एक साल में यानी 12
महीने के लिए है यानी 167 रुपये
हर महीने आपको बचेंगे.

1
करोड़ 80 लाख लोगों को 2,000 देने
का मतलब है कि चिदंबरम को हर
साल 3600 करोड़ रुपये का नुकसान
होगा. लेकिन सरकार ने अमीरों
से जो टैक्स वसूला है उससे
इसकी भरपाई का अनुमान है.

अब
ये जान लीजिए कि देश के 42 हजार
800 सुपर रिच यानी अमीरों से
क्या लिया गया जो सालाना 1
करोड़ से ज्यादा कमाते हैं.

अमीरों
पर ज्यादा टैक्स

अमीरों
को अब ज्यादा टैक्स देना
पड़ेगा. जो लोग एक करोड़
रुपये से ज्यादा कमाते हैं,
उनके टैक्स पर अब 10 फीसदी
सरचार्ज लगेगा. यानी एक करोड़
तक कमानेवाले की स्थिति जस की
तस है, लेकिन एक करोड़ से
ज्यादा यानी अगर कोई डेढ़
करोड़ साल के कमाते हैं तो
उन्हें करीब साढ़े चार लाख
रुपये का नुकसान होगा.

बाकी
जनता को क्या मिला ?

चिदंबरम
ने मिडिल क्‍लास को टैक्स में
न तो कोई छूट दी और न ही कोई
नया टैक्स का बोझ डाला. खुशी
घर खरीदने पर मिल सकती है.
शेयर बाजार में जाने पर मिल
सकती है और दुख जमीन
खरीदने-बेचने से लेकर विदेशी
कार खरीदने पर हो सकता है.

वित्त
मंत्री से उम्मीद थी कि वो
होम लोन के ब्याज पर इनकम
टैक्स छूट की सीमा डेढ़ लाख
रुपये से बढ़ाएंगे. सीमा तो
बढ़ाई गई है लेकिन पहली बार
घर के लिए लोन लेने पर ही. वो
भी एक साल के लिए.

घर की
कीमत 40 लाख से ज्यादा न हो और
लोन की अधिकतम सीमा 25 लाख
रुपये ही हो तो टैक्स में छूट
मिलेगी. जिनके पास पहले से ही
होम लोन है उन्हें पहले की ही
तरह डेढ़ लाख रुपये के ब्याज
तक ही टैक्स छूट मिलेगी.

पहली
बार घर के लिए लोन लेने वालों
को ब्याज पर एक लाख रुपये
अतिरिक्त टैक्स छूट मिलेगी.
पहले ये सीमा डेढ़ लाख रुपये
थी. यानी अप्रैल के बाद लोन
लेने वालों को ढाई लाख रुपये
तक के ब्याज पर टैक्स छूट
मिलेगी. ये छूट तभी मिलेगी तब
लोन 25 लाख रुपये तक का होगा.

बजट
में कुछ सस्ता हुआ तो बहुत
कुछ महंगा

बड़ी गाड़ियों
के साथ ही टीवी का सेट टॉप
बॉक्स महंगा हो जाएगा. विदेश
से आने वाली बाइक और गाड़ियां
महंगी हो जाएंगी. मोबाइल और
मार्बल के दाम भी बढ़ जाएंगे.
सर्विस टैक्स लगने के कारण
एसी रेस्टोंरेट में खाना
महंगा होगा.

सिगरेट भी
महंगी होगी. विदेश से आने
वाले चमड़े से बने जूते और
बैग सस्ते हो जाएंगे. विदेश
से आने वाले रेडिमेड कपड़े भी
सस्ते होंगे. आने वाले दिनों
में सीएनजी और पीएनजी गैस भी
महंगी हो जाएगी.
 
शेयर
बाजार में स्वागत है

राजीव
गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम
में दस लाख का दायरा बढ़ाकर
बारह लाख कर दिया गया है. यानी
12 लाख सालाना कमाने वाले लोग
शेयर बाजार में इस स्कीम में
पैसे लगाकर टैक्स बचा सकते
हैं.
 
प्रॉपर्टी का पंगा!
50
लाख तक की प्रॉपर्टी खरीद
बिक्री पर एक फीसदी टीडीएस
लगाने का ऐलान भी किया गया है.
सरकार इसका एलान पहले ही कर
चुकी थी और अब इसे बजट में
शामिल कर लिया गया है. राहत की
बात ये है कि खेती वाली जमीन
पर ये नियम लागू नहीं होगा.

कुल
मिलाकर चिदंबरम ने बड़ी
चालाकी से अमीरों से पैसा
लेकर गरीबों में बांटना का
फॉर्मूला पेश किया है, लेकिन
सबसे ज्यादा निराशा हाथ लगी
है मिडिल क्लास को जो हमेशा
ज्यादा उम्मीद लगाए रहता है.

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