दिल्ली: क्या शीला को चौथी बार मिलेगा चांस?

By: | Last Updated: Friday, 4 October 2013 3:20 AM

दिल्ली
में कांग्रेस की पिछले 15
सालों से सरकार है और शीला
दीक्षित मुख्य़मंत्री हैं.
यहां भी मुकाबला बीजेपी और
कांग्रेस के बीच होता रहा है
लेकिन इस बार अरविंद
केजरीवाल की आप पार्टी ने
दोनों दलों की धड़कन भी बढ़ाई
है और मुकाबले को भी दिलचस्प
बना दिया है. पिछले चुनावों
में यहां की 70 सीटों में से
कांग्रेस को 43 और बीजेपी को 23
सीटें मिली थीं.

दिल्ली चुनाव के प्रमुख
चेहरे:
कांग्रेस ने एक बार
फिर तीन बार की सीएम शीला
दीक्षित पर दांव लगाया है.
उन्हें AAP के अरविंद केजरीवाल
टक्कर दे रहे हैं.

उधर बीजेपी के पास कोई चेहरा
नहीं है. विजय गोयल,
विजेन्द्र गुप्ता दोनों को
ही सीएम का दावेदार उनके
समर्थन बता रहे हैं लेकिन
बीजेपी सामूहिक नेतृत्व के
नाम पर चुनाव लड़ रही है और
मोदी के भरोसे है.

दिल्ली चुनाव के प्रमुख
मुद्दे:
शीला दीक्षित 15 साल
के विकास के नाम पर चुनाव
मैदान में उतरी हैं. कितनी
बदल गयी दिल्ली का नारा लगाया
है. मैट्रो, फ्लाई ओवर, सीएनजी,
बसें अन्य नागरिक सुविधाओं
के भरोसे है कांग्रेस. इसके
आलावा 800 से ज्यादा कालोनियों
को नियमित किया गया है, 45
झुग्गी झोपड़ी क्षेत्रों का
पुर्नवास भी हुआ है. भोजन का
अधिकार, आपका पैसा आपके पास
जैसी योजना चलाई गयी है.

उधर
बिजली और पानी के दाम बढ़ाने
के विरोध में पहले आप और फिर
बीजेपी ने आंदोलन कर इसे
मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया
है.

दिल्ली में कानून की
व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति,
महिलाओं के साथ अपराध जैसे
मुद्दों को भी विपक्ष धार दे
रहा है. चूंकि दिल्ली में ही
पिछले तीन सालों से अन्ना
हजारे के जन लोकपाल आंदोलन से
लेकर बाबा रामदेव की भूख
हड़ताल से लेकर केजरीवाल की
भूख हड़ताल हुई है.

यहीं 16 दिसंबर के गैंग रेप के
खिलाफ लोगों का गुस्सा फूटा
था. महंगाई ,भ्रष्टाचार भी
मुद्दा हैं.

दिल्ली पर है मोदी की नजर:
पिछले लोक सभा चुनावों में
यहां की सात सीटों में से
बीजेपी के हाथ शून्य ही लगा
था. मोदी के लिए इस शून्य को
भरने की भारी चुनौती है.
बीजेपी भी मोदी के ही भरोसे
चुनाव मैदान में उतरी है.

दिल्ली में फेसबुक, सोशल
मीडिया, टवीटर का इस्तेमाल
करने वालों की संख्या बहुत
है. केन्द्र सरकार पर मोदी
हमला करते रहे हैं और इसका
असर विधान सभा चुनावों में
बीजेपी के पक्ष में दिखे इसका
जुगाड़ भी मोदी को करना है.

मोदी के
लिए दिल्ली का विधानसभा
चुनाव जीतना वास्तव में
लोकसभा का सेमीफाइनल है.

फस्ट टाइम वोटर: दिल्ली
में 16.6 लाख वोटर हैं जो पहली
बार वोट डालेंगे. युवा वर्ग
को सत्ता विरोधी रुझान आमतौर
पर रहता है. ये वोट बैंक मोदी
और केजरीवाल के बीच बंटा
दिखाई देता है.

क्या कहते हैं सर्वे:
दिल्ली में सचमुच कांटे का
मुकाबला माना जा रहा है.
एबीपी न्यूज नील्सन का सर्वे
जहां त्रिशंकु विधान सभा का
अनुमाम बता रहा है जिसमें
बीजेपी को कांग्रेस से कुछ
आगे बताया जा रहा है.

कुछ अन्य सर्व  में कहीं
मामूल अंतर से कांग्रेस जीत
रही है तो कहीं बीजेपी सरकार
बनाती दिख रही है. बहुत कुछ आप
पर निर्भर करता है वो सीटें
निकालती है या वोट कटवा साबित
होती है.

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