दिल्ली में पानी मीटर को लेकर नया विवाद, जिस मीटर का केजरीवाल ने किया था विरोध वही फिर से लगाने की तैयारी, सीएम ने बैठक बुलाई

By: | Last Updated: Monday, 13 January 2014 6:15 AM

नई दिल्ली. दिल्ली में क्या मुख्यमंत्री की इजाजत के बगैर भी फैसले लिये जा रहे हैं. ये सवाल आज इसलिए क्योंकि जो दिल्ली जल बोर्ड मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अधीन आता है उसके फैसले की जानकारी मुख्यमंत्री को अखबार के जरिये हो रही है.

 

दिल्ली जल बोर्ड और मीटर लगाने वाली कंपनी की ओर से दिल्ली के कई आऱडब्ल्यूए को जल बोर्ड की ओर से मीटर लगाने का नोटिस जारी किया गया है. सबसे बड़ा विवाद ये है कि यह वही मीटर हैं जिसका खुद पिछले साल कांग्रेस के राज में अरविंद केजरीवाल ने विरोध किया था. जंतर मंतर पर पिछले साल अप्रैल महीने में प्रदर्शन करके केजरीवाल ने लोगों के सामने नमूना पेश किया था कि कैसे फूंक मारने पर भी ये मीटर हवा के दबाव से बिना पानी के भी चलने लगता है . अब दिल्ली जल बोर्ड, जो केजरीवाल के विभाग के अधीन हैं उसने लोगों से यही मीटर लगाने को कहा है . मुख्यमंत्री ने आज अखबार में खबर छपने के बाद जल बोर्ड की बैठक बुलाई है और कहा है कि ये फैसला नहीं लागू होने देंगे. सवाल यह कि जब सीएम केजरीवाल है तो फैसला कौन ले रहा है?

 

 

क्या दिल्ली वालों को पानी के बजाय फिर से हवा का बिल देना होगा? यह सवाल इसलिए क्योंकि दिल्ली जल बोर्ड पानी के वही मीटर लगाने के लिए नोटिस भेज रहा है, जिन्हें अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके फॉल्टी कहा था. केजरीवाल और उनकी टीम ने पिछले साल 28 अप्रैल को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर इन मीटरों पर सवाल उठाए थे. केजरीवाल ने डेमो देकर बताया था कि किस तरह मीटर में पानी के साथ हवा का भी बिल आता है. अब आम आदमी पार्टी की सरकार बनने और जल बोर्ड खुद सीएम केजरीवाल के अंडर में होने के बावजूद उन्हीं मीटरों को लगाया जा रहा है. कई आरडब्ल्यूए को जल बोर्ड की तरफ से और पानी के मीटर लगाने वाली कंपनी की तरफ से नोटिस आ रहे हैं.

 

नॉर्थ दिल्ली से आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि सौरभ गांधी ने बताया कि हमें कंपनी की तरफ से 4 जनवरी को लिखा नोटिस मिला. इसके साथ ही जल बोर्ड की तरफ से 2 जनवरी को जारी नोटिस की कॉपी भी लगी है. इसमें मीटर रिप्लेस करने में मदद करने की अपील की गई है. जल बोर्ड सभी मीटरों को चेंज करने का काम पिछले साल से ही कर रहा है. पिछले साल भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए थे. अब नई सरकार बनने के बाद वैसा ही नोटिस फिर आया है. इस नोटिस में कहा गया है कि जल बोर्ड प्रभावी व्यवस्था बनाने के लिए सभी मीटरों को बदलने के फैसले पर अमल कर रहा है ताकि नॉन रेवेन्यू वॉटर (ऐसा पानी, जिसका पैसा नहीं देना होता) कम किया जा सके. यह भी कहा गया है कि मीटर बदलना अनिवार्य है.

 

गांधी ने बताया कि नोटिस में लिखा है कि मीटर लगाने का खर्चा जल बोर्ड उठाएगा. कंपनी ही सात साल तक इनकी मेंटिनेंस का जिम्मा देखेगी. गांधी ने सवाल उठाया कि ज्यादातर घरों में बूस्टर पंप लगे हुए हैं, जो जल बोर्ड के नियमों के खिलाफ हैं. ऐसे में यह कंपनी बूस्टर पंपों का बहाना बनाकर मीटरों का मेंटिनेंस भी नहीं करेगी.

 

केजरीवाल के ‘जल स्वराज’ अभियान के साथी वॉटर एक्टिविस्ट भी इस पर विरोध जता रहे हैं. सिटीजंस फ्रंट फॉर वॉटर डेमोक्रेसी के कन्वीनर एस.ए. नकवी ने कहा कि किसी एक कंपनी से मीटर लगवाने के बजाय जल बोर्ड की गाइडलाइंस के हिसाब से अप्रूव्ड किसी भी कंपनी का मीटर लगवाने की छूट उपभोक्ताओं को दी जानी चाहिए.

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Web Title: दिल्ली में पानी मीटर को लेकर नया विवाद, जिस मीटर का केजरीवाल ने किया था विरोध वही फिर से लगाने की तैयारी, सीएम ने बैठक बुलाई
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