जानें क्यों शीतकालीन ओलंपिक गेम्स में तिरंगे से महरूम रहेंगे भारतीय खिलाड़ी

By: | Last Updated: Friday, 10 January 2014 12:02 PM
जानें क्यों शीतकालीन ओलंपिक गेम्स में तिरंगे से महरूम रहेंगे भारतीय खिलाड़ी

रुस के शहर सोची में 7 फरवरी से शीतकालीन ओलंपिक गेम्स शुरू हो रहे हैं. भारत के चार खिलाड़ी इस आयोजन में हिस्सा लेंगे लेकिन फिर भी देश के लिए ये आयोजन ‘ठंडा’ ही रहने वाला है. वजह, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) अब भी अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (IOC)द्वारा दिए गए निलंबन के दंश को झेल रहा है, जिसका मतलब है कि ये चार खिलाड़ी भारत के झंडे तले नहीं खेल पाएंगे.

 

ओलंपिक चार्टर के मुताबिक जो देश IOC द्वारा निलंबित किए जाते हैं उनके खिलाड़ी इस तरह के आयोजनों में भाग तो ले सकते हैं लेकिन उन्हें IOC के झंडे तले खेलना पड़ता है. दुख देने वाली बात ये है कि तिरंगे तले खेलने का हक इन खिलाड़ियों से जिस चीज ने छीना है उससे आज देश का हर आम आदमी परेशान है-‘भ्रष्टाचार’.

 

दरअसल, मामला यह है कि 4 दिसंबर 2012 को IOC ने IOA को निलंबित कर दिया था क्योंकि उस समय ललित भनोट भारतीय ओलंपिक संघ के सेक्रेटरी-जनरल बनने वाले थे. हैरानी की बात ये थी कि 2010 कॉमनवेल्थ खेलों में घोटाले के आरोप से घिरे भनोट कुछ ही दिन पहले जमानत पर छूटे थे. ये सब बातें IOC को नागवार गुजरी और उसने भारतीय ओलंपिक संघ को साफ तौर पर कहा कि संघ के चुनाव निष्पक्ष तरीके से और ओलंपिक चार्टर के अनुरुप हों. लेकिन हमने उनकी बात नहीं मानी, और करीब एक साल से कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ी तिरंगे से महरुम नजर आ रहे हैं.

 

2012 में IOC ने भारत के सामने ये बात साफ कर दी थी कि खेल संघों के चुनाव में वो सरकार का किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं करेगा. साथ ही IOA से कहा गया था कि वो ओलंपिक चार्टर के हिसाब से ही चुनाव कराए, भारत ने काफी मशक्कत के बाद काम करना शुरू किया. लेकिन चुनाव के लिए उम्मीदवारों की योग्यता के मामले में पेंच फंस गया. IOC ने साफ कर दिया कि खेल संघों के सही संचालन के लिए साफ छवि के बेदाग लोगों को ही उम्मीदवार बनाए, लेकिन भारतीय संघ इसमें ना-नुकुर करता रहा.

 

वैसे जब IOA को निलंबित किया गया था तब कई लोगों ने उम्मीद जताई थी कि कम से कम अब IOA जल्द चुनाव कराएगा जो कि बेदाग छवि के लोगों को सामने लाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 9 फरवरी को IOA के चुनाव होने हैं, तो एक बात तो साफ है कि शीतकालीन ओलंपिक खेलों में आपको तिरंगा नहीं दिखेगा. एक साल के लंबे अंतराल के बाद चुनाव होंगे, आखिर इस दौरान ये संघ कर क्या रहा था.

 

अगर कोशिश की जाती तो फरवरी 2014 में होने वाले ये चुनाव जल्दी कराए जा सकते थे, लेकिन हमारे यहां हर चीज में अडंगा लगाने वाले लोग बहुत हैं.

 

कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने खेल मंत्रालय को फटकार लगाते हुए कहा था कि खेल संघों में पूर्व खिलाड़ियों की भागीदारी ज्यादा होनी चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि खेल संघों में हर कोई अपनी मनमानी चलाता है और यहां आपको मुख्यत: राजनेता ही दिखेंगे जिनका खेलों से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है.

 

ओलंपिक चार्टर के मुताबिक 70 साल से अधिक के व्यक्ति का खेल संघ में कोई काम नहीं है लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि बीजेपी नेता, 80 साल के वीके मल्होत्रा पिछले 40 साल से तीरंदाजी संघ की कुर्सी संभाले हुए हैं. ऐसे कई उदाहरण आपको मिल जाएंगे जहां खेल नियमों का पूरी तरह उल्लंघन होता है.

 

आखिर इन राजनेताओं को खेल संघ में घुसकर क्या मिलता है. भारत में खेलों की दशा को सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे क्योंकि राजनीति इन खेलों को बर्बाद कर रही है. इसी साल कॉमनवेल्थ खेल भी होने हैं, हम तो बस उम्मीद ही कर सकते हैं कि IOA के चुनाव जल्द हों और कोई भी भारतीय खिलाड़ी तिरंगे से महरूम न हो.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: जानें क्यों शीतकालीन ओलंपिक गेम्स में तिरंगे से महरूम रहेंगे भारतीय खिलाड़ी
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: ?????? ?????
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017