तिहाड़ में 'सहारा': 11 मार्च तक जेल में रहेंगे सुब्रत रॉय: सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Tuesday, 4 March 2014 7:35 AM
तिहाड़ में ‘सहारा’: 11 मार्च तक जेल में रहेंगे सुब्रत रॉय: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की जमकर फटकार लगाई और  उन्हें 11 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है.

 

अदालत के इस आदेश के बाद सुब्रत रॉय 11 मार्च तक तिहाड़ जेल में रहेंगे. इस केस की सुनवाई की अगली तारीख 11 मार्च रखी गई है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक वे पैसा लौटाने का ठोस फार्मूला नहीं बताते, तब तक उन्हें हिरासत में ही रखा जाए.

 

सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय के साथ उनके दो निदेशक को भी पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया. हालांकि, एक महिला निदेशक को हिरासत में रखने से बरी कर दिया.

 

मंगलवार को दोपहर में सुब्रत रॉय सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और निवेशकों के 20 हज़ार करोड़ लौटाने के कई फार्मूले पेश किए लेकिन अदालत संतुष्ट नहीं हुआ. सुब्रत रॉय ने अदालत से कहा कि वे बैंक गारंटी देने को तैयार हैं लेकिन इसपर अदालत संतुष्ट नहीं हुआ. फिर सुब्रत रॉय ने कहा कि वे अपनी संपत्ति बेचकर पैसे चुकाएंगे, लेकिन इसपर भी अदालत राजी नहीं हुआ.

 

अदालत ने साफ-साफ कहा कि ये तब तक हिरासत में रहेंगे जब तक कि ये यह नहीं बता दें कि पैसा किस तरह लौटाएंगे यह फॉर्मूला जब रॉय बता देंगे तब इनको रिहा कर दिया जाएगा.

 

अदालत ने सुब्रत रॉय पर बार-बार बयान बदलने और अलग-अलग बयान देने के लिए फटकार भी लगाई. अदालत का कहना है कि बीते 18 महीने से यह केस सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन आज तक आप पैसा लौटाने को लेकर कोई फार्मूला क्यों नहीं पेश किया.

 

क्या हैं आरोप

 

सहारा ग्रुप के मुखिया सुब्रत रॉय पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप है. सहारा को निवेशकों का करीब 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने का आदेश था जो अब तक पूरा नहीं हुआ.

 

निवेशकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनी नियामक संस्था सेबी और सहारा की जंग सुब्रत रॉय पर भारी पड़ गई है.

 

आरोप है कि सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वस्टमेंट कॉरपोरेशन ने 3 करोड़ निवेशकों से करीब 20 हजार करोड़ रुपये जुटाए. आरोप है कि सहारा की इन कंपनियों ने गैर कानूनी तरीके से ये रकम जुटाई.  सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को निवेशकों का पैसा ब्याज समेत कुल 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने को कहा. सहारा ने सेबी के पास सिर्फ 5 हजार 200 करोड़ रुपये जमा कराए.

 

क्यों किए गए गिरफ्तार

 

हुआ यूं कि 2010 में  सहारा प्राइम सिटी नाम की कंपनी ने शेयर बाजार से पैसे जुटाने के लिए आईपीओ निकाला. निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए आईपीओ के प्रोस्पेक्टस में लिखा था कि ग्रुप की दो अन्य कंपनियां डिबेंचर के ज़रिये सैकड़ों करोड़ पब्लिक से जुटा रही हैं.

 

इसपर सेबी की नज़र पड़ी कि ये कौनसी कंपनियां पैसा जुटा रही हैं जिनका सेबी को ही पता नहीं?

 

सेबी ने नवंबर 2010 में ऑर्डर जारी किया कि SIREC यानी सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉर्पोरेशन और SHIC यानी सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन पैसा जुटाना बंद करें. सहारा ने कहा कि हम पैसा पब्लिक से नहीं अपने परिवार से जुटा रहे है. सेबी ने कहा कि लाखों निवेशकों का सहारा परिवार कैसे हो सकता है, ये तो पब्लिक है.

 

सहारा ग्रुप हाई कोर्ट से स्टे ले आया तो सेबी सुप्रीम कोर्ट चला गया. तारीख पर तारीख पड़ती रही. तब सेबी में तैनात IAS अफसर के एम अब्राहम ने तहकीकात में पाया कि कंपनियों के पास सारे निवेशकों के नाम पते का ब्यौरा तक तैयार नहीं था. और दोनों कंपनियां 40,000 करोड़ जुटाने निकली थीं और करीब 24,000 करोड़ जुटा चुकी थीं.

 

अब्राहम का सेबी से तबादला हो गया लेकिन वो सहारा के खिलाफ अदालत में केस इतना पुख्ता कर गए कि सवाल ये नहीं रहा कि पैसा कहां है, बल्कि असली सवाल ये हो गया कि निवेशक कहां है? यानी निवेशक हैं भी या नहीं औऱ नहीं हैं तो ये हजारों करोड़ हैं किसके?

 

लंबी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये कंपनियां जो अब कह रही हैं कि इनको बाकी 20,000 करोड़ लौटाना है, वो 20,000 करोड़ सेबी को दो और निवेशकों की लिस्ट दो. सेबी अपने आप वापस कर देगा पैसा. निवेशकों की पूरी नाम पते वाली सही से जानकारी और पैसा सेबी को नहीं दे पाया है सहारा जिसका नतीजा ये है कि सुब्रत रॉय़ गिरफ्तार हो गए.

 

सहारा का पक्ष

 

सहारा ने सेबी के पास 5120 करोड़ जमा कराए हैं लेकिन सेबी ने पिछले सोलह महीनों में केवल एक करोड़ रुपये वापस किए हैं.. यानी देश भर में रकम वापसी की कोई मांग नहीं है.

 

वास्तव में 20 हजार करोड़ रुपये सिक्योरिटी के रूप में मांगे गए गए हैं क्योंकि 31 अगस्त का आदेश कहता है कि सेबी की जांच के बाद अगर आंशिक या पूरी तरह नकली खाते हों तो वो राशि सरकारी खाते में जाएगी. लेकिन पिछले 17 महीनों में सेबी ने एक प्रतिशत जांच भी नहीं की है.

 

कालिख फेंकी गई

 

इससे पहले, सुब्रत रॉय पर मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक शख्स ने काली स्याही फेंकी है. स्याही फेंकने वाले शख्स को पुलिस ने पकड़ लिया है और फिलहाल वह शख्स पुलिस हिरासत में है.

 

मामला यह है कि जैसे ही करीब एक बजे सुब्रत रॉय सुप्रीम कोर्ट परिसर के गेट पर वह अपनी गाड़ी से उतरे तो एक शख्स ने अचानक उनपर काली स्याही फेंक दी. वह शख्स चोर-चोर चिल्ला रहा था.

इस दौरान वहां हंगामा मच गया, पुलिस हरकत में आई और फौरन स्याही फेंकने वाले शख्स को दबोच लिया और तुरंत उसे अपने साथ लेकर कोर्ट परिसर से बाहर निकल गई. हालांकि इस बीच स्याही फेंकने वाला शख्स चंद मिनट तक मीडिया बात करने में कामयाब रहा.

 

हालांकि, कोर्ट में सुब्रत रॉय के साथ मौजूद लोगों ने मनोज शर्मा की पिटाई भी की है.

 

कौन है स्याही फेंकने वाला?

 

स्याही फेंकने वाले शख्स के मुताबिक वह ग्वालियर का रहने वाला है और पेशे से वकील है. उसने अपना मनोज शर्मा बताया है.  मनोज शर्मा ने सुब्रत रॉय को गरीबों के धन चुराने वाला करार दिया.

 

मनोज शर्मा का इतिहास है ऐसी वारदातें करने का. सुरेश कलमाडी पर जूते फेंकने और एक एसडीएम पर चाकू से हमला करने का भी आरोप लगा मनोज शर्मा पर.

आपको बता दें कि  सुब्रत राय की आज सुप्रीम कोर्ट में पेशी हुई. कोर्ट ने उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करते हुए 4 मार्च को कोर्ट में हाजिर होने को कहा था. बीते दिनों सुब्रत राय को लखनऊ में हिरासत में लिया गया था.

 

सहारा प्रमुख पर निवेशकों के करीब बीस हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है.

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सहारा केस से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार रहे: 

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सहारा केस से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार रहे:

# सितंबर 2009: सहारा प्राइम सिटी ने विवरण पुस्तिका (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रास्पेक्टस – डीआरएचपी) सौंपा.

 

# अक्तूबर 2009: सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कापरेरेशन लिमिटेड (एसआईईसीएल) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कापरेरेशन लिमिटेड (एचएसआईसीएल) ने रजिस्ट्रार आफ कंपनीज को वितवरण पुस्तिका सौंपा.

 

# दिसंबर 2009: प्रोफेशनल ग्रुप फार इन्वेस्टर प्रोटेक्शन की ओर से सहारा समूह के खिलाफ शिकायत मिली जिसमें उसने एसआईआरईसीएल और एचएसआईसीएल द्वारा धन जुटाने में गैरकानूनी तरीके अपनाने का आरोप लगाया.

 

# जनवरी 2010: किसी रोशन लाल की राष्ट्रीय आवास बैंक के जरिए सहारा समूह के खिलाफ इसी तरह की शिकायत मिली.

 

# नवंबर 2010: सेबी ने दोनों कंपनियों के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित किया.

 

# जून 2011: सेबी ने अंतिम आदेश पारित किया

 

# अक्तूबर 2011: प्रतिभूति अपीलीय पंचाट ने सेबी के आदेश को सही ठहराया

 

# अगस्त 2012: उच्चतम न्यायालय ने दोनों कंपनियों को सेबी के पास 24,000 करोड़ रपए जमा करने का निर्देश दिया ताकि निवेशकों को धन वापस किया जा सके.

 

# दिसंबर 2012: उच्चतम न्यायालय ने सहारा का तीन किस्तों में धन जमा करने की मंजूरी दी. उसने 5,120 करोड़ रपए की पहली किस्त जमा की.

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