जेडीयू के घोषणापत्र में प्राइवेट नौकरियों में भी आरक्षण की बात, प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए कानून का वादा

By: | Last Updated: Saturday, 5 April 2014 2:48 PM

नई दिल्ली. जेडीयू का घोषणापत्र जारी हो गया है. प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की बात इसका अहम हिस्सा है. इसमें फॉरवर्ड कमीशन बनाने, महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण देने और प्राइवेट नौकरियों में एससी-एसटी-ओबीसी को आरक्षण देने की भी बात की गई है.

 

घोषणापत्र में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की बात कर जेडीयू ने एक तीर से दो शिकार की कोशिश की है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे के जरिए जहां बिहार में नरेंद्र मोदी पर हमले के लिए कारगर रणनीति गढ़ चुके हैं. वहीं इसमें उन्हें जेडीयू के वोटों को सहेजने की कूबत भी दिख रही है.

 

वैसे जेडीयू के घोषणापत्र में समाज के हर तबके को साधने की कोशिश है. बिहार की तरह ही देश भर के पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण का वादा किया गया है.

 

सवर्ण वोटों को लुभाने के लिए आर्थिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़े सवर्णों के लिए सवर्ण कमीशन. निजी क्षेत्र की नौकरियों में एससी-एसटी-ओबीसी के लिए आरक्षण के अलावा बिहार और दूसरे पिछड़े राज्यों के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने की बात भी की गई है.

 

जेडीयू के घोषणापत्र में टैक्स में राज्यों की हिस्सेदारी पचास फीसदी तक बढ़ाने की बात भी कही गई है. यानी कांग्रेस हो, या बीजेपी या फिर आम आदमी पार्टी….जेडीयू ने अपने घोषणापत्र में सबकी काट समेटने की कोशिश की है. शायद यही वजह है कि शरद यादव दावा कर रहे हैं कि जनता का असली घोषणापत्र तो जेडीयू का घोषणापत्र है.

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Web Title: जेडीयू के घोषणापत्र में प्राइवेट नौकरियों में भी आरक्षण की बात, प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए कानून का वादा
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