दिल्ली के बाल श्रमिकों का आंकड़ा सरकार के पास नहीं

By: | Last Updated: Wednesday, 12 June 2013 11:34 PM
दिल्ली के बाल श्रमिकों का आंकड़ा सरकार के पास नहीं

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में
जहां पिछले पांच सालों में
श्रम विभाग ने सिर्फ 17 घरेलू
बाल मजदूरों की पहचान कर
उन्हें मुक्त करवाया है, वही
देश की राजधानी दिल्ली के
आंकड़े केंद्रीय श्रम
मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं
हैं.

सूचना का अधिकार
अधिनियम के तहत मंत्रालय से
यह जानकारी मांगी गई थी कि
पिछले पांच सालों में
राज्यवार कितने घरेलू बाल
श्रमिकों को मुक्त करवाया
गया है.

मंत्रालय द्वारा दी गई
जानकारी के अनुसार बिहार में
जहां पिछले पांच सालों में 91
घरेलू बाल मजदूर मिले, वहीं
चडीगढ़ में कोई भी घरेलू बाल
श्रमिक नहीं था. गुजरात में
घरों में काम करने वाले सिर्फ
12 बाल मजदूर ही श्रम विभाग के
अधिकारियों को दिखाई पड़े.
उल्लेखनीय है कि 12 जून को
अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम
विरोधी दिवस मनाया जाता है.

मध्य
प्रदेश, पंजाब, राजस्थान,
दिल्ली, उत्तराखंड,
छत्तीसगढ़ के आंकड़े
मंत्रालय के पास मौजूद नहीं
हैं. गौरतलब है कि 10 अक्टूबर, 2006
से बाल श्रम प्रतिषेध व
विनियमन अधिनियम 1986 में घरेलू
बाल श्रम को भी खतरनाक
उद्योगों की श्रेणी में
डालकर 14 वर्ष से कम उम्र के
बच्चों से काम करवाना पूर्णत:
प्रतिबंधित कर दिया गया था.

सूचना
का अधिकार अधिनियम के तहत
मिली जानकारी के अनुसार बाल
श्रम प्रतिषेध व विनियमन
अधिनियम 1986 के अन्तर्गत पिछले
साल राजधानी में इस कानून के
उल्लंघन में 185 मालिकों को
अभियोजित किया गया, पर सजा
कितने को हुई, इसकी जानकारी
नहीं है. इसी प्रकार
महाराष्ट्र में 125 मालिकों पर
अभियोजन दर्ज हुआ पर सजा
सिर्फ ती को हुई.

एक्शनएड
इंडिया की कार्यक्रम निदेशक
सहजो सिंह ने इन आंकड़ों पर
प्रतिक्रिया व्यक्त करते
हुए कहा है कि एक तरफ तो सरकार
बाल मजदूरी कानून में संशोधन
कर रही है, दूसरी तरफ मौजूदा
कानून को ठीक से क्रियान्वित
करा पाने में अक्षम साबित हो
रही है.

उन्होंने कहा कि
नए कानून में 18 वर्ष तक के
बच्चों को कानून की परिधि में
लाने और मालिकों पर पांच साल
तक की सजा तथा 50 हजार रुपये तक
के जुर्माने का प्रावधान
निश्चित ही स्वागत योग्य है,
परंतु श्रम अधिकारियों की
जवाबदेही सुनिश्चित करने की
सबसे जायद जरूरत है.

उन्होंने
आश्चर्य जताया कि मुंबई और
दिल्ली जैसे शहरों में घरों
में बच्चों से काम करवाने,
उनके साथ मारपीट और दुराचार
के मामले आए दिन मीडिया में
आते रहते हैं, फिर भी श्रम
विभाग को पूरे महाराष्ट्र
में पांच सालों में सिर्फ 17
बच्चे ही घरों में बाल श्रमिक
के रूप में मिले हैं.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: दिल्ली के बाल श्रमिकों का आंकड़ा सरकार के पास नहीं
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: ???? ?????? ???? varun kumar
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017