...तो आडवाणी की नाराजगी के पीछे ये है सबसे बड़ा राज?

...तो आडवाणी की नाराजगी के पीछे ये है सबसे बड़ा राज?

By: | Updated: 20 Mar 2014 12:29 PM
नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर अपनी पार्टी से ही नाराज हैं. इस बार उनकी नाराजगी अपनी लोकसभा चुनाव में अपनी सीट को लेकर है. आखिर आडवाणी की नाजराजगी की असली वजह क्या है.

 

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सत्ता में आने को बेकरार बीजेपी के सबसे कद्दावर नेता 86 साल के लाल कृष्ण आडवाणी आखिर चाहते क्या हैं. ये पिछले कुछ समय से सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है. नरेंद्र मोदी को जब बीजेपी के चुनाव प्रचार का प्रभारी बनाया जा रहा था तब आडवाणी नाराज थे. मोदी को जब बीजेपी ने पीएम पद का उम्मीदवार बनाया उस वक्त नाराज होकर आडवाणी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया.

 

आडवाणी के लिए जब सीट चुनने का सवाल आया तो एक बार फिर आडवाणी नाराज हो गए. जिस नेता ने अपनी पार्टी को 2 सीट से सत्ता तक पहुंचाने का काम किया वह नेता आज चुनावी संग्राम से ऐन पहले एक बार फिर नाराज है.

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गुजरात के गांधीनगर से पांच बार संसद के लिए चुने जा चुके आडवाणी इस बार गुजरात से चुनाव लड़ने को तैयार नही हैं. आडवाणी मोदी की जगह शिवराज के मध्य प्रदेश से लोकसभा की नैया पार करना चाहते हैं. पर सूत्रों के मुताबिक संघ ने साफ कह दिया है कि आडवाणी या तो मोदी के गांधीनगर से चुनाव लड़ें या घर बैठें.

 

बीजेपी का सबसे बुजुर्ग नेता आखिर गांधीनगर से चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहता. इसी सवाल में आडवाणी की नाराजगी का जवाब  भी छिपा है.

 

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि आडवाणी को अपनी ही पार्टी की गुजरात इकाई पर भरोसा नहीं है. कहा जा रहा है कि मोदी के पीएम उम्मीदवार बनने के वक्त चूंकि आडवाणी ने विरोध किया था इसलिए मुमकिन है आडवाणी को गांधीनगर में भीतरघात का सामना करना पड़े. इस कारण आडवाणी किसी तरह का राजनीतिक जोखिम नहीं उठाना चाहते.

 

लालकृष्ण आडवाणी किसी भी सूरत में लोकसभा चुनाव जीतना चाहते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि भले ही मोदी पीएम पद के उम्मीदवार हैं लेकिन अगर बीजेपी 170-180 सीटों पर अटकी तो आडवाणी की लाटरी निकल सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि मोदी से दूरी बना कर रखने वाली पार्टियां आडवाणी के नाम पर सहमत हो सकती हैं. 

 

आडवाणी भोपाल से चुनाव लड़ने की जिद पर शायद इसलिए भी अड़े हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मोदी के नाम अगर सहमति नहीं बनी तो मध्य प्रदेश से जीतने वाले सभी सांसद आडवाणी के पीछे चट्टान की तरह खड़े हो कर उनका साथ दे सकते हैं.

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