जानें, कौन है सच्चा या झूठा, मोदी या केजरीवाल?

जानें, कौन है सच्चा या झूठा, मोदी या केजरीवाल?

By: | Updated: 27 Mar 2014 08:45 AM

नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने राजनीति में अपनी शुरुआत दूसरों पर आरोप लगाने के साथ ही की थी. गांधी परिवार शुरु से ही उनके निशाने पर रहा. इसके बाद उन्होंने अबानी बंधुओं पर आरोप लगाए. आम आदमी पार्टी ने 49 दिन तक दिल्ली में सरकार भी चलाई. इसके बाद उनके निशाने पर आगए भारतीय जनता पार्टी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और गुजरात के विकास को लेकर उनके द्वारा किये जाने वाले दावे.

 

अब सवाल यह है कि केजरीवाल ने आंकड़ों के साथ मोदी पर आरोप लगाए और मोदी सरकार ने स्पष्टीकरण और आंकड़ों के साथ उनका जवाब दिया. फिर गलत और सही कौन है? आम जनता ये कैसे जाने कि जो मोदी कह रहे हैं वो सही है या जो आरोप केजरीवाल ने लगाए क्या वो गलत हैं? सवालों के जवाब मिलना कठिन है लेकिन हम आपको अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक्स टाइम्स अखबार में दिये वे आंकड़ें बताते हैं जो जमीनी हकीकत पर हैं और मोदी व केजरीवाल दोनों के ही तथ्यों से परे हैं. किसके तथ्य हैं हकीकत के आंकड़ों से कितने करीब? कौन है झूठा या सच्चा? जानिए इस विश्लेषण में-

 

भूमि अधिग्रहण

केजरीवाल के आरोप- गुजरात सरकार ने कॉरपोरेटर्स को देने के लिए गुजरात के किसानों से जबरन जमीन छीनी.

 

गुजरात सरकार का जवाब- यह दुष्प्रचार है, किसी भी किसान से कोई जमीन जबरन नहीं ली गई, सभी को बाजार मूल्य के मुताबिक मुआवजा दिया गया.

 

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक जमीनी आंकड़े- तकनीकी तौर पर गुजरात सरकार सही है. मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेटर्स को दी गई जमीन बंजर और चराहगार वाली थी. लेकिन विवादों की कमी नहीं रही. भावनगर के मीठी विरड़ी में ग्रामीणों ने निरमा सीमेंट प्लांट लगाने से रोक दिया था. वहीं मंडल बेचाराजी क्षेत्र में स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन के खिलाफ ग्रामीण भड़क गए थे.

 

किसान आत्महत्या

केजरीवाल के आरोप- पिछले दस सालों में फसल की बरबादी की वजह से गुजरात में 5,874 किसानों ने आत्महत्या की.

 

गुजरात सरकार का जवाब- यह आरोप झूठा है. पिछले दस सालों में सिर्फ एक किसान ने फसल की बरबादी की वजह से आत्महत्या की.

 

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक जमीनी आंकड़े-  केजरीवाल के आंकड़ें जमीनी आंकड़ों के पास हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक 2003 से 2012 के बिच गुजरात में किसान और खेती करने वाले 5,302 लोगों ने आत्महत्या की. अगर इसमें 2002 भी जोड़ दें तो आत्महत्या का यह आंकड़ा 5,872 हो जाता है.

 

रिटेल में एफडीआई

केजरीवाल के आरोप- रिटेल में एफडीआई पर बीजेपी की नीतियों से छोटी किराना दुकानें खत्म हो जाएंगी.

 

गुजरात सरकार के जवाब- एक पार्टी के तौर पर बीजेपी रिटेल में एफडीआई लाने के खिलाफ है.

 

इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक जमीनी आंकड़ें- गुजरात सरकार सही कह रही है. एफडीआई पर जारी एक बुकलेट में बीजेपी का कहना है कि वह शुरु से ही मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई के विरोध में रही है.

 

लघु और मझोले उद्योगों की मुश्किलें

केजरीवाल के आरोप- मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान गुजरात में 60,000 छोटे उद्योग बंद हो गए.

 

गुजरात सरकार का आरोप- 5.1 लाख छोटे और बड़े उद्योगों में से 95 प्रतिशत अच्छी तरह काम कर रहे हैं.

 

इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक जमीनी आंकड़े- केजरीवाल काफी हद तक सही हैं, हो सकता है आंकड़े पूरी तरह से सही नहीं हों.कई छोटे और मझोले उद्योग जैसे टेक्सटाइल्स और केमिकल्स कई अलग-अलग कारणों की वजह से या तो बंद होने की कगार पर हैं या गुजरात से बाहर शिफ्ट होने वाले हैं. इसका एक मुख्य कारण हिमाचल प्रदेश और सिक्कम में टेक्सटाइल नीतियां और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर केंद्र की नीतियां भी हैं.

 

लोकसभा चुनावों के एलान के बाद मोदी के विकास  दावों को परखने और चुनाव प्रचार करने केजरीवाल जब गुजरात गए तो उन्होंने मोदी के खिलाफ ताजा और नए आरोपों को खोज निकाला. उन्हें लगा कि इन आरोपों के बाद मोदी के विकास के दावों की हवा निकल जाएगी. मंगलवार को वाराणसी में मोदी के खिलाफ उम्मीदवारी के एलान के साथ ही केजरीवाल ने बीजेपी और मोदी पर इन नए आरोपों की बौछार कर डाली. लेकिन आप द्वारा अब तक लगाए गए सभी आरोपों पर खामोश रही मोदी सरकार ने भी इसके एक दिन बाद बुधवार को इन आरोपों के जवाब के साथ ही सभी मुद्दों पर स्पष्टीकरण भी दिया.

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