टैक्‍स छूट से सरकारी घाटा बढ़ा: कैग रिपोर्ट

टैक्‍स छूट से सरकारी घाटा बढ़ा: कैग रिपोर्ट

By: | Updated: 24 Apr 2012 11:04 PM


नई
दिल्‍ली:
अपनी कमाई पर लगने
वाले टैक्स पर थोड़ी-बहुत छूट
पाने के लिए आम आदमी को काफी
कोशिशें करनी पड़ती हैं,
लेकिन सरकार से मिलनी वाली
टैक्स छूट का असली फायदा देश
के बड़े कारोबारी उठा रहे
हैं. यह खुलासा सीएजी की
ताज़ा रिपोर्ट में किया गया
है.

रिपोर्ट में बताया
गया है कि टैक्स पर दी जाने
वाली छूट के चलते पिछले पांच
साल में सरकार का घाटा बढ़कर
दोगुना हो गया है.

आम आदमी
एक-एक पैसा बचा कर अपनी कमाई
पर लगने वाले टैक्स पर थोड़ी
बहुत राहत पाने की उम्मीद
रखता है, लेकिन टैक्स छूट की
असली मलाई तो देश के
बड़े-बड़े कारोबारी घरानों
को मिल रही है.

सीएजी की
ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक
टैक्स पर छूट देने की वजह से
सरकार का घाटा पिछले पांच साल
में बढ़ कर दोगुना हो गया है.

रिपोर्ट
के मुताबिक साल 2006-07 में सरकार
को टैक्स छूट की वजह से कुल 65
हज़ार 587 करोड़ रुपये का
नुकसान उठाना पड़ा था, जबकि
साल 2010-11 में यह नुकसान बढ़कर
करीब दोगुना यानी 1 लाख 38
हज़ार 921 करोड़ हो गया है.

चौकाने
वाली बात यह है कि पांच साल
पहले उद्योग जगत को टैक्स छूट
देने में करीब 50 हज़ार 75 करोड़
का नुकसान हो रहा था. वहीं, अब
यह बढ़कर 88 हज़ार 263 करोड़ हो
गया है.

वहीं, देश के आम
आदमी को टैक्स छूट देने में
सरकार पांच साल पहले 15 हज़ार 512
करोड़ नुकसान झेलती थी. अब वो
बढ़ कर 50 हज़ार 658 करोड़ हुआ है.
यानी अगर एक पूरी राशि के तौर
पर देखें तो देश के एक अरब
लोगों को मिलने वाले टैक्स
छूट से कही ज्यादा इसका फायदा
कॉरपोरेट्स उठा रहे हैं.

सीएजी
की रिपोर्ट में टैक्स
डिपार्टमेंट के कामकाज करने
के रवैये पर भी सवाल उठाए गए
है. रिपोर्ट के मुताबिक सही
समय पर रिफंड नहीं देने की
वजह से सरकार को ब्याज के तौर
पर भी भारी रकम चुकानी पड़
रही है.

कर दाताओं को साल
2009-10 में 57 हज़ार 101 करोड़ रुपये
का रिफंड चुकाया गया, जिसमें
6876 करोड़ रूपए बतौर ब्याज़
चुकाने पड़े , जो कि कुल चुकाई
गई रकम का करीब 12 फीसदी है.

वहीं,
साल 2010-11 में सरकार को 75 हजार 169
करोड़ रुपये टैक्स रिफंड
देने की वजह राजस्व का नुकसान
हुआ, जिसमें रिफंड देने में
देरी की वजह से चुकाए गए
ब्याज की रकम 10499.4 करोड़ भी
शामिल है. यह रिफंड डायरेक्ट
टैक्स से होने वाली आय का
करीब 14 फीसदी है.




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