दल बदलुओं की अजब-ग़ज़ब: कैसे कुछ के तीर निशाने पर लगे तो कई हाथ मलते रह गए

By: | Last Updated: Monday, 24 March 2014 1:17 PM
दल बदलुओं की अजब-ग़ज़ब: कैसे कुछ के तीर निशाने पर लगे तो कई हाथ मलते रह गए

नई दिल्ली: चुनावी मौसम में दल बदलने का खेल कोई नया नहीं है. कभी किसी को इमान मिलता है तो कभी पुराने साथी छूट जाते हैं, रुठ जाते हैं और यह खेल कभी कभी खेल बिगाड़ भी देता है.

 

इस बार के चुनावी मौसम में बीजेपी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह दल बदलने की प्रक्रिया का शिकार हुए हैं. अब वह बीजेपी पर ही हमलावर हैं. उनको ये बयान देने पर मजबूर होना पड़ा, क्योंकि बीजेपी ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर आए सोनाराम चौधरी को राजस्थान के बाड़मेर से लोकसभा टिकट दे दिया है और बीजेपी के सबसे पुराने नेताओं में से एक जसवंत सिंह का पत्ता साफ हो गया है. सोनाराम की तो चांदी हो गई.

 

उत्तर प्रदेश के एक दिन के मुख्यमंत्री और डुमरियागंज से कांग्रेस के सांसद रहे जगदंबिका पाल जैसे ही बीजेपी के पाले में आए उनके सुर बदल गए. जगदंबिका पाल ने कांग्रेस में सीनियरों की अनदेखी के नाम पर कांग्रेस से इस्तीफा दिया था. अब पार्टी ने पाल को डुमरियांगज से टिकट थमा दिया है.

 

आरजेडी में लालू यादव के बाद नंबर दो की हैसियत रखने वाले रामकृपाल यादव पानी पी-पीकर बीजेपी को कोसा करते थे लेकिन पार्टी बदली और नरेंद्र मोदी भाई हो गए. रामकृपाल के पाला बदलने की वजह थी बिहार की पाटलिपुत्र सीट जहां से आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव ने बेटी मीसा को टिकट दे दिया. नाराज रामकृपाल यादव ने आरजेडी छोड़ दी और बीजेपी ने इनाम में रामकृपाल को पाटलिपुत्र से ही टिकट दे दिया.

 

दल बदलुओं की लिस्ट में अमर सिंह और जया प्रदा का नाम भी जुड़ा. अमर सिंह अपनी लोकमंच पार्टी छोड़कर जया प्रदा के साथ अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए. आरएलडी ने अमर सिंह को फतेहपुर सीकरी से और जया प्रदा को बिजनौर से टिकट दिया है.

 

गुड़गांव से सांसद रहे राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस से करीब 36 साल पुराना रिश्ता तोड़ा और बीजेपी के साथ हो लिए. तीन बार सांसद रहे राव इंद्रजीत सिंह को बीजेपी ने गुड़गांव सीट से टिकट दिया है.

 

बीएसआर कांग्रेस के प्रमुख श्रीरामलु पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. सुषमा ने लाख विरोध जताया लेकिन पार्टी ने श्रीरामुलु को बेल्लारी सीट से टिकट दे ही दिया.

 

भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर बीजेपी के सुर में सुर मिला रहे हैं बीजेपी ने मनोज तिवारी को दिल्ली की उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से टिकट दिया है.

 

दलित नेता उदित राज ने अपनी जस्टिस पार्टी का विलय बीजेपी में कर लिया. बीजेपी ने उदित राज को उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट से टिकट दिया है.

 

बिहार की नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहीं परवीन अमानुल्लाह जेडीयू छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गईं. आप ने परवीन को बिहार की पटना साहिब सीट से शत्रुघ्नव सिन्हा के खिलाफ टिकट दिया है.

 

फिल्मकार प्रकाश झा ने पिछला चुनाव लोक जनशक्ति पार्टी की टिकट पड़ लड़ा था. इस बार पाला बदल कर नीतीश के साथ हो लिए. पश्चिमी चंपारण से जेडीयू ने प्रकाश झा को उम्मीदवार बनाया है.

 

बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन की पत्नी और पूर्व सांसद लवली आनंद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई हैं. मुलायम सिंह ने लवली को बिहार की शिवहर सीट से टिकट भी दे दिया है. 2009 के चुनाव में लवली शिवहर से कांग्रेस की उम्मीदवार थीं. आनंद मोहन अभी डीएम हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.

 

जेडीयू छोड़कर आरजेडी में गए भगवान सिंह कुशवाहा को आरा से टिकट मिला है. जेडीयू के सांसद मंगनीलाल मंडल को भी झंझारपुर से आरजेडी ने टिकट दिया है.

 

बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष महूबब अली कैसर कांग्रेस छोड़कर एलजेपी में आए और पार्टी ने भी खगड़िया से टिकट थमाने में देर नहीं की.

 

फैसला और फैसले का नतीजा. चुनावी मौसम में फैशन बन चुका है. हर बार जारी होती लिस्ट के साथ ऐसे नेताओं की तादाद बढ़ रही है जो पार्टी का चोगा बदलते हैं लेकिन टिकट लेकर मैदान में बने रहते हैं.

 

पार्टी बदली पर नहीं मिला टिकट

 

कॉमेडियन से नेता बने राजू श्रीवास्तव समाजवादी पार्टी छोडकर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. पहले एसपी का राग अलाप रहे थे अब बीजेपी के नाम की माला जप रहे हैं.

 

बीजेपी के कसीदे पढ़ने वाले राजू को अब तक कहीं से टिकट नहीं मिला है. समाजवादी पार्टी ने राजू को पिछले साल ही कानपुर से उम्मीदवार बनाया था लेकिन चुनाव आते-आते राजू साइकिल से उतर गए और बीजेपी में शामिल हो गए.

 

सतपाल महाराज उत्तराखंड की गढ़वाल सीट से सांसद हैं. कांग्रेस से करीब तीन दशक पुराना रिश्ता तोड़कर वो बीजेपी में शामिल हुए हैं. सतपाल जब तक बीजेपी का दामन थामते तब तक उत्तराखंड की सभी 5 सीटों पर बीजेपी ने उम्मीदवार उतार दिये थे. लिहाजा सतपाल को बिना टिकट के ही संतोष करना पड़ा है.

 

सम्राट चौधरी का चेहरा आप भूले नहीं होंगे. तेरह विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए सम्राट ने लालू की पार्टी तोड़कर सनसनी फैला दी थी. हालांकि उसी दिन 9 विधायक आरजेडी में लौट गए. विधायक सम्राट चौधरी बिहार की खगड़िया सीट से टिकट चाहते थे लेकिन जेडीयू ने उन्हें कहीं से उम्मीदवार नहीं बनाया. यही हाल उनके पिता के साथ भी हुआ. पूर्व सांसद शकुनी चौधरी भी आरजेडी से जेडीयू में गए लेकिन टिकट के लिए हाथ मलते रह गये.

 

लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से विधायक नवल किशोर यादव को बीजेपी ने पाटलिपुत्र से टिकट का भरोसा देकर शामिल कराया था. लेकिन नवल यादव की जगह टिकट ले गए उनके बाद बीजेपी में आए रामकृपाल यादव. अब नवल यादव बीजेपी नेतृत्व को कोस रहे हैं.

 

रामविलास पासवान की पार्टी ने एनडीए से नाता जोड़ा तो पार्टी के एक मात्र विधायक जाकिर अनवर जेडीयू में चले गए. उम्मीद थी कि अररिया से टिकट मिलेगा, लेकिन नीतीश के दरबार में उन्हें निराशा ही हाथ लगी.

 

करीब पैतीस साल तक कांग्रेस का झंडा ढोने वाले हरियाणा के दिग्गज नेता, सीएम हुड्डा के करीबी और जेसिका लाल हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा के पिता विनोद शर्मा के साथ तो और भी बुरा हुआ. बीजेपी में आना चाहते थे विरोध हुआ तो हरियाणा जनहित कांग्रेस के जरिए रास्ता बनाने की कोशिश हुई लेकिन यहां भी काम नहीं बना. नतीजा ये हुआ कि 35 साल से राजनीति कर रहे विनोद शर्मा अभी कहीं नहीं हैं. न कांग्रेस में और ना ही बीजेपी में ही.

 

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