दिल्ली रेप: SHO और सब इंस्पेक्टर सस्पेंड

दिल्ली रेप: SHO और सब इंस्पेक्टर सस्पेंड

By: | Updated: 19 Apr 2013 10:06 AM














नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस
का कहना है कि पांच साल की
बच्ची से बलात्कार के आरोपी
की पहचान कर ली गई है और उसे
जल्द ही गिरफ्तारी कर लिया
जाएगा.




डीसीपी प्रभाकर ने कहा कि इस
केस में लापरवाही बरतने के
आरोप में गांधीनगर थाने के SHO
और जांच अधिकारी सब
इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर
दिया है.




उन्होंने कहा, "संदिग्ध आरोपी
की पहचान कर ली गई है और चार
टीमें इस काम में लगी हुई हैं
और हम उम्मीद करते हैं कि
जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया
जाएगा."




डीसीपी प्रभाकर ने कहा कि गृह
मंत्री इस केस को लेकर गंभीर
है और पुलिस की पहली कोशिश है
कि किसी तरह से आरोपी को
पकड़ा जाए. 




उन्होंने पुलिस का बचाव करते
हुए कहा कि पीड़ित की मां ने 15
अप्रैल की रात 8.30 बजे पुलिस से
शिकायत की उसकी बेटी शाम 6 बजे
से गायब है और पुलिस ने रात 10
बजे ही अगवा का मुकदमा दर्ज
कर लिया.





उनका कहना था कि पहले ही इस
रेप की घटना के खिलाफ
प्रदर्शन कर रही एक लड़की को
थप्पड़ मारने के आरोपी एसीपी
बनी सिंह अहलावत को सस्पेंड
किया जा चुका है.




ग़ौरतलब है कि दिल्ली में 5
साल की बच्ची के साथ बलात्कार
की घटना से सनसनी मची हुई है.
बच्ची को एम्स अस्पताल में
शिफ्ट किया गया है. चार
विभागों के डॉक्टरों की टीम
बच्ची के इलाज में जुटी हुई
है. बीजेपी नेता पूनम आजाद ने
बताया है कि बच्ची होश में है.




बच्ची की हालत में सुधार




दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री
एके वालिया का कहना है कि
बच्ची की हालत में पहले से
सुधार हो रहा है. उन्होंने
जानकारी दी कि पीड़ित बच्ची
को एम्स में ट्रांसफर किया जा
रहा है.





खास बात यह है कि गांधीनगर के
अस्पताल में पीड़ित बच्ची का
हाल जानने जब पूर्वी दिल्ली
के सांसद संदीप दीक्षित और
स्वास्थ्य मंत्री एके
वालिया पहुंचे तो उन्हें आम
आदमी पार्टी के
कार्यकर्ताओं और आम लोगों के
गुस्से का सामना करना पड़ा.
वालिया का आरोप है कि उन्हें
प्रदर्शन कर रही लड़कियों ने
घूसे तक मारे.




वालिया ने एबीपी न्यूज़ से
बातचीत में लड़कियों पर हुई
पुलिस कार्रवाई को जायज़
ठहराया और कहा कि इन लड़कियों
ने सीमाएं तोड़ी हैं. 





पुलिस ने मारा थप्पड़




अपराध रोकने में दिल्ली
पुलिस भले नाकाम रहती हो
लेकिन अपने खिलाफ आवाज उठाने
वालों की जुबान खामोश रखने
में वो ये भी भूल जाती है कि
सामने कोई महिला खड़ी है
लड़की?




दिल्ली में नाबालिग से रेप के
खिलाफ स्वामी नारायण
अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर
रही आम आदमी पार्टी की महिला
कार्यकर्ताओं को दिल्ली
पुलिस के एसीपी बनी सिंह ने
पीट दिया.




दरअसल, अस्पताल में भर्ती
बच्ची को देखने के लिए दिल्ली
के स्वास्थ्य मंत्री ए के
वालिया और पूर्वी दिल्ली से
सांसद संदीप दीक्षित वहां
पहुंचे थे. आम आदमी पार्टी की
कुछ लड़कियों ने इनसे मिलने
की कोशिश की तो पुलिसवाले इन
पर टूट पड़े.




इस खबर को एबीपी न्यूज पर
दिखाए जाने के बाद थप्पड़
मारने वाले एसीपी बनी सिंह
अहलावत को सस्पेंड कर दिया
गया है.




हालांकि, दिल्ली पुलिस का
बचाव करते हुए दिल्ली पुलिस
के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा
कि एसीपी अहलावत को स्सपेंड
कर दिया गया है और विभागीय
जांच की जा रही है.




उन्होंने कहा कि रेप की इस
घटना से जुड़े सारे मामले की
जांच की जा रही है और जो दोषी
होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की
जाएगी.





पेट से मिली मोमबत्ती




ऑपरेशन के दौरान पीड़ित
लड़की के पेट से मोमबत्ती और
प्लास्टिक की शीशी मिली है.
बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई
है. पुलिस को पड़ोसी पर रेप का
शक है जो फरार है.




याद रहे है कि गुरुवार की
पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर
इलाके के एक कमरे से बच्ची को
छुड़ाया गया. बच्ची को 15
अप्रैल को अगवा किया गया था.
उसकी नाज़ुक हालत को देखते
हुए अस्पताल में भर्ती कराया
गया.




अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान
उसके पेट से प्लास्टिक की
शीशी और मोमबत्ती भी निकाली
गई है. पुलिस को शक है कि बच्ची
के पड़ोसी ने ही रेप किया
लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी
नहीं हो पाई है.




पुलिस ने की रिश्वत की पेशकश




दरिंदगी की शिकार हुई पांच
साल की बच्ची के पिता का कहना
है कि पुलिस ने उन्हें चुप
रहने के लिए 2,000 रुपये की पेशकश
करते हुए यह सलाह दी थी कि
बच्ची के जिंदा बचे होने के
लिए वह ईश्वर का शुक्रिया अदा
करे.




पीड़ित बच्ची का इलाज पूर्वी
दिल्ली के शाहदरा स्थित
स्वामी दयानंद अस्पताल में
चल रहा है, जहां पीड़िता के
पिता ने संवाददाताओं से कहा,
"हम पुलिस के पास एफआईआर दर्ज
कराने गए थे. उन्होंने कभी
उसे (बच्ची) ढूंढ़ने की कोशिश
नहीं की, बल्कि हमें बाहर
निकाल दिया."




पीड़ित के पिता ने कहा कि
परिवार को बुधवार को बच्ची के
गुम होने का पता चला. पुलिस ने
उन्हें बच्ची के साथ हुई घटना
अपने परिवार के समक्ष उजागर
नहीं करने के लिए कहा और यहां
तक कि चुप रहने के लिए उन्हें
2,000 रुपये की पेशकश कर डाली.




बच्ची के पिता ने कहा, "पुलिस
ने हमसे कहा कि हमें मीडिया
में यह मामला नहीं लाना
चाहिए. उन्होंने हमें
खर्चा-पानी के तौर पर 2,000 रुपये
स्वीकार करने के लिए कहा और
हमसे हमारी बेटी को घर ले
जाने और उसके जल्द ठीक होने
के लिए प्रार्थना करने को
कहा.




आरोपी फरार





घटना के विरोध में
प्रदर्शनकारी शुक्रवार को
स्वामी दयानंद अस्पताल के
बाहर एकत्र हो गए, जहां बच्ची
का इलाज चल रहा है. उन्होंने
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला
दीक्षित तथा दिल्ली पुलिस के
खिलाफ नारेबाजी की.




एएपी की प्रवक्ता अस्वथी
मुरलीधरन ने कहा, "पुलिस ने
मामला दबाने की कोशिश की.
यहां तक कि उसने पीड़ित
परिवार को दो हजार रुपये देकर
चुप रहने के लिए कहा. इसके
अतिरिक्त बच्ची को जिस
अस्पताल में भर्ती कराया गया
है, वहां बेहतर चिकित्सा
सुविधाएं एवं उपकरण भी नहीं
है. हम चाहते हैं कि बच्ची को
जल्द से जल्द किसी बेहतर
अस्पताल में भर्ती कराया जाए
और आरोपी को गिरफ्तार किया
जाए."




आरोपी की उम्र करीब 30 साल बताई
जा रही है. बताया जाता है कि
उसने 15 अप्रैल को लड़की को
अगवा कर लिया और अपने फ्लैट
में बंधक बनाए रखा. वह पूर्वी
दिल्ली के गांधी नगर इलाके
में एक मकान के भूतल पर रह रहा
था, जहां पीड़िता का परिवार
भी रहता है.



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