देश की 67 फीसदी आबादी को मिलेगा सस्‍ता अनाज!

देश की 67 फीसदी आबादी को मिलेगा सस्‍ता अनाज!

By: | Updated: 05 Apr 2012 10:19 PM


नई
दिल्‍ली:
देश की 67 फीसदी
आबादी को सस्ता गेहूं और चावल
मिल सकता है.

खबर है कि
सरकार खाद्य सुरक्षा बिल में
ऐसे बदलाव करने पर विचार कर
रही है, जिनसे गरीबी रेखा से
ऊपर के परिवारों को भी सस्ती
दरों पर अनाज दिया जा सकेगा.


अगर यह योजना लागू हो गई,
तो देश के 80 करोड़ से ज्यादा
लोगों को इसका फायदा होगा.

केंद्र
सरकार देश के 80 करोड़ से
ज्यादा लोगों को सस्ता अनाज
मुहैया कराने पर विचार कर रही
है.

समाचार एजेंसी पीटीआई
के मुताबिक केंद्र सरकार फूड
सिक्योरिटी बिल में अहम
बदलाव करके देश की 67 फीसदी
आबादी को इसके दायरे में लाने
पर विचार कर रही है.

इन
लोगों को प्रतिव्यक्ति पांच
किलो की दर से गेहूं-चावल
मुहैया कराने की योजना है,
जिसमें चावल तीन रुपये किलो
और गेहूं दो रुपये किलो की दर
से मुहैया कराया जाएगा.

'अंत्योदय
अन्न योजना' के तहत आने वाले
परिवारों को पहले की तरह सात
किलो अनाज मिलता रहेगा. अगर
नया प्रस्ताव लागू हुआ, तो
गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों
भी सस्ता अनाज मिलने लगेगा.

सूत्रों
के मुताबिक नया प्रस्ताव
लागू होने पर सरकार को खाद्य
सुरक्षा के लिए 1 लाख 12 हज़ार
करोड़ रुपये खर्च करने
पड़ेंगे, जो मौजूदा अनुमानों
से 4,000 करोड़ रुपये ज्‍यादा है.

फूड
सिक्योरिटी बिल फिलहाल संसद
की स्थाई समिति के पास है. बिल
के मौजूदा प्रावधानों में
देश के सभी परिवारों को दो
श्रेणियों में बांटकर सस्ता
अनाज देने की बात कही गई है.

पहली
श्रेणी प्राथमिकता प्राप्त
परिवारों की रखी गई है,
जिन्हें हर महीने सात किलो
अनाज देने का प्रस्ताव है. इस
श्रेणी के परिवारों को चावल
तीन रुपये प्रति किलो की दर
से देने की बात है, जबकि गेहूं
दो रुपये प्रति किलो की दर से
देने का प्रस्ताव है.

दूसरी
श्रेणी साधारण परिवारों की
है, जिन्हें हर महीने कम से कम
तीन किलो चावल और गेहूं देने
की बात है. इसके लिए न्यूनतम
समर्थन मूल्य के 50 फीसदी के
बराबर दाम लेने का प्रस्ताव
है.

लेकिन सरकार अब इन
प्रावधानों में बदलाव करके
देश की 67 फीसदी आबादी को फूड
बिल के दायरे शामिल करने पर
विचार रही है. जबकि 33 फीसदी
आबादी को बाजार से अनाज
खरीदने में सक्षम मानकर फूड
सिक्योरिटी बिल के दायरे से
बाहर रखा जाएगा. इन 33 फीसदी
लोगों की पहचान का आधार भी
बिल में स्पष्ट किया जाएगा.

पीटीआई
ने सूत्रों के हवाले से बताया
है कि सरकार 2014 के आम चुनावों
से पहले खाद्य सुरक्षा कानून
को लागू करने का मन बना रही है.




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