जासूसी कांड: मोदी सरकार के न्यायिक आयोग के दायरे में सीबीआई और दो वेब पोर्टल्स!

By: | Last Updated: Tuesday, 26 November 2013 8:08 AM
जासूसी कांड: मोदी सरकार के न्यायिक आयोग के दायरे में सीबीआई और दो वेब पोर्टल्स!

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<b>अहमदाबाद.</b>
गुजरात सरकार ने उस न्यायिक
आयोग के गठन की अधिसूचना जारी
कर दी है, जो एक युवती की
जासूसी के मामले में हुए
विवाद की जांच करने वाली है.
राज्य सरकार के विधि विभाग की
तरफ से दो पन्ने की अधिसूचना
जारी की गई है. इसके मुताबिक
न्यायिक आयोग का गठन इसलिए
किया गया है ताकि कोबरा पोस्ट
और गुलैल डॉट कॉम नामक दो वेब
साइट्स की तरफ से जारी किये
उन ऑडियो टेप्स के मसले की
जांच की जा सके, जिसे
सार्वजनिक कर ये दावा किया
गया है कि वर्ष 2009 में गुजरात
राज्य में एक युवती की लगातार
निगरानी की गई.<br /><br />आयोग के
गठन के उद्देश्यों में इस बात
का भी खुलासा किया गया है कि
इन दो वेबसाइट्स के हवाले से
मीडिया में जो खबरें छपी या
दिखाई गई हैं, वो पुलिस और
प्रशासन के मामले से जुड़ी
हैं और इसमें सच्चाई का सामने
आना सार्वजनिक हित में हैं.
अधिसूचना के मुताबिक, राज्य
सरकार इस मामले में सच्चाई
बाहर लाने के लिए कटिबद्ध है
और इसलिए कमिशन ऑफ
इन्क्वायरी एक्ट, 1952 की धारा
तीन के तहत दो सदस्यीय
न्यायिक आयोग का गठन किया गया
है, जिसकी अध्यक्षता गुजरात
हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज
सुज्ञ्नाबेन भट्ट करने वाली
हैं. इस आयोग के दूसरे सदस्य
राज्य के गृह विभाग के पूर्व
अतिरिक्त मुख्य सचिव केसी
कपूर हैं.  अधिसूचना के
मुताबिक, आयोग तीन महीने के
अंदर इस मामले में अपनी
रिपोर्ट देगा.<br /><br />अधिसूचना
में इस बात का भी खुलासा किया
गया है कि आखिर आयोग किन-किन
पहलुओं की जांच करने वाला है.
टर्म ऑफ रेफरेंस में कुल छह
मुद्दे रखे गये हैं. ये
मुद्दे इस प्रकार हैं-<br /><br />1.
संबंधित ऑडियो टेप्स की
प्रामाणिकता और वास्तविकता
सुनिश्चित करना<br />2. जिस तरह का
आरोप कोबरा पोस्ट और गुलैल
डॉट कॉम ने लगाया है और उनके
हवाले से मीडिया में जो खबरें
छपी या प्रकाशित हुई हैं,
क्या उस तरह की सुरक्षा
मुहैया कराई गई है या निगरानी
की गई है<br />3. वो क्या मुद्दे,
तथ्य, कारण और घटनाक्रम थे,
जिनकी वजह से वो कथित सुरक्षा
घेरा दिया गया या फिर निगरानी
की गई<br />4. क्या इस प्रक्रिया
के दौरान स्थापित और
अनिवार्य कानूनी प्रावधानों
का उल्लंघन हुआ या फिर किसी
शर्त को पूरा नहीं किया गया<br />5.
जिस तरह की परिस्थितियों में
चार वर्ष बाद इन ऑडियो टेप्स
को जारी किया गया, उसमें क्या
कोई साजिश मालूम होती है, और<br /><br />6.
ऐसे निष्पक्ष आधार क्या हो
सकते हैं, जिसके आधार पर किसी
महिला के लिए इस तरह की
गुपचुप सुरक्षा मुहैया कराई
जा सकती है, अगर परिस्थितियां
इस तरह की बनती हैं.<br /><br />जाहिर
है, इस अधिसूचना के मुद्दा
नंबर पांच के तहत न्यायिक
आयोग इस पहलू की विस्तार से
जांच कर सकता है कि आखिर
गुजरात के निलंबित आईपीएस
अधिकारी और इशरत जहां फर्जी
मुठभेड़ मामले के आरोपी जीएल
सिंघल ने जो ऑडियो टेप सीबीआई
को मुहैया कराये, वो कैसे उन
दो वेब पोर्टल्स के पास पहुंच
गये, जिन्होंने उनको
प्रकाशित किया. क्या ये लीक
जानबूझकर की गई, इस पहलू की
जांच भी न्यायिक आयोग करने
वाला है. जाहिर है, ऐसा करने पर
आयोग न सिर्फ दोनों
वेबसाइट्स से जुड़े लोगों से
पूछताछ कर सकता है, बल्कि
उसकी जांच के दायरे में
सीबीआई भी आ सकती है, जिसके
कब्जे में ये ऑडियो टेप्स
हैं.<br /><br />हालांकि संभावना इस
बात की है कि इस आयोग के गठन को
ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
दी जाए. राज्य में मुख्य
विपक्षी पार्टी कांग्रेस और
कई स्वयंसेवी संगठनों ने
पहले ही न्यायिक आयोग के गठन
का विरोध करना शुरु कर दिया
है. सुप्रीम कोर्ट में इस
मसले पर तीन दिसंबर को सुनवाई
होने वाली है. गौरतलब है कि इन
ऑडियो टेप्स के सार्वजनिक
होने के बाद गुजरात के
निलंबित आईएएस अधिकारी और
कच्छ जिले के पूर्व कलेक्टर
प्रदीप शर्मा ने ये आरोप
लगाया है कि जिस युवती की
जासूसी वर्ष 2009 में गुजरात
पुलिस की तरफ से की गई, उस
लड़की का संबंध राज्य के
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी
से भी है. शर्मा के मुताबिक
वर्ष 2004 में उन्होंने ही
युवती का परिचय मोदी से कराया
था, जब मोदी उस युवती के
डिजाइन किये हुए एक पार्क के
उदघाटन के सिलसिले में भुज आए
थे. हालांकि राज्य में
सत्तारुढ़ बीजेपी ने शर्मा
के आरोपों का खंडन किया है और
कहा है कि वो कांग्रेस के
एजेंट के तौर पर गैर
जिम्मेदाराना बयान दे रहे
हैं. ध्यान रहे कि इस मामले
में न तो मोदी का अभी तक कोई
बयान आया है और न ही गुजरात के
पूर्व गृह राज्यमंत्री और
बीजेपी नेता अमित शाह का.
आरोप हैं कि अमित शाह के गृह
राज्य मंत्री रहते हुए ही
वर्ष 2009 में युवती की कई महीने
तक निगरानी की गई थी. दोनों
वेबसाइट्स ने जो टेप जारी
किये हैं, उसमें अमित शाह को
किसी साहेब के इशारे पर ऐसा
करते हुए बताया गया है.<br /><br />
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Web Title: जासूसी कांड: मोदी सरकार के न्यायिक आयोग के दायरे में सीबीआई और दो वेब पोर्टल्स!
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